March 03, 2015

उम्र हुई तुमसे मिले फिर भी जाने क्यों (Bahu Rani -1963) Umr hui tumse mile, phir bhi jane kyon (Bahu Rani -1963)

उम्र हुई तुमसे मिले
फिर भी जाने क्यों
ऐसे लगे जैसे पहली बार मिले हैं
         उम्र हुई बाग सजे,

         फिर भी जाने क्यों
         ऐसे लगे फूल पहली बार खिले हैं

रूप जगा यूं
बिन सँवारे साजना मैं सँवर गई
आज लगा यूं
मोतियों से मेरी माँग भर गई
कजरा छलके

अचरा ढलके
ऐसे लगे जैसे पहली बार मिले हैं

       संग तुम्हारा

       मेरी ज़िन्दगी को रास आ गया
       पा के सहारा

       दूर था मैं, अपने पास आ गय
       दुनिया सारी

       लागे न्यारी
       ऐसे लगे जैसे पहली बार मिले हैं

झूम उठा तन

मन में एक ऐसी बात आ गई
जिसकी थी लगन
आज वो मिलन की रात आ गई
अलके लहकें

अंखियां बहके
ऐसे लगे जैसे पहली बार मिले हैं


[Composer ; C.Ramachandra; Singer Hement Kumar, Lata Mangeshkar, Actor : Mala Sinha, Guru Dutt]
 

काम क्रोध और लोभ का मारा (बहू रानी - 1963) Kaam, krodh aur lobh ka mara (Bahu Rani -1963)

काम क्रोध और लोभ  का मारा, जगत ना आया रास
जब जब राम ने जन्म लिया, तब तब पाया बनबास  

कलयुग तक चलती आयी है, सतयुग की ये रीत 
सब कुछ हार चुके जब अपना, तब हो राम की जीत 
जुग बदले पर बदलना पाया, अब तक ये इतिहास 
जब जब राम ने जन्म लिया, तब तब पाया बनबास

छोड़ के अपने महल दोमहले, जंगल जंगल फिरना 
औरों के सुख चैन की खातिर, दुःख संकट में घिरना 
है यही राम के लेख की रेखा, आ गया अब विश्वास
जब जब राम ने जन्म लिया, तब तब पाया बनबास

राम हर इक जुग में आये पर कौन उन्हें पहचाना 
राम की पूजा की जग ने पर राम का अर्थ न जाना 
तकते तकते बूढ़े हो गये धरती और आकाश 
जब जब राम ने जन्म लिया, तब तब पाया बनबास

[Composer : C.Ramchandra, Singer : Mahender Kapoor, Actor : Guru Dutt, Mala Sinha]
 

ये हाथ ही अपनी दौलत है (मासूम-1960) Ye haath hi apni kismat hai (Masoom -1960)

ये हाथ ही अपनी दौलत है, ये हाथ ही अपनी ताकत है
कुछ और तो पूंजी पास नहीं, ये हाथ ही अपनी किस्मत है

हम मेहनत करते आये हैं, हम मेहनत करते जायेंगे 
जब तक ये हाथ सलामत है, क्यूँ दान के टुकड़े खायेंगे

हम धन वालों के पूत नहीं, निर्धन माँ-बाप के बच्चे हैं
सब और सहारे झूठे हैं, ये दो ही सहारे सच्चे हैं

क्या गम जो हमारे मात-पिता सोना-चाँदी न छोड़ सके
वो अच्छे दिल के मालिक थे, वो लूट का माल न जोड़ सके

भूलेंगे हम न इस शिक्षा को, चोरी से मेहनत बेहतर है
सुख के लिये जिल्लत सहने से, दुख सहने की आदत बेहतर है

[Composer : Robin Banerjee, Singer : Sudha Malhotra]
 

December 06, 2014

भूल सकता है भला कौन ये प्यारी आँखें (धर्मपुत्र -1961) Bhool sakta hai bhala kaun ye pyari aankhen – (Dharmputra- 1961)

भूल सकता है भला कौन ये प्यारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
मेरी हर सांस  ने हर सोच ने चाहा है तुम्हें
जब
से देखा है तुम्हें तब से सराहा है तुम्हें
बस
गई हैं मेरी आँखों में तुम्हारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
तुम जो नज़रों को उठाओ तो सितारे झुक जायें
तुम
जो पलकों को झुकाओ तो ज़माने रुक जायें
क्यूँ
न बन जायें इन आँखों पुजारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
जागती रातों को सपनों का खज़ाना मिल जाये
तुम जो मिल जाओ तो जीने का बहाना मिल जाये
अपनी क़िस्मत पे करे नाज़ हमारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
[Composer : N.Dutta;  Singer : Mahender Kapoor;    Producer : B.R.Chopra;   Director : Yash Chopra;  Actor : Sashi Kapoor]
 
 

November 30, 2014

पयाम-ए-इश्क़ मुहब्बत हमें पसन्द नहीं (बाबर - 1960) Payam e isq muhabbat hamen pasand nahin (Baabar -1960)

पयाम-ए-इश्क़ मुहब्बत हमें पसन्द नहीं
ये दिल्लगी, ये शरारत हमें पसन्द नहीं |

बजा नहीं था ये इज़हार बेक़रारी का
लिहाज़ कुछ तो किया होता पर्दादारी का
हया से इतनी बग़ावत हमें पसन्द नहीं
पयाम-ए-इश्क़ मुहब्बत हमें पसन्द नहीं |

हमें तो हँस के सितारों ने भी नहीं देखा
नज़र मिला के बहारों ने भी नहीं देखा
किसी निगाह की जुर्रत हमें पसन्द नहीं
ये दिल्लगी, ये शरारत हमें पसन्द नहीं |

जो तख़्त-ओ-ताज के वारिस हैं उनका प्यार ही क्या
बदलने वाली निगाहों का ऐतबार ही क्या
हज़ूर की ये इनायत हमें
पसंद नहीं
पयाम-ए-इश्क़ मुहब्बत हमें पसन्द नहीं |


[Composer : Roshan, Singer : Sudha Malhotra, Director : Hemen Gupta, Actor : Azra, Gajanan Jagirdar] 

उस जान-ए-दो-आलम का जलवा (नवाब साहब – 1978) Us jaan-e-do alam ka jalwa (Nawab Sahib -1978)

उस जान-ए-दो-आलम का जलवा 
पर्दे में भी है, बेपर्दा भी है 
गुस्ताख़ निगाहों का काबा  
पर्दे में भी है, बेपर्दा भी है | 
 
बैचेन रहे आशिक की नज़र 
थोड़ी सी मगर तस्कीन भी हो
उस पर्दानशीं का ये मंशा
अरे पर्दे में भी है, बेपर्दा भी है |
 
क्या हुस्न-ए-जमीं, क्या रंग-ए-फ़लक 
सब उसके करिश्मों की है झलकतारों में बसा है नूर उसका
फूलों में बसा है रंग उसका
हर रूप में शामिल रूप उसका
हर ढंग में शामिल ढंग उसका 
क्या हुस्न-ए-जमीं, क्या रंग-ए-फ़लक 
सब उसके करिश्मों की है झलक |
 
अव्वल भी वही, आखिर भी वही
ओझल भी वही, जाहिर भी वही
मंसूर वही, सरमद भी वही
लाहद भी वही, फरहद भी वही 
शोला भी वही, शबनम भी वही
सच ये है कि है खुद हम भी वही 
मख़लूक़ से ख़ालिक़ का रिश्ता
पर्दे में भी है, बेपर्दा भी है |
 
वो मालिक-ए-गुल महबूब मेरा
सुनता है हर इक धड़कन की सदा
जब उसका इशारा होता है 
तक़दीर संवरने लगती है 
मुद्दत के तरसते ख्वाबों की 
ताबीर उभरने लगती है 
वो मालिक-ए-गुल महबूब मेरा
सुनता है हर एक धड़कन की सदा |
सजदे में झुका कर सर अपना
मांगे जो कभी इंसान दुआ
हो जाती है हर मुश्किल आसां 
मिल जाती है दर्द-ए-दिल की दवा
वो मालिक-ए-गुल महबूब मेरा
सुनता है हर धड़कन की सदा
है उसकी ये खास-ओ-खास अदा
पर्दे में भी है, बेपर्दा भी है |
 

[Composer : C.Arjun, Singer :Md.Rafi, Manna Dey,  Producer : Satram Rohra, Director : Rajinder Singh Bedi, Actor : Parikshit Sahni, Rehana Sultan]
 

November 29, 2014

इक ख्वाबे तमन्ना भूले थे (नवाब साहब – 1978) Ek Khawabe tamanna bhule the (Nawab Sahib -1978)

इक ख्वाबे तमन्ना भूले थे, एक ख्वाबे तमन्ना फिर देखा
हालात की खूबी क्या कहिए, दिल फूँक तमाशा फिर देखा |

उल्फ़त के महकते गुलशन में, जो फूल खिले औरों ने चुने
अपनी तक़दीर में सहरा था, तक़दीर में सहरा फिर देखा |

पहले भी कहाँ दिलशाद थे हम, एक सहमी हुयी फरियाद थे हम
अरमानों की नीयत फिर देखी, ख्वाबों का जनाज़ा फिर |

हाँ उनकी खुशी में हम खुश हैं, इस रूह के सारे गम खुश हैं
खुद सेज सजा कर औरों की, आज अपने को तन्हा फिर देखा |

[Composer : C.Arjun, Singer :Asha Bhonsle,  Producer : Satram Rohra, Director : Rajinder Singh Bedi, Actor : Parikshit Sahni, Rehana Sultan]

 

November 22, 2014

दूर रह न करो बात (अमानत -1975) Door rah kar na karo baat (Amaanat -1975)

दूर रह न करो बात, करीब आ जाओ
याद रह जाएगी ये रात, करीब आ जाओ |

एक मुद्दत से तमन्ना थी तुम्हें छूने की
आज बस में नहीं जज़्बात, करीब आ जाओ |
सर्द झोंको से भड़कते हैं बदन में शोले
जान ले लेगी ये बरसात, करीब आ जाओ |

इस कदर हमसे झिझकने की जरूरत क्या है
जिंदगी भर का है अब साथ, करीब आ जाओ |

[Composer : Ravi, Singer : Md.Rafi, Producer : Shatrujeet Pal, Director : A.Bhim Singh, Actor : Manoj Kumar, Sadhna]