This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi, the greatest lyricist, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. For selecting a song of their choice, readers may type the name of song, movie, singer, composer etc in the SEARCH column on right side, or use the Labels on left side of page.
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July 30, 2017
December 06, 2014
भूल सकता है भला कौन ये प्यारी आँखें (धर्मपुत्र -1961) Bhool sakta hai bhala kaun ye pyari aankhen – (Dharmputra- 1961)
भूल सकता है भला कौन ये
प्यारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
मेरी हर सांस ने हर सोच ने चाहा है तुम्हें
जब से देखा है तुम्हें तब से सराहा है तुम्हें
बस गई हैं मेरी आँखों में तुम्हारी आँखें
जब से देखा है तुम्हें तब से सराहा है तुम्हें
बस गई हैं मेरी आँखों में तुम्हारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
तुम जो नज़रों को उठाओ तो सितारे झुक जायें
तुम जो पलकों को झुकाओ तो ज़माने रुक जायें
क्यूँ न बन जायें इन आँखों पुजारी आँखें
तुम जो पलकों को झुकाओ तो ज़माने रुक जायें
क्यूँ न बन जायें इन आँखों पुजारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
जागती रातों को सपनों का खज़ाना मिल जाये
तुम जो मिल जाओ तो जीने का बहाना मिल जाये
अपनी क़िस्मत पे करे नाज़ हमारी आँखें
तुम जो मिल जाओ तो जीने का बहाना मिल जाये
अपनी क़िस्मत पे करे नाज़ हमारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
[Composer : N.Dutta; Singer
: Mahender Kapoor; Producer : B.R.Chopra; Director :
Yash Chopra; Actor : Sashi Kapoor]
Labels:
1961,
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N.Dutta,
Sashi Kapoor,
Yash Chopra
May 15, 2011
ये किसका लहू है कौन मरा - धर्मपुत्र (1961) Yeh Kiska Lahu Hai Kaun Mara - Dharmputra (1961)
धरती की सुलगती छाती के बैचेन शरारे पूछते हैं
तुम लोग जिन्हे अपना न सके, वो खून के धारे पूछते हैं
सड़कों की जुबान चिल्लाती है
सागर के किनारे पूछते हैं -
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.
ये जलते हुए घर किसके हैं
कुछ हम भी सुने, हमको भी सुना.
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये जलते हुए घर किसके हैं
ये कटते हुए तन किसके है,
तकसीम के अंधे तूफ़ान में
लुटते हुए गुलशन किसके हैं,
बदबख्त फिजायें किसकी हैं
बरबाद नशेमन किसके हैं,
कुछ हम भी सुने, हमको भी सुना.
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.
किस काम के हैं ये दीन धरम
जो शर्म के दामन चाक करें,
किस तरह के हैं ये देश भगत
जो बसते घरों को खाक करें,
ये रूहें कैसी रूहें हैं
जो धरती को नापाक करें,
आँखे तो उठा, नज़रें तो मिला.
जिस राम के नाम पे खून बहे
उस राम की इज्जत क्या होगी,
जिस दीन के हाथों लाज लूटे
उस दीन की कीमत क्या होगी,
इन्सान की इस जिल्लत से परे
शैतान की जिल्लत क्या होगी,
ये वेद हटा, कुरआन उठा.
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.
किस काम के हैं ये दीन धरम
जो शर्म के दामन चाक करें,
किस तरह के हैं ये देश भगत
जो बसते घरों को खाक करें,
ये रूहें कैसी रूहें हैं
जो धरती को नापाक करें,
आँखे तो उठा, नज़रें तो मिला.
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.जिस राम के नाम पे खून बहे
उस राम की इज्जत क्या होगी,
जिस दीन के हाथों लाज लूटे
उस दीन की कीमत क्या होगी,
इन्सान की इस जिल्लत से परे
शैतान की जिल्लत क्या होगी,
ये वेद हटा, कुरआन उठा.
ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.
[Music: N.Dutta; Singer : Mahender Kapoor; Producer : B.R.Chopra; Director : Yash Chopra; Actor : Rajender Kumar, Sashi Kapoor]
Labels:
1964,
B.R.Chopra,
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Yash Chopra
चाहे ये मानो चाहे वो मानो (धर्मपुत्र -1961) Chahe Yeh Mano Chahe Woh Mano - (Dharamputra 1961)
काबे में रहो या काशी में, निस्बत तो उसी की ज़ात से है
तुम राम कहो के रहीम कहो, मतलब तो उसी की बात से है
तुम राम कहो के रहीम कहो, मतलब तो उसी की बात से है
ये मस्जिद है वो बुतखाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो
मकसद तो है दिल को समझाना, मानो ये मानो चाहे वो मानो
ये शेख़-ओ-बरहमन के झगड़े, सब नासमझी की बाते हैं
हमने तो है बस इतना जाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो
गर जज़्ब-ए-मुहब्बत सादिक हो, हर दर से मुरादें मिलती हैं
मंदिर से मुरादें मिलती हैं, मस्जिद से मुरादें मिलती हैं
काबे से मुरादें मिलती हैं, काशी से मुरादें मिलती हैं
हर घर है उसी का काशाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो
मकसद तो है दिल को समझाना, मानो ये मानो चाहे वो मानो
ये शेख़-ओ-बरहमन के झगड़े, सब नासमझी की बाते हैं
हमने तो है बस इतना जाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो
गर जज़्ब-ए-मुहब्बत सादिक हो, हर दर से मुरादें मिलती हैं
मंदिर से मुरादें मिलती हैं, मस्जिद से मुरादें मिलती हैं
काबे से मुरादें मिलती हैं, काशी से मुरादें मिलती हैं
हर घर है उसी का काशाना, चाहे ये मानो चाहे वो मानो
[Music : N.Dutta; Singer : Mahender Kapoor; Producer : B.R.Chopra; Director : Yash Chopra ]
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Dharamputra,
Mahender Kapoor,
N.Dutta,
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