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July 10, 2017

क़ज़ा ज़ालिम सही (लैला-मजनूं -1976) Kazaa zalim sahi (Laila Majnu-1976)

क़ज़ा ज़ालिम सही, ये ज़ुल्म वो भी कर नहीं सकती
जहां में कैस ज़िंदा है, तो लैला मर नहीं सकती
ये दावा आज दुनिया-भर से मनवाने की खातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है, अपने दीवाने की खातिर आ

तेरे दर से मैं खाली लौट जाऊं, क्या कयामत है
तू मेरी रूह का काबा, मेरी जाने-इबादत है
जबीने-शौक के सजदों को अपनाने की खातिर आ

मेरी दीवानगी की, मेरी वहशत की कसम तुझको
गुरूर-ए-इश्क़ की, नाज़े-मुहब्बत की कसम तुझको
जमाने को वफ़ा की शान दिखलाने की खातिर आ

मैं तेरे हुस्न का सदका उतारूं, सामने आजा
गिरेबां धज्जियां कर-करके वारूं सामने आजा
शिकस्ता-पर, परेशां-हाल परवाने की खातिर आ
           
[Composer : Jaidev, Singer : Md. Rafi,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

तेरे दर पे आया हूं (लैला-मजनूं -1976) Tere dar pe aaya hun (Laila Majnu-1976)

तेरे दर पे आया हूं कुछ कर के जाऊंगा
झोली भर के जाऊंगा या मर के जाऊंगा

तू सब कुछ जाने है
हर ग़म पहचाने है
जो दिल की उलझन है
सब तुझ पे रौशन है
घायल परवाना हूं
वहशी दीवाना हूं
तेरी शोहरत सुन-सुन के उम्मीदें लाया हूं
तेरे दर पे आया हूं कुछ कर के जाऊंगा

दिल ग़म से हैरां है
मेरी दुनिया वीरां है
नज़रों की प्यास बुझा
मेरा बिछड़ा यार मिला
अब या ग़म छूटेगा
वरना दम टूटेगा
अब जीना मुश्किल है, फ़रियादें लाया हूं
तेरे दर पे आया हूं कुछ कर के जाऊंगा

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md. Rafi,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor]


इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके (लैला-मजनूं -1976) Is reshmi pazeb ki jhankar ke sadke (Laila Majnu-1976)

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
जिसने ये पहनाई है उस दिलदार के सदके
     उस ज़ुल्फ़ के क़ुरबां लब--रुखसार के सदके
     हर जलवा था इक शोला हुस्न--यार के सदके

जवानी माँगती ये हसीं झंकार बरसों से
तमन्ना बुन रही थी धड़कनों के हार बरसों से
छुप-छुप के आने वाले तेरे प्यार के सदके 

     जवानी सो रही थी हुस्न की रंगीं पनाहों में
     चुरा लाये हम उनके नाज़नीं जलवे निगाहों में
     किस्मत से जो हुआ है उस दीदार के सदके

नज़र लहरा रही है, जिस्म पे मस्ती सी छाई है
     दुबारा देखने की शौक़ ने हलचल मचाई है
दिल को जो लग गया है उस आज़ार के सदके

[Composer : Madan Mohan, Singer : Lata Mangeshkar, Rafi,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]


हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को (लैला-मजनूं -1976) Husn hazir hai muhabbat ki sazaa pane ko (Laila Majnu-1976)

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को
कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को

मेरे दीवाने को इतना न सताओ लोगों
ये तो वहशी है, तुम्हीं होश में आओ लोगों
बहुत रंजूर है ये,  ग़मों से चूर है ये
ख़ुदा का ख़ौफ़ खाओ, बहुत मजबूर है ये
क्यों चले आये हो बेबस पे सितम ढाने को

मेरे जलवों की ख़ता है, जो ये दीवाना हुआ
मैं हूं मुजरिम ये अगर, होश से बेगाना हुआ
मुझे सूली चढ़ा दो कि शोलों में जला दो
कोई शिक़वा नहीं है, जो जी चाहे सज़ा दो
बख़्श दो इसको, मैं तैयार हूं मिट जाने को

पत्थरों को भी वफ़ा फूल बना सकती है
ये तमाशा भी सरे आम दिखा सकती है
लो अब पत्थर उठाओ!  ज़माने के ख़ुदाओं!
तुम्हें मैं आज़माऊं,  मुझे तुम आज़माओ
अब दुआ अर्श पे जाती है असर लाने को
 
[Composer : Madan Mohan, Singer : Lata Mangeshkar,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया (लैला-मजनूं -1976) Ho ke maayush tere dar se koi khali na gaya (Laila Majnu-1976)

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
झोलियां भर गईं सबकी कोई खाली न गया

तेरे दरबार में जो भी परेशां हो के आए
दुआएं दे के जाए और मुरादें ले के जाए
तू रहमत का फ़रिश्ता है, तू उजड़े घर बसाए
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाये
अहले-दिल, अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी
तूने डूबों को उभारा है, ये शोहरत है तेरी
अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी
तू मस्ती का ख़ज़ाना, तेरा हर दिल दीवाना
तू महबूब--ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया

जमाल--यार देखा है, रुख़--दिलदार देखा
किसी का नाज़नीं जलवा सर--दरबार देखा
तमन्नाओं के सहरा में हसीं गुलज़ार देखा
जब से देखा है तुझे दिल का अज़ब आलम है
जान-ओ-इमां भी अगर नज़र करूं तो कम है
था जो सुनने में आया तुझे वैसा ही पाया
तू अरमानों का साहिल, तू उम्मीदों की मंज़िल
तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए
तभी तो सब  कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया

[Composer : Madan Mohan, Singer : Mohd. Rafi, Aziz Nazaa, Shankar Shambhu, Ambar Kumar, Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए (लैला-मजनूं -1976) Ab agar hamse khudai bhi khafaa ho jaye (Laila Majnu-1976)

अब अगर हम से ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए
जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए

जिस घड़ी मुझको पुकारेंगी तुम्हारी बांहें
रोक पाएंगी न सहरा की सुलगती राहें
चाहे हर सांस झुलसने की सज़ा हो जाए

लाख ज़ंजीरों में जकड़ें ये ज़माने वाले
तोड़कर बंध निकल आएंगे आने वाले
शर्त इतनी है कि तू जलवा-नुमां हो जाए

ज़लज़ले आएं, गरज़दार घटाएं घेरें
खंदकें राह में हों, तेज़ हवाएं घेरें
चाहे दुनिया में क़यामत ही बपा हो जाए

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md.Rafi, Lata Mangeshkar, Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

December 28, 2016

मेरे दिलदार का बांकपन (दीदार-ए-यार- 1982) Mere dildar ka bankpan (Deedar-e-Yaar - 1982)

मेरे दिलदार का बांकपन, अल्लाह! अल्लाह!
चांदनी से तराशा बदन, अल्लाह! अल्लाह!
         देखकर जिसको हूरें भी सजदा करें 
         वो मेरी नाज़नीं, गुलबदन, अल्लाह! अल्लाह!
उस हसीं महजबीं की फबन, अल्लाह! अल्लाह!
         फूल से होंठ, रेशम-सा तन, अल्लाह! अल्लाह!
 
वो कनखियों से उनका हमें देखना
जबसे उसे देखा है दीवानों सी हालत है 
बेताब है हर धड़कन, बेचैन तबीयत है 
वो सर से कदम तक इक महकी हुई जन्नत है 
छूने से बदन मसके, इस दर्जा नजाकत है 
गुफ़्तार करिश्मा है, रफ्तार कयामत है (गुफ्तार- बातचीत)
दुनिया में वजूद उसका कुदरत की इनायत है 
वो जिस पे करम कर दे, वो साहिबे-किस्मत है 
वो कनखियों से उनका हमें देखना 
तीर तिरछे चलाने का फन, अल्लाह! अल्लाह!
 
         सादगी में छुपा शोखियों का समां 
         जिस हुस्न के जलवों पर दिल हमने लुटाया है 
         वो हुस्न ज़मीनों पर तकदीर से आया है 
         कुदरत ने बदन उसका फुर्सत से बनाया है 
         सौ तरह के रंगों से हर अंग सजाया है 
         घनघोर घटाओं को ज़ुल्फों में बसाया है 
         बिजली के तबस्सुम को नज़रों में घुलाया है (तबस्सुम – smile)
         महके हुये फूलों को सांसों में रचाया है 
         सादगी में छुपा शोखियों का समां          
         शोखियों में वो शर्मिलापन, अल्लाह! अल्लाह!
 
गालों में गुलाबीपन            आंखों में शराबीपन 
गर्दन का वो खम             होठों का वो नम 
डाली-सी कमर तौबा           बर्छी-सी नज़र तौबा 
तरशी हुई बाहें हैं              मख्मूर निगाहें हैं (मदोन्मत्त, intoxicated)
ज़ालिम है हया उसकी          क़ातिल है अदा उसकी 
मस्ती से भरी है वो           इक सब्ज़ परी है वो
चांदी के खिलौने-सी            फूलों के बिछौने- सी 
ग़ालिब की ग़ज़ल जैसी         मुमताज़ महल जैसी 
करके दीदारे-यार, आज दिल झूम उठा 
नूर से भर गए जानो-तन, अल्लाह! अल्लाह! 

(Composer : Laxmikant Pyarelal, Singer : KIshore Kumar, Mohd. Rafi; , Director : H S Rawal, Producer:  Prasan Kapoor,  Actor : Rishi Kapoor, Jitendra)

ईद का दिन है, गले आज तो मिल ले ज़ालिम (दीदार-ए-यार- 1982) Eid ka din hai, aaj to mil le gale zalim (Deedar-e-Yaar - 1982)

ईद का दिन है, गले आज तो मिल ले ज़ालिम
रस्मे-दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है

        इश्क़ इस तरह कि गुस्ताख़ तकाजे न करे
        हुस्न मस्तूर भी, मजबूर भी, मगरूर भी है (मस्तूर- veiled, hidden)
गुरूरे-हुस्न के सदके मुहब्बत यूं नहीं करते
        भरी महफिल में ज़ाहिर दिल की वहशत यूं नहीं करते

ये माना तुम हसीं हो और तुम्हें हक़ है शरारत का
किसी की जां पे बन जाए, शरारत यूं नहीं करते
        जिसे तुम हुस्न कहते हो, वो काबा है निगाहों का
        अदब लाज़िम है, काबे की जियारत यूं नहीं करते

कुछ अपने हुस्न की खैरात दे दो हम फकीरों को
किसी साइल को अपने दर से रुखसत यूं नहीं करते (साइल –begger, petitioner)
        हया और शर्म को हम हुस्न का जेवर समझते हैं
        ये जेवर लुट के रह जाए, सखावत यूं नहीं करते (सखावत -दानशीलता)
तुम्हारी इक नज़र पर फैसला है ज़िंदगानी का
मसीहा हो के बीमारों से गफ़लत यूं नहीं करते
        मसीहा और हम!! इन कुफ़्र की बातों से बाज़ आओ
        खुदा को छोड़कर बुत की इबादत यूं नहीं करते

आपने जो कहा वो ठीक सही, मेरा कहना भी कुछ बुरा तो नहीं
कि ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम
          रस्मे-दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है

(Composer : Laxmikant Pyarelal, Singer : Asha Bhonsle, Mohd. Rafi; , Director : H S Rawal, Producer:  Prasan Kapoor,  Actor : Rishi Kapoor, Tina Munim, Reena Roy)

June 01, 2016

तुमको देखा तो समझ में आया (दीदार-ए-यार- 1982) Tumko dekha to samajh me aaya (Deedar-e-Yaar - 1982)

तुमको देखा तो समझ में आया
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
बुत में बुतगर की झलक होती है
इसको छूकर उसे पहचानते हैं
पहले अंजान थे, अब जानते हैं
तुमको देखा तो समझ में आया

तुमको देखा तो ये मालूम हुआ,
लोग क्यों इश्क़ में दीवाने बने
ताज छोड़े गए और तख्त लुटे
कैस-ओ-फरहाद के अफसाने बने
पहले अंजान थे, अब जानते हैं
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
तुमको देखा तो ये समझ में आया

तुमको देखा तो ये अहसास हुआ
ऐसे बुत भी हैं जो लब खोलते हैं
जिनकी अंगड़ाइयां पर तोलती हैं
जिनके शादाब बदन  बोलते हैं
पहले अंजान थे, अब जानते हैं
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
तुमको देखा तो ये समझ में आया

हुस्न के जलवा-ए-रंगीं में खुदा होता है
हुस्न के सामने सजदा भी रवां होता है
दीन-ए-उल्फ़त में यही रस्म चली आई है
लोग इसे कुफ़्र भी कहते हों तो क्या होता है
 पहले अंजान थे, अब जानते हैं
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
तुमको देखा तो ये समझ में आया

(Composer : Laxmikant Pyarelal, Singer : Lata Mangeshkar, Director : H S Rawal, Producer:  Prasan Kapoor,  Actor : Rishi Kapoor, Tina Munim)

November 13, 2014

प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है खता नहीं (कभी कभी -1976) Pyar kar liya to kya, pyar hai khata nahin (Kabhi kabhi -1976)

प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है खता नहीं
तेरी मेरी उम्र में किसने ये किया नहीं
प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है खता नहीं |

तेरे होंठ मेरे होंठ सिल गये तो क्या हुआ
दिल की तरह जिस्म भी मिल गये तो क्या हुआ
इससे पहले क्या कभी ये सितम हुआ नहीं
प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है खता नहीं |

मैं भी होशमंद हूँ, तू भी होशमंद है
उस तरह जियेंगे हम जिस तरह पसंद है
उनकी बात क्यूँ सुनें जिनसे वास्ता नहीं
प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है खता नहीं

रस्म क्या रिवाज़ क्या, धर्म क्या समाज क्या
दुश्मनों का खौफ़ क्यूँ ,दोस्तों की लाज क्या
ये वो शौक है कि जिससे कोई भी बचा नहीं
प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है खता नहीं |

[Composer : Khayyam;  Singer: Kishore Kumar;   Producer/Director : Yash Chopra;   Actor : Rishi Kapoor, Neetu Singh]