Showing posts with label T.Prakash Rao. Show all posts
Showing posts with label T.Prakash Rao. Show all posts

July 30, 2017

क्या मिलिये ऐसे लोगों से (इज्ज़त -1968) Kya Miliye Aise Logon Se (Izzat - 1968)

क्या मिलिये ऐसे लोगों से, जिनकी फ़ितरत छुपी रहे
नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे |


खुद से भी जो खुद को छुपाएं,  क्या उनसे पहचान करें
क्या उनके दामन से लिपटें, क्या उनका अरमान करें
जिनकी आधी नीयत उभरे, आधी नीयत छुपी रहे

दिलदारी का ढोंग रचाकर, जाल बिछाएं बातों का
जीते-जी का रिश्ता कहकर, सुख ढूंढे कुछ रातों का
रूह की हसरत लब पे आए, जिस्म की हसरत छुपी रहे


जिनके ज़ुल्म से दुखी है जनता, हर बस्ती हर गांव में
दया-धरम की बात करें वो बैठ के सजी सभाओं में
दान का चर्चा घर घर पहुंचे, लूट की दौलत छुपी रहे

देखें इन नकली चेहरों की कब तक जय-जयकार चले
उजले कपड़ों की तह में कब तक काला संसार चले
कब तक लोगों की नज़रों से छुपी हकीकत छुपी रहे

[Composer : Lakshmikant Pyarelal, Singer : Md. Rafi, Producer/ Director : T.Prakash Rao; Actor : Dharmendra, Balraj Sahni]

March 11, 2015

सब में शामिल हो मगर (बहू बेटी -1965) Sabmen shamil ho magar (Bahu Beti -1965)

सब में शामिल हो मगर सबसे जुदा लगती हो
सिर्फ़ हमसे नहीं खुद से भी ख़फ़ा लगती हो

आँख उठती है, झुकती है किसी की ख़ातिर
साँस चढ़ती है रुकती है किसी की ख़ातिर
जो किसी दर पे ठहरे, वो हवा लगती हो
सिर्फ़ हमसे नहीं खुद से भी ख़फ़ा लगती हो

ज़ुल्फ़ लहराए तो आँचल में छुपा लेती हो
होंठ थर्रायेँ तो दाँतों में दबा लेती हो
जो कभी खुल के बरसे, वो घटा लगती हो
सिर्फ़ हमसे नहीं खुद से भी ख़फ़ा लगती हो


जागी-जागी नज़र आती हो सोई-सोई
तुम जो हो अपने ख़्यालात में खोई-खोई
किसी मायूस मुसव्विर की दुआ लगती हो
सिर्फ़ हमसे नहीं खुद से भी ख़फ़ा लगती हो
[Composer : Ravi, Singer : Md.Rafi,  Director : T.Prakash Rao, Actor : Joy Mukherjee, Mala Sinha]

भारत मां की आंख की तारों (बहू बेटी -1965) Bharat maan kii ankh ke taron (Bahu Beti-1965)

भारत मां की आंख की तारों, नन्हे मुन्ने राजदुलारों
जैसे मैंने तुमको संवारावैसे ही तुम भी देश संवारो

ये जो है इक छोटा सा बस्ता, इल्म के फूलों का गुलदस्ता
कृष्ण है इसमें, राम है इसमें, बुद्ध मत और इस्लाम है इसमें
ये बस्ता ईसा की कहानी, ये बस्ता नानक की वाणी
इसमें छुपी है हर सच्चाई, अपना सुख औरों की भलाई
इस बस्ते को सीस नवाओ, इस बस्ते पर तन मन वारो
भारत मां की आंख की तारों

छोड़ के झूठी जातें-पातें, सबसे सीखो अच्छी बातें
अपना किसी से बैर न समझो, जग में किसी को गैर न समझो
आप पढ़ो, औरों को पढ़ाओ, घर-घर ज्ञान की ज्योति जगाओ
नवजीवन की आस तुम्हीं हो, बनता हुआ इतिहास तुम्हीं हो
जितना गहरा अंधियारा हो, उतने ऊंचे दीप उभारो
भारत मां की आंख की तारों

ये संसार जो हमने सजाया, ये संसार जो तुमने पाया
इस संसार में झूठ बहुत है, जुल्म बहुत है, लूट बहुत है
जुल्म के आगे सर ना झुकाना, हर इक झूठ से टकरा जाना
इस संसार का रंग बदलना, उंच और नीच का ढंग बदलना
सारा जग है देश तुम्हारा, सारे जग का रूप निखारो
भारत मां की आंख की तारों

[Composer : Ravi, Singer : Asha Bhonsle,  Director : T.Prakash Rao, Actor : Mala Sinha, Ashok Kumar]
 

April 23, 2014

आज इस दर्जा पिला दो, के न कुछ याद रहे (वासना -1968) Aaj is darja pila do, ke an kuchh yaad rahe (Vaasna-1968)

आज इस दर्जा पिला दो, के कुछ याद रहे
बेख़ुदी इतनी बढ़ा दो, के न कुछ याद रहे |

दोस्ती क्या है, वफ़ा क्या है, मुहब्बत क्या है
दिल का क्या मोल है, एहसास की कीमत क्या है
हमने सब जान लिया है, के हक़ीक़त क्या है
आज बस इतनी दुआ दो के न कुछ याद रहे |

मुफ़लिसी देखी, अमीरी की अदा देख चुके
ग़म का माहौल, मुसर्रत की फ़िज़ा देख चुके
कैसे फिरती है ज़माने की हवा देख चुके
शम्मा यादों की बुझा दो, के न कुछ याद रहे |

इश्क़ बेचैन ख़्यालों के सिवा के कुछ भी नहीं
हुस्न बेरूह उजालों के सिवा कुछ भी नहीं
ज़िंदगी चंद सवालों के सिवा कुछ भी नहीं
हर सवाल ऐसे मिटा दो के न कुछ याद रहे |

मिट न पाएगा जहां से कभी नफ़रत का रिवाज
हो न पाएगा कभी रूह के ज़ख़्मों का इलाज
सल्तनत ज़ुल्म, ख़ुदा वहम, मुसीबत है समाज
ज़ेहन 
को ऐसे सुला दो के कुछ याद रहे |
 
[Singer: Md. Rafi, Composer : Chitragupta, Producer : Kuljit Pal; Director : T.Prakash Rao, Actor : Rajkumar]

July 09, 2013

ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं (इज्ज़त -1968) Yeh dil tum bin kahin lagta nahin (Izzat-1968)

ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, हम क्या करें
तसव्वुर में कोई बसता नहीं, हम क्या करें
तुम्ही कह दो अब जाने वफ़ा, हम क्या करें । 

     लुटे दिल में दिया जलता नहीं, हम क्या करें
     तुम्ही कह दो, अब जाने-अदा, हम क्या करें । 

किसी के दिल में बस के दिल को तड़पाना नहीं अच्छा 
निगाहों को छलकते देख के छुप जाना नहीं अच्छा
उम्मीदों के खिले गुलशन को झुलसाना नहीं अच्छा
हमें तुम बिन कोई जंचता नहीं, हम क्या करें
तुम्ही कह दो अब जानेवफ़ा, हम क्या करें । 

     मुहब्बत कर तो लें लेकिन, मुहब्बत रास आये भी 
     दिलों को बोझ लगते हैं, कभी ज़ुल्फ़ों के साये भी
     हज़ारों ग़म हैं इस दुनिया में, अपने भी पराये भी
     मुहब्बत ही का ग़म तन्हा नहीं, हम क्या करें
     तुम्ही कह दो, अब जाने-अदा, हम क्या करें । 

बुझा दो आग दिल की या इसे खुल कर हवा दे दो 
      जो इसका मोल दे पाये, उसे अपनी वफ़ा दे दो
तुम्हारे दिल में क्या है बस, हमें इतना पता दे दो
के अब तन्हा सफ़र कटता नहीं, हम क्या करें | 


[Composer : Lakshmikant Pyarelal, Singer : Lata Mangeshkar, Md. Rafi, Producer/ Director : T.Prakash Rao; Actor : Dharmendra, Tanuja]

October 10, 2011

इतनी नाज़ुक न बनो (वासना -1968) Itni Nazuk na bano (Vaasna -1968)

इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो,
हद के अन्दर हो नजाकत तो अदा होती है
हद से बढ जाये तो आप ही अपनी सज़ा होती है |

जिस्म का बोझ उठाये नहीं उठता तुम से
जिंदगानी का कडा बोझ सहोगी कैसे
तुम जो हलकी सी हवाओं में लचक जाती हो
तेज झोंकों के थपेड़ों में रहोगी कैसे |

ये न समझो के हर एक राह में कलियाँ होंगी
राह चलनी है तो काँटों में भी चलना होगा
ये नया दौर है इस दौर में जीने के लिए
हुस्न को हुस्न का अंदाज़ बदलना होगा |

कोई रुकता नहीं ठहरे हुए राही के लिए
जो भी देखेगा वो कतरा के गुज़र जाएगा
हम अगर वक़्त के हमराह न चलने पाए
वक़्त हम दोनों को ठुकरा के गुजर जाएगा |


इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो |


[Singer: Md. Rafi, Composer : Chitragupta, Producer : Kuljit Pal;  Director : T.Prakash Rao,  Actor : Vishwajeet]





June 08, 2011

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है (बहू बेटी -1965) Jiyo to aise jiyo jaise sab tumhaaraa hai (Bahu Beti-1965)

जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है 
मरो तो ऐसे कि जैसे तुम्हारा कुछ नहीं |

ये  एक  राज़  के दुनिया न जिसको जान  सकी
यही वो राज़ है जो ज़िंदगी का  हासिल  है,
तुम्हीं  कहो  तुम्हे ये बात कैसे  समझाऊँ
कि ज़िंदगी  की  घुटन ज़िंदगी की कातिल  है,
हर  इक  निगाह  को  कुदरत का  ये इशारा है
जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है । 

जहां में आ के जहां से खिचें-खिचें न रहो
वो  ज़िंदगी  ही  नही  जिसमें  आस  बुझ  जाए,
कोई भी प्यास दबाये से दब नहीं सकती
इसी  से  चैन  मिलेगा  कि प्यास  बुझ  जाए,
ये  कह के मुड़ता  हुआ  ज़िंदगी  का  धारा  है
जियो तो  ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है ।

ये  आसमां, ये जमीं, ये फिजा, ये नज़्ज़ारे
तरस  रहे  हैं  तुम्हारी मेरी नज़र  के लिए
नज़र चुरा  के हर एक शै को  यूं  न ठुकराओ
कोई  शरीक-ए-सफ़र  ढूँढ़ लो सफ़र के लिए
बहुत  करीब  से  मैंने  तुम्हें  पुकारा  है
जियो तो ऐसे जियो जैसे सब तुम्हारा है  ।    


[Composer : Ravi, Singer : Md. Rafi, Director ; T.Prakash Rao,  Actor : Joy Mukherjee, Mala Sinha]