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December 17, 2017

चांद मद्दम है आसमां चुप है (रेलवे प्लैटफ़ार्म -1955) Chand Maddham hai, aasmaan chup hai (Railway Platform -1955)

चांद मद्दम है आसमां चुप है
नींद की गोद में जहां चुप है

दूर वादी में दूधिया बादल, झुक के परबत को प्यार करते है
दिल में नाकाम हसरतें लेकर, हम तेरा इंतज़ार करते हैं

इन बहारों के साये में आजा, फिर मुहब्बत जवां रहे न रहे
ज़िंदगी  तेरे  नामुरादों  पर कल तलक मेहरबां रहे न रहे

रोज़ की तरह आज भी तारे, सुबह की गर्द में न खो जाएं
आ तेरे गम में जागती आंखें, कम-से-कम एक रात सो जाएं 

चांद मद्दम है आसमां चुप है
नींद की गोद में जहां चुप है


[Music : Madan Mohan, Singer ; Lata Mangeshkar;  Producer : Saigal Production, Direction : Ramesh Saigal, Actor : Sunil Dutt, Nalini Jaywant]

July 10, 2017

तेरे दर पे आया हूं (लैला-मजनूं -1976) Tere dar pe aaya hun (Laila Majnu-1976)

तेरे दर पे आया हूं कुछ कर के जाऊंगा
झोली भर के जाऊंगा या मर के जाऊंगा

तू सब कुछ जाने है
हर ग़म पहचाने है
जो दिल की उलझन है
सब तुझ पे रौशन है
घायल परवाना हूं
वहशी दीवाना हूं
तेरी शोहरत सुन-सुन के उम्मीदें लाया हूं
तेरे दर पे आया हूं कुछ कर के जाऊंगा

दिल ग़म से हैरां है
मेरी दुनिया वीरां है
नज़रों की प्यास बुझा
मेरा बिछड़ा यार मिला
अब या ग़म छूटेगा
वरना दम टूटेगा
अब जीना मुश्किल है, फ़रियादें लाया हूं
तेरे दर पे आया हूं कुछ कर के जाऊंगा

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md. Rafi,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor]


इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके (लैला-मजनूं -1976) Is reshmi pazeb ki jhankar ke sadke (Laila Majnu-1976)

इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
जिसने ये पहनाई है उस दिलदार के सदके
     उस ज़ुल्फ़ के क़ुरबां लब-ओ-रुखसार के सदके
     हर जलवा था इक शोला हुस्न-ए-यार के सदके

जवानी माँगती ये हसीं झंकार बरसों से
तमन्ना बुन रही थी धड़कनों के हार बरसों से
छुप-छुप के आने वाले तेरे प्यार के सदके 

     जवानी सो रही थी हुस्न की रंगीं पनाहों में
     चुरा लाये हम उनके नाज़नीं जलवे निगाहों में
     किस्मत से जो हुआ है उस दीदार के सदके

नज़र लहरा रही है, जिस्म पे मस्ती सी छाई है
     दुबारा देखने की शौक़ ने हलचल मचाई है
दिल को जो लग गया है उस आज़ार के सदके

[Composer : Madan Mohan, Singer : Lata Mangeshkar, Rafi,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]


हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को (लैला-मजनूं -1976) Husn hazir hai muhabbat ki sazaa pane ko (Laila Majnu-1976)

हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को
कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को

मेरे दीवाने को इतना न सताओ लोगों
ये तो वहशी है, तुम्हीं होश में आओ लोगों
बहुत रंजूर है ये,  ग़मों से चूर है ये
ख़ुदा का ख़ौफ़ खाओ, बहुत मजबूर है ये
क्यों चले आये हो बेबस पे सितम ढाने को

मेरे जलवों की ख़ता है, जो ये दीवाना हुआ
मैं हूं मुजरिम ये अगर, होश से बेगाना हुआ
मुझे सूली चढ़ा दो कि शोलों में जला दो
कोई शिक़वा नहीं है, जो जी चाहे सज़ा दो
बख़्श दो इसको, मैं तैयार हूं मिट जाने को

पत्थरों को भी वफ़ा फूल बना सकती है
ये तमाशा भी सरे आम दिखा सकती है
लो अब पत्थर उठाओ!  ज़माने के ख़ुदाओं!
तुम्हें मैं आज़माऊं,  मुझे तुम आज़माओ
अब दुआ अर्श पे जाती है असर लाने को
 
[Composer : Madan Mohan, Singer : Lata Mangeshkar,  Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया (लैला-मजनूं -1976) Ho ke maayush tere dar se koi khali na gaya (Laila Majnu-1976)

हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया
झोलियां भर गईं सबकी कोई खाली न गया

तेरे दरबार में जो भी परेशां हो के आए
दुआएं दे के जाए और मुरादें ले के जाए
तू रहमत का फ़रिश्ता है, तू उजड़े घर बसाए
तू रूहों का मसीहा है, तू हर ग़म को मिटाये
अहले-दिल, अहले-मोहब्बत पे इनायत है तेरी
तूने डूबों को उभारा है, ये शोहरत है तेरी
अनोखी शान तेरी, निराली आन तेरी
तू मस्ती का ख़ज़ाना, तेरा हर दिल दीवाना
तू महबूब-ए-ख़ुदा है, तू हर ग़म की दवा है
तभी तो सब कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया

जमाल-ए-यार देखा है, रुख़-ए-दिलदार देखा
किसी का नाज़नीं जलवा सर-ए-दरबार देखा
तमन्नाओं के सहरा में हसीं गुलज़ार देखा
जब से देखा है तुझे दिल का अज़ब आलम है
जान-ओ-इमां भी अगर नज़र करूं तो कम है
था जो सुनने में आया तुझे वैसा ही पाया
तू अरमानों का साहिल, तू उम्मीदों की मंज़िल
तू हर बिगड़ी बनाए, तू बिछड़ों को मिलाए
तभी तो सब  कहते हैं -
हो के मायूस तेरे दर से सवाली न गया

[Composer : Madan Mohan, Singer : Mohd. Rafi, Aziz Nazaa, Shankar Shambhu, Ambar Kumar, Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए (लैला-मजनूं -1976) Ab agar hamse khudai bhi khafaa ho jaye (Laila Majnu-1976)

अब अगर हम से ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए
जिस्म मिट जाए कि अब जान फ़ना हो जाए
गैर-मुमकिन है कि दिल दिल से जुदा हो जाए

जिस घड़ी मुझको पुकारेंगी तुम्हारी बांहें
रोक पाएंगी न सहरा की सुलगती राहें
चाहे हर सांस झुलसने की सज़ा हो जाए

लाख ज़ंजीरों में जकड़ें ये ज़माने वाले
तोड़कर बंध निकल आएंगे आने वाले
शर्त इतनी है कि तू जलवा-नुमां हो जाए

ज़लज़ले आएं, गरज़दार घटाएं घेरें
खंदकें राह में हों, तेज़ हवाएं घेरें
चाहे दुनिया में क़यामत ही बपा हो जाए

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md.Rafi, Lata Mangeshkar, Producer : Seeru Daryani, Director : H.S.Rawail, Actor : Rishi Kapoor, Ranjita]

May 21, 2014

दिल खुश है आज उनसे मुलाक़ात हो गयी (ग़जल -1964) Dil khush hai aaj unse mulaqat ho gayi (Ghazal -1964)

दिल खुश है आज उनसे मुलाक़ात हो गयी
गो दूर ही से बात हुई, बात हो गयी |

उनसे हमारा कोई त'आल्लुक़ तो बन गया
बिगड़े भी वो अगर तो बड़ी बात हो गयी |

धड़कन बढ़ी तो साँस की खुशबू बिखर गयी
आँचल उड़ा तो रंग की बरसात हो गयी |

जी चाहता है मान ही लें अब ख़ुदा को हम
जिसका यकीं न था वो क़रामात हो गयी |


[Composer : Madan Mohan, Singer : Md.Rafi, Actor : Sunil Dutt, Meena Kumari]

 

January 06, 2014

मुझे ये फूल न दे तुझको दिलबरी की क़सम (Ghazal -1964) Mujhe ye na phool de tujhko dilbari ki kasam (Ghazal -1964)

मुझे ये फूल न दे तुझको दिलबरी की क़सम
ये कुछ नहीं हैं तेरे होंठों की ताजग़ी की क़सम |

      नज़र हसीं हों तो  जलवे हसीन लगते हैं 
      मैं कुछ नहीं हूँ मुझे मेरे हुस्न ही की क़सम |

तू एक साज़ है छेड़ा नहीं किसी ने जिसे
तेरे बदन में छुपी नर्म रागिनी की क़सम |

       ये रागिनी तेरे दिल में है मेरे तन में नहीं
       परखने वाले मुझे तेरी सादगी की क़सम |

ग़ज़ल का लोच है तू नज़्म का शबाब है तू
यकीन कर मुझे मेरी ही शायरी की क़सम |

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md.Rafi, Suman Kalyanpur Actor : Sunil Dutt, Meena Kumari]
 

May 16, 2013

ताज तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही (Ghazal -1964) Taj tere liye ek mazhar-e-ulfat hi sahi (Ghazal -1964)

ताज तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही
तुम को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही 
मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से । 

अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है
कौन कहता है कि सादिक़ न थे जज़्बे उनके
लेकिन उनके लिये तशहीर का सामान नहीं
क्यों के वो लोग भी अपनी ही तरह मुफ़लिस थे । 

ये चमनज़ार ये जमुना का किनारा, ये महल
ये मुनक़्क़श दर-ओ-दीवार, ये महराब ये ताक़
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मुहब्बत का उड़ाया है मज़ाक । 

मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझसे । 

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md. Rafi, Actor : Sunil Dutt, Meena Kumari]


Note on Sahir :  The nazm used in the movie is a part of the original nazm ‘Taj Mahal’, which shot Sahir Ludhianvi to instant fame. He wrote it when he was in Lahore. Alongwith ‘Chakle’ and ‘Parchhaiyan’ this nazm is considered as best work of Sahir till today. In movie only three paragraphs of this nazm were used. The original nazm is given here as under :


ताज तेरे लिये इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही
तुम को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही

मेरे महबूब ! कहीं और मिला कर मुझ से |
बज़्म-ए-शाही में ग़रीबों का गुज़र क्या मानी
सब्त जिस राह पे हों सतवत-ए-शाही के निशाँ
उस पे उल्फ़त भरी रूहों का सफ़र क्या मानी |

मेरी महबूब पस-ए-पदर्आ-ए-तश्हीर-ए-वफ़ा
तू ने सतवत के निशानों को तो देखा होता
मुर्दा शाहों के मक़ाबिर से बहलने वाली
अपने तारीक मकानों को तो देखा होता |

अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है
कौन कहता है कि सादिक़ न थे जज़्बे उन के
लेकिन उन के लिये तश्हीर का सामान नहीं
क्यों के वो लोग भी अपनी ही तरह मुफ़लिस थे |

ये इमारातो-मक़ाबिर ये फ़सीलें, ये हिसार
मुतलक -उल-हुक्म शहंशाहों की अज़मत के सतूं

दामन-ए-दहर पे उस रंग की गुलकारी है
जिस में शामिल है तेरे और मेरे अजदाद का खूं |

मेरी महबूब! उन्हें भी तो मुहब्बत होगी
जिनकी सन्नाई ने बख्शी है इसे शक्ले -जमील
उनके प्यारों के मक़ाबिर रहे बे-नामो-नुमूद
आज तक उन पे जलाई न किसी ने क़ंदील  |


ये चमनज़ार ये जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक़्क़श दर-ओ-दीवार, ये महराब ये ताक़
इक शहनशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मुहब्बत का उड़ाया है मज़ाक |

मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझसे |


रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ (गजल -1964) Rang aur noor ki baarat kise pesh karun (Ghazal -1964)

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ
ये मुरादों की हसीं रात किसे पेश करूँ |

मैने जज़बात निभाए हैं उसूलों की जगह
अपने अरमान पिरो लाया हूँ फूलों की जगह
तेरे सेहरे की ये सौगात किसे पेश करूँ |

ये मेरे शेर मेरे आखिरी नज़राने हैं
मैं उन अपनों मैं हूँ जो आज से बेगाने हैं
बेतल्लुक सी मुलाकात किसे पेश करूँ |

सुर्ख जोड़े की तबोताब मुबारक हो तुझे
तेरी आँखों का नया ख़्वाब मुबारक हो तुझे
मैं 
ये  ख़्वाहिश, ये ख़यालात किसे पेश करूँ |

कौन कहता है के चाहत पे सभी का हक़ है
तू जिसे चाहे तेरा प्यार उसी का हक़ है
मुझसे कह दे मैं तेरा हाथ किसे पेश करूँ । 

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ
ये मुरादों की हसीं रात किसे पेश करूँ |

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md. Rafi, Actor : Sunil Dutt, Meena Kumari]