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December 14, 2016

जो वादा किया, वो निभाना पड़ेगा (ताज महल -1963) Jo Wada kiya who nibhana padega (Taj Mahal -1963)

जो वादा किया, वो निभाना पड़ेगा
रोके जमाना चाहे रोके खुदाई, तुमको आना पड़ेगा

सभी अहले दुनिया ये कहते हैं हमसे
कि आता नहीं कोई मुल्क-ए-अदम से
आज जरा शाने-वफ़ा देखे जमाना, तुमको आना पड़ेगा

ये माना हमें जां से जाना पड़ेगा
पर ये समझ लो तुमने जब भी पुकारा, हमको आना पड़ेगा

हम आते रहे हैं, हम आते रहेंगे
मुहब्बत की रस्में निभाते रहेंगे
जाने-वफ़ा तुम दो सदा, फिर क्या ठिकाना, हमको आना पड़ेगा

हमारी कहानी, तुम्हारा फ़साना
हमेशा-हमेशा कहेगा जमाना
कैसी फजां, हमको है आना, हमको आना पड़ेगा

 [Composer : Roshan; Singer : Md.Rafi, Lata Mangeshkar; Actor : Pradeep Kumar, Beena Roy]

जो वादा किया, वो निभाना पड़ेगा (ताज महल -1963) Jo Wada kiya woh nibhana padega (Taj Mahal -1963)

जो वादा किया, वो निभाना पड़ेगा
रोके जमाना चाहे रोके खुदाई, तुमको आना पड़ेगा

तरसती निगाहों ने आवाज़ दी है
मुहब्बत की राहों ने आवाज़ दी है
जाने-हया, जाने-अदा, छोड़ो तरसाना, तुमको आना पड़ेगा

ये माना हमें जां से जाना पड़ेगा
पर ये समझ लो तुमने जब भी पुकारा, हमको आना पड़ेगा

हम अपनी वफा पे ना इल्ज़ाम लेंगे
तुम्हें दिल दिया है, तुम्हें जां देंगे
जब इश्क़ का सौदा किया, फिर क्या घबराना, हमको आना पड़ेगा

चमकते हैं जब तक ये चांद और तारे
न टूटेंगे अब अहदो-पैमां हमारे  
इक दूसरा जब दे सदा, हो के दीवाना, हमको आना पड़ेगा |

[Composer : Roshan; Singer : Md.Rafi, Lata Mangeshkar; Actor : Pradeep Kumar, Beena Roy]


June 14, 2012

जुर्म-ए-उल्फ़त पे हमें लोग सज़ा देते हैं (ताज महल - 1963) Jurm e ulfat pe hame log sajaa dete hain (Taj Mahal - 1963)

जुर्म--उल्फ़त पे हमें लोग सज़ा देते हैं
कैसे नादान हैं, शोलों को हवा देते हैं ।

हम से दीवाने कहीं तर्क-ए-वफ़ा करते हैं
जान जाये के रहे, बात निभा देते हैं ।

आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तोलें
हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं ।

तख़्त क्या चीज़ है और लाल--जवाहर क्या है
इश्क़ वाले तो खुदाई भी लुटा देते हैं ।

हमने दिल दे भी दिया एहद--वफ़ा ले भी लिया
आप अब शौक़ से  दे दें, जो सज़ा देते हैं ।

[Composer : Roshan;  Singer : Lata Mangeshkar; Artist : Beena Roy, Pradeep Kumar]

पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी (ताज महल -1963) Paon choo lene do phoolon ko inayat hogi (Taj Mahal -1963)

पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी
वरना हमको नहीं इनको भी शिकायत होगी

आप जो फूल बिछाएं उन्हें हम ठुकराएं
हमको डर है के ये तौहीन--मुहब्बत होगी
पाँव छू लेने दो ...

दिल की बेचैन उमंगों पे करम फ़रमाओ
इतना रुक रुक के चलोगी तो क़यामत होगी
पाँव छू लेने दो ...

शर्म रोके है इधर, शौ उधर खींचे है
क्या खबर थी कभी इस दिल की ये हालत होगी
पाँव छू लेने दो ...

शर्म गैरों से हुआ करती है अपनों से नहीं
शर्म हम से भी करोगे तो मुसीबत होगी,
पाँव छू लेने दो ...

[Composer : Roshan; Singer : Md.Rafi, Lata Mangeshkar; Artist : Pradeep Kumar, Beena Roy]

खुदा-ए-बर्तर तेरी ज़मीं पर, ज़मीं की खातिर ये जंग क्यों है (ताज महल -1963) khuda e bartar teri zameen par (Taj Mahal - 1963)



खुदा--बर्तर तेरी ज़मीं पर, ज़मीं की खातिर ये जंग क्यों हो
हर एक फ़तह--ज़फ़र के दामन पे खून--इंसा  रंग क्यों है
खुदा--बर्तर ...

ज़मीं भी तेरी हैं हम भी तेरे, ये मिल्कियत का सवाल क्या है
ये कत्ल--ख़ूँ का रिवाज़ क्यों हैये रस्म--जंग--जदाल क्या है
जिन्हे तलब है जहान भर की,  उन्हीं का दिल इतना तंग क्यों है ।

ग़रीब माँओ शरीफ़ बहनों को अम्न--इज़्ज़त की ज़िंदगी दे
जिन्हे अता की है तू ने ताक़त, उन्हे हिदायत की रोशनी दे
सरों में किब्र--ग़ुरूर क्यों हैं, दिलों के शीशे पे ज़ंग क्यों है ।

क़ज़ा 
के रस्ते पे जाने वालों को बच के आने की राह देना
दिलों के गुलशन उजड़ जाए, मुहब्बतों को पनाह देना
जहां में जश्न--वफ़ा के बदले, ये जश्न--तीर--तफ़ंग क्यों है ।

[ Composer : Roshan; Singer : Lata Mangeshkar, Actor : Beena Roy]