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August 13, 2017

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो (लाइट हाउस - 1958) Gumba-Rumba, Gumba- Rumba Gelo (Light House -1958)

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
कल की बातें कल पर छोड़ो
आज मज़ा ले लो

           आ! तुझे कसम है
          आ! जहां का गम है
दिलवालों के इस मेले में मौज मना लो यारों
कस्टम-वस्टम, कल्चर वल्चर सबको गोली मारो
मुफ्त मिले जब दिल की खुशियाँ फिर तकलीफ़ें क्यों झेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
     
      आ! नज़ारे हैं जवां
      आ! तू गुम है कहां
खिले खिले मुरझा न जाएं ये फूलों से चेहरे
इन फूलों को गूँथ के पहनो सर पर बांधों सेहरे
दुनिया तुम से खेल रही है तुम दुनिया से खेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

[Composer : N.Dutta, Singer : Suman Kalyanpur, Mohd. Rafi, Director : G.P.Sippy]

January 06, 2014

मुझे ये फूल न दे तुझको दिलबरी की क़सम (Ghazal -1964) Mujhe ye na phool de tujhko dilbari ki kasam (Ghazal -1964)

मुझे ये फूल  दे तुझको दिलबरी की क़सम
ये कुछ नहीं हैं तेरे होंठों की ताजग़ी की क़सम |

      नज़र हसीं हों तो  जलवे हसीन लगते हैं 
      मैं कुछ नहीं हूँ मुझे मेरे हुस्न ही की क़सम |

तू एक साज़ है छेड़ा नहीं किसी ने जिसे
तेरे बदन में छुपी नर्म रागिनी की क़सम |

       ये रागिनी तेरे दिल में है मेरे तन में नहीं
       परखने वाले मुझे तेरी सादगी की क़सम |

ग़ज़ल का लोच है तू नज़्म का शबाब है तू
यकीन कर मुझे मेरी ही शायरी की क़सम |

[Composer : Madan Mohan, Singer : Md.Rafi, Suman Kalyanpur Actor : Sunil Dutt, Meena Kumari]
 

January 05, 2014

चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना (दिल ही तो है -1963) Chura le na tumko ye mausam suhana (Dil hi to hai -1963)

चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना
खुली वादियों में अकेली न जाना |
         लुभाता है मुझको ये मौसम सुहाना
         मैं जाऊँगी तुम मेरे पीछे न आना |
लिपट जाएगा कोई बेबाक झोंका
जवानी की रौ में ना आँचल उड़ाना
          मेरे वास्ते तुम परेशां न होना
          मुझे ख़ूब आता है दामन बचाना  |

घटा भी कभी चूम लेती है चेहरा
समझ सोच कर रुख़ से ज़ुल्फ़ें हटाना
         घटा मेरे नज़दीक आकर तो देखे
         इन आँखों ने सीखा है बिजली गिराना । 

तुम एक फूल हो तुमको ढूंढूंगा कैसे
कहीं मिल के फूलों में गुम हो न जाना
         जो फूलों में रंगत मिले भी तो क्या है
         जुदा मेरी ख़ुश्बू, जुदा मुस्कुराना |


[Composer : Roshan, Singer : Mukesh, Suman Kalyanpur, Producer : B.L.Rawal, Director : C.L.Rawal, P.L.Santoshi, Actor : Raj Kapoor, Nutan]

December 31, 2013

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना (दिल ही तो है -1963) Yun hi di ne chaha tha rona rulana (Dil hi to hai -1963)

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना 

हमें भी नहीं इल्म, हम जिस पे रोए
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना|

ग़म--दिल है और ग़म--ज़िंदगी भी
इसका ठिकाना, उसका ठिकाना 

कोई किस पे तड़पे, कोई किसपे रोए
इधर दिल जला है, उधर आशियाना 


[Composer : Roshan, Singer : Suman Kalyanpur, Producer : B.L.Rawal, Director : C.L.Rawal, P.L.Santoshi, Actor : Raj Kapoor, Nutan]

तुम्हारी मस्त नज़र, गर इधर नहीं होती (दिल ही तो है -1963) Tumhari mast nazar, gar idhar nahin hoti (Dil hi to hai -1963)

तुम्हारी मस्त नज़र, गर इधर नहीं होती
नशे में चूर फ़िज़ा इस क़दर नहीं होती |

           तुम्हीं को देखने की दिल में आरज़ूएं हैं
           तुम्हारे आगे ही ऊँची नज़र नहीं होती |

ख़फ़ा होना अगर बढ़ के थाम लूँ दामन
ये दिल फ़रेब ख़ता जान कर नहीं होती |

           तुम्हारे आने तलक हमको होश रहता है
           फिर सके बाद हमें कुछ खबर नहीं होती |

[Composer : Roshan, Singer : Mukesh, Suman Kalyanpur, Producer : B.L.Rawal, Director : C.L.Rawal, P.L.Santoshi, Actor : Raj Kapoor, Nutan]

May 18, 2013

बुझा दिये हैं खुद अपने हाथों (शगुन -1964) Bujha diye hain khud apno hathon (Shagoon -1964)

बुझा दिये हैं खुद अपने हाथों, मुहब्बतों के दिये जला के
मेरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं, उम्मीद की बस्तियाँ बसा के |

तुझे भुला देंगे अपने दिल से, ये फ़ैसला तो किया है लेकिन
दिल को मालूम है हम को, जियेंगे कैसे तुझे भुला के |

कभी मिलेंगे जो रास्ते में, तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे
कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा, तो चुप रहेंगे नज़र झुका के |

सोचने पर भी सोचती हूँ,  कि ज़िन्दगानी में क्या रहेगा
तेरी तमन्ना को ख़त्म कर के, तेरे खयालों से दूर जाके |

[Composer : Khayyam, Singer : Suman Kalyanpur, Production : Shaheen Art,  Director : Nazar, Actor : Wahida Rehman, Kamaljeet]


August 28, 2012

पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है (शगुन -1964) Parbaton ke pedon par sham ka basera hai (Shagoon-1964)

पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
सुरमई उजाला है, चम्पई अंधेरा है ।
 

दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
 
आसमां ने खुश हो के रँग सा बिखेरा है ।

ठहते-ठहरे पानी में गीत सरसराते हैं
भीगे-भीगे झोंकों में खुशबुओं का डेरा है ।

 
क्यों जज़्ब हो जाएं इस  हसीं नज़ारे में
 
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है ।
 
अब किसी नज़ारे की दिल को आरज़ू क्यों है
जब से पा लिया तुमको सब   जहां मेरा है ।



[Composer : Khayyam, Singer : Md. Rafi, Suman Kalyanpur,  Production : Shaheen Art, Director : Nazar, Actor : Wahida Rehman, Kamaljeet]