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June 12, 2015

ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले (नाचघर-1959) Aye dil zuban na khol, sirf dekh le (Nachghar -1959)

ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले
किसी से कुछ न बोल सिर्फ देख ले |

ये हसीन जगमगाहटें,
आँचलों की सरसराहटें
ये नशे में झूमती ज़मीं
सबके पाँव चूमती ज़मीं
किस कदर है गोल सिर्फ देख ले
ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले |

कितना सच है, कितना झूठ है
कितना हक है, कितनी लूट है
रख सभी की लाज, कुछ न कह
क्या है ये समाज, कुछ न कह
ढ़ोल का ये पोल सिर्फ देख ले
ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले |

मान ले जहां की बात को
दिन समझ ले काली रात को
चलने दे यूं ही ये सिलसिला
ये न बोल किसको क्या मिला
तराजुओं का झोल सिर्फ देख ले
ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले |
 
[Composer : N.Dutta, Singer : Lata Mangeshkar, Producer : Kwality Pictures, Director : R.S.Tara] 
 

December 26, 2013

हमने सुना था एक है भारत (दीदी -1959) Humne suna tha ek hai Bharat (Didi -1959)

हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत 
लेकिन जब नजदीक से देखा सोच समझ कर ठीक  से देखा
हमने नक्शे और ही पाए बदले  हुए सब तौर ही पाए
एक से एक की बात जुदा है, धर्म जुदा है जात जुदा है
आप ने जो कुछ हम को पढाया, वह तो कही भी  नज़र   आया |

जो कुछ मैंने तुम को पढाया, उसमे कुछ भी झूठ नहीं
           भाषा से भाषा मिले तो इसका मतलब फूट नहीं
          इक डाली पर रह कर जब फूल जुदा है पात जुदा
          बुरा नहीं गर यूँ ही वतन में धर्म जुदा हो जात जुदा |

वही है जव कुरआन का कहना, जो है वेद पुरान का कहना
फिर ये शोर - शराबा  क्यों है, इतना खून - खराबा क्यों है ?

                सदियों तक इस देश में बच्चो रही हुकूमत गैरों की
          अभी तलक हम सबके मुँह  पर धुल है उनके पैरों की,
          लडवाओ और राज करो, यह उन लोगो की हिकमत थी
          उन लोगों की चल में आना हम लोगों की जिल्लत  थी,
          यह जो बैर है इक  दूजे से यह जो फुट और रंजिश है
          उन्ही विदेशी आकाओं  की सोची समझी बखशिश  है |

 कुछ इन्सान  ब्रहान क्यों है, कुछ इंसान हरिजन क्यों है,
एक की इतनी इज्जत क्यों है, एक की इतनी ज़िल्लत  क्यों है ?

धन और ज्ञान को ताकत वालों ने अपनी जागीर कहा
मेहनत और गुलामी को कमजोरों की तक़दीर कहा,
इन्सानों का यह बटवारा वहशत और जहालत है
जो नफ़रत की शिक्षा दे वह धर्म नहीं है , लानत है,
      जन्म  से कोई नीच नहीं है, जन्म  से कोई  महान  नहीं
      करम से बढ़कर  किसी मनुष्य की कोई भी पहचान नहीं |

ऊँचे महल बनाने वाले फुटपाथों पर क्यों नहीं रहते है,
दिन भर मेहनत करने वाले फाकों का दुख क्यों  सहते है ?

खेतों और मिलों पर अब तक धन वालों का इजारा है
हमको अपना देश प्यारा, उन्हें मुनाफा प्यारा है,
उनके राज में बनती है हर चीज़ तिजारत की खातिर
अपने राज में बना करेगी सब की जरुरत की खातिर,

अब तो देश में आज़ादी है अब क्यों जनता फरियादी  है,
कब जएगा दौर पुराना, कब आएगा नया जमाना ?

सदियों की भूख और बेकारी क्या इक दिन में जाएगी,
इस उजड़े गुलशन पर रंगत आते आते आएगी,
ये जो नये मनसूबे है ये जो नई तामीरे है 
आने वाली दौर की  कुछ धुधली -धुधली तस्वीरे है,
तुम ही रंग भरोगे इनमें तुम ही इन्हें चमकाओगे
नवयुग  आप नहीं आएगा नवयुग को तुम लाओगे । 

[Composer :N. Dutta;   Singer : Md. Rafi, Asha Bhonsle;  Actor : Sunil Dutt]

May 14, 2013

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र उदास न हो (भाई बहन-1959) mere nadeem mere humsafar udas na ho (Bhai Bahen -1959)

मेरे नदीम, मेरे हमसफ़र उदास हो
कठिन सही तेरी मंजिल उदास हो

हर इक तलाश  के रस्ते में मुश्किलें हैं मगर 
हर इक तलाश मुरादों के फूल लाती है 
हज़ार चाँद-सितारों का खून होता है 
तो एक सुबह फिजाओं में मुस्कुराती है 
मेरे नदीम, मेरे हमसफ़र....

कदम-कदम पे चट्टानें खड़ी रहें लेकिन
जो चल निकलते हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते
हवाएं जितना भी टकरायें आंधियाँ बनकर
मगर घटाओं के परचम कभी नहीं झुकते
मेरे नदीम, मेरे हमसफ़र....

जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते 
वो जिंदगी में नया रंग ला नहीं सकते
जो रास्तों के अंधेरे से हार जाते हैं
वो मंजिलों के उजालों को पा नहीं सकते
मेरे नदीम मेरे हमसफ़र....

[Composer : N.Dutta, Singer : Sudha Malhotra]
 

August 31, 2012

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया (धूल का फूल-1959) Dhadakne lage dil ke taron ki duniya (Dhool ka Phool-1959)

धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो
संवर जाए हम बेकरारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो |

जो तुम मुस्कुरा दो, बहारें हंसे 
सितारों की उजली कतारें हंसे
जो तुम मुस्कुरा दो, नज़ारे हंसे
जवां धड़कनों के इशारे हंसे  |

हवा में ये ख़ुशबू की अंगड़ाइयाँ
ये आँखों पे ज़ुल्फ़ों की परछाइयाँ
ये मस्ती के धारे उबलते हुए
ये सीनों में तूफ़ां मचलते हुए  ।

ये बोझल घटाएं बरसती हुई
ये बेचैन रूहें तरसती हुई
ये साँसों से शोले निकलते हुए
बदन आँच खाकर पिघलते हुए 
धड़कने लगे दिल के तारों की दुनिया
जो तुम मुस्कुरा दो ।

 [Composer :  N.Dutta, Singer : Lata Mangeshkar,  Mahender Kapoor,,   Producer ; B.R.Chopra, Director : Yash Chopra, Actor : Rajender Kumar, Mala Sinha]

Note : With this movie, Yash Chopra started his career as a Director.