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October 10, 2011

इतनी नाज़ुक न बनो (वासना -1968) Itni Nazuk na bano (Vaasna -1968)

इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो,
हद के अन्दर हो नजाकत तो अदा होती है
हद से बढ जाये तो आप ही अपनी सज़ा होती है |

जिस्म का बोझ उठाये नहीं उठता तुम से
जिंदगानी का कडा बोझ सहोगी कैसे
तुम जो हलकी सी हवाओं में लचक जाती हो
तेज झोंकों के थपेड़ों में रहोगी कैसे |

ये न समझो के हर एक राह में कलियाँ होंगी
राह चलनी है तो काँटों में भी चलना होगा
ये नया दौर है इस दौर में जीने के लिए
हुस्न को हुस्न का अंदाज़ बदलना होगा |

कोई रुकता नहीं ठहरे हुए राही के लिए
जो भी देखेगा वो कतरा के गुज़र जाएगा
हम अगर वक़्त के हमराह न चलने पाए
वक़्त हम दोनों को ठुकरा के गुजर जाएगा |


इतनी नाज़ुक न बनो, इतनी नाज़ुक न बनो |


[Singer: Md. Rafi, Composer : Chitragupta, Producer : Kuljit Pal;  Director : T.Prakash Rao,  Actor : Vishwajeet]