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October 25, 2020

बने ऐसा समाज, मिले सबको अनाज (बहू रानी - 1963) Bane aisa samaaj, mile sabko anaaj (Bahu Rani - 1963)

बने ऐसा समाज, मिले सबको अनाज

न हो लूट, न हो फूट, न हो झूठ

तो जी कैसा हो, कैसा हो कैसा हो ?

 

जागे सबका नसीब, न हो कोई गरीब

मिटे रोग, भूले सोग, सभी लोग

तो जी कैसा हो, कैसा हो कैसा हो ?

 

न हो मेहनत पे धन का इजारा

सब करें अपने बल पर गुजारा

भेद और भाव मिट जाए सारा

आदमी आदमी को हो प्यारा

कोई उंच और नीच    

न हो दुनिया के बीच

न हो जात, न तो पात, रहे साथ

तो जी कैसा हो, कैसा हो कैसा हो ?

 

दीन और धर्म मांगे न चंदे

एक हो जाएं धरती के बंदे

टूट जाएं रिवाजों के फंदे

बंद हो जाएं चोरी के धंधे

मिटे काला बाज़ार

पड़े झूठे को मार

खुले पोल, फटे ढ़ोल, घटे मोल

तो जी कैसा हो, कैसा हो कैसा हो ?

 

सारे जग में हो सुख का सवेरा

जाए जुग-जुग का बोझल अंधेरा

कोई झगड़ा न हो तेरा मेरा

न हो देशों में जंग

रहे सब एक संग

बुझे आग, मिटे लाग, छिड़े राग

तो जी कैसा हो, कैसा हो कैसा हो ?

[Composer ; C.Ramachandra; Singer : , Lata Mangeshkar, Asha Bhonsle, Manna Dey  Actor : Guru Dutt]

January 26, 2018

आप आए तो ख़याले-दिले-नाशाद आया (गुमराह – 1963) Aap aaye to khayal-e-dil-e-naashad aaya (Gumrah – 1963)

आप आए तो ख़याले-दिले-नाशाद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

आपके लब पे कभी अपना भी नाम आया था
शोख नज़रों से मुहब्बत का सलाम आया था
उम्र भर साथ निभाने का पयाम आया था
आपको देख के वो अहदे-वफ़ा याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

रूह में जल उठे बुझती हुई यादों के दीये
कैसे दीवाने थे हम आपको पाने के लिए
यूं तो कुछ कम नहीं जो आपने अहसान किए
पर जो मांगे से न पाया वो सिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

आज वो बात नहीं फिर भी कोई बात तो है
मेरे हिस्से में ये हल्की-सी मुलाक़ात तो है
ग़ैर का हो के भी ये हुस्न मेरे साथ तो है
किस वक़्त मुझे कब का गिला याद आया
कितने भूले हुए ज़ख्मों का पता याद आया

[Composer : Ravi;  Singer : Mahender Kapoor,  Producer/Director : B.R.Chopra;  Actor : Sunil Dutt, Mala Sinha] 

ये हवा, ये हवा, ये हवा (गुमराह – 1963) Yeh hawa, ye hawa, ye hawa (Gumrah – 1963)

ये  हवा, ये  हवा, ये  हवा
ये फिजा, ये फिजा, ये फिजा  
है उदास जैसे मेरा दिल, मेरा दिल, मेरा दिल 
आ भी जा ! आ भी जा ! आ भी जा !

आ! कि अब तो  चांदनी भी जर्द हो चली, हो चली,  हो चली 
धडकनों की नर्म आंच सर्द हो चली, हो चली,  हो चली 
ढल चली है रात आ के  मिल! आ के  मिल!  आ के मिल! 
आ भी जा ! आ भी जा ! आ भी जा !

राह में बिछी हुई है मेरी हर नज़र, हर नज़र, हर नज़र 
मैं तड़प रहा हूं और तू है बेखबर,  बेखबर,  बेखबर 
रुक रही है सांस आ के मिल!  आ के मिल!  आ के मिल! 
आ भी जा ! आ भी जा ! आ भी जा !

[Composer : Ravi;  Singer : Mahender Kapoor,  Producer/Director : B.R.Chopra;  Actor : Sunil Dutt, Mala Sinha] 

आजा! आजा रे! तुझको मेरा प्यार पुकारे (गुमराह – 1963) Aaja aaj re, tujhko mera pyar pukare (Gumrah – 1963)

इन हवाओं में,  इन फ़िज़ाओं में
तुझको मेरा प्यार पुकारे
आजा! आजा रे! तुझको मेरा प्यार पुकारे
      रुक ना पाऊं मैं, खिचती आऊं मैं
      दिल को जब दिलदार पुकारे

लौट रही हैं मेरी सदाएं, दीवारों से सर टकरा के
हाथ पकड़कर चलने वाले, हो गए रुख़सत हाथ छुड़ा के
उनको कुछ भी याद नहीं है, अब कोई सौ बार पुकारे

इल्म नहीं था इतनी जल्दी ख़त्म फ़साने हो जाएंगे
तुम बेगाने बन जाओगे,  हम दीवाने हो जाएंगे
कल बाहों का हार मिला था,  आज अश्कों का हार पुकारे

लूट के मेरे दिल की दुनिया प्यार के झूले झूलने वाले !
पत्थर बनकर यूं चुप क्यूं है, कुछ तो कह ओ भूलने वाले!
इक पुरानी याद बुलाए, इक टूटा इकरार पुकारे
आजा आजा रे,  तुझको मेरा प्यार पुकारे
आजा! आजा रे! तुझको मेरा प्यार पुकारे


[Composer : Ravi;  Singer : Mahender Kapoor, Asha Bhonsle,  Producer/Director : B.R.Chopra;  Actor : Sunil Dutt, Mala Sinha]
  

August 05, 2017

नीले पर्बतों की धारा (आदमी और इंसान - 1969) Neele parbaton ki dhara (Aadmi aur Insaan -1969)

नीले पर्बतों की धारा,
आयी ढूँढने किनारा बड़ी दूर से
      
सब को सहारा चाहिये
      
कोई हमारा चाहिये

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
       
धरती से अम्बर तक फैला
      
चाहत की बाहों का घेरा

सूरज पीछे घूमे धरती
साँझ के पीछे घूमे सवेरा
      
जिस नाते ने इनको बाँधे
     
वो नाता है तेरा मेरा    

(Composer: Ravi;  Singer : Asha Bhonsle, Mahendra Kapoor;  Producer: B.R.Chopra,  Director : Yash Chopra, Actor : Saira Bano, Dharmendra)

August 02, 2017

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है (वक़्त -1965) Maine ik khwab sa dekha hai (Waqt -1965)

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है
सुन के शरमा तो न जाओगी?

मैंने देखा है कि फूलों से लदी शाखों में    
तुम लचकती हुई यूं मेरी क़रीब आई हो
जैसे मुद्दत से यूं ही साथ रहा हो अपना
जैसे अब की नहीं सदियों की शनासाई हो

      मैंने भी ख़्वाब सा देखा है
      खुद से इतरा तो न जाओगे?

      मैंने देखा कि गाते हुए झरनों के क़रीब
      अपनी बेताबी-ए-जज़्बात कही है तुमने
      कांपते होंठों से, रुकती हुई आवाज़ के साथ
      जो मेरे दिल में थी, वो बात कही है तुमने

आंच देने लगा क़दमों के तले बर्फ़ का फ़र्श
आज जाना कि मुहब्बत में है गर्मी कितनी
संगमरमर की तरह सख़्त बदन में तेरे
आ गयी है मेरे छू लेने से नर्मी कितनी      

       हम चले जाते हैं और दूर तलक कोई नहीं
       सिर्फ़ पत्तों के चटखने की सदा आती है     
       दिल में कुछ ऐसे ख़यालात ने करवट ली है
       मुझको तुमसे नहीं अपने से हया आती है

मैंने देखा
 है कि कोहरे से भरी वादी में
मैं ये कहता हूं चलो आज कहीं खो जाएं 
      मैं ये कहती हूं कि खोने की ज़रूरत क्या है
      ओढ़कर धुंध की चादर को यहीं सो जाएं

[Composer : Ravi; Singer : Asha Bhonsle, Mahendra Kapoor; Producer : B.R.Chopra; Director : Yash Chopra; Actor : Sunil Dutt, Sadhna]