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November 16, 2017

वादा! हां वादा! जब तक अम्बर पर तारे हों (द बर्निंग ट्रेन -1980) Wada! Han Wada! Jab taka mbar par tare hon (The Burning Train – 1980)

वादा!        हां वादा!
जब तक अम्बर पर तारे हों और धरती पर फूल खिलें
इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें
करो वादा     हां जी! वादा

देखो अब बिछड़े न मिल के निगाह
      कहा है तो हम सदा करेंगे निबाह
तपी-तपी धुली-धुली सांसें हैं गवाह
      जिएं चाहे मरें अब घटेगी न चाह
जब तक नदियों में पानी हो और पेड़ों के हाथ हिलें
      इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें

देखो कल ढूंढे नहीं हमको ये राह
      जुदा हो के जीना हो तो जीना है ग़ुनाह
मिली रही सदा यूं ही बांहों की पनाह
      घटेगा न कभी मेरा प्यार है अथाह
फूल बिछे हों इस रस्ते में या कांटों से पांव छिलें
     इसी जगह और इसी तरह हम दो मतवाले रोज़ मिलें

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Asha Bhonsle, Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Dharmendra, Hema Malini]

पहली नज़र में हमने तो अपना दिल दे दिया था तुमको ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Pehli nazar men hamne to apna dil de diya tha tumko (The Burning Train – 1980)

पहली नज़र में हमने तो अपना
दिल दे दिया था तुमको
पर तुमने देर लगाई
रुक-रुक के बात बढ़ाई
वैसे तो हमने मिलते ही तुमसे
अपना लिया था तुमको
पर जान के बात छुपाई
ना कहके कदर बढ़ाई

देखा तुम्हें तो हमने सबसे नज़र उठा ली
खोने की चीज़ खो ली,
पाने की चीज़ पा ली
सीधे न सही, घूम के सही मिल तो गये हैं

हमने तुम्हारी खातिर, क्या-क्या किए बहाने
आसान नहीं मोहब्बत अब तो ये बात माने
छोड़ा नहीं दम, जैसे भी हो हम मिल तो गए हैं

लिखा था आस्मां पर, यूँ ही ये खेल होना
पहले नज़र उलझना, फिर दिल का मेल होना
छोड़ो ये गिले, जैसे भी मिले, मिल तो गये हैं

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Md. Rafi, Asha Bhonsle, Kishore Kumar, Usha Mangeshkar;  Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Dharmendra, Hema Malini, Vinod Khanna, Parveen Bobby] 

मेरी नज़र है तुझ पे, तेरी नज़र है मुझ पे ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Meri nazar hai tujh pe, teri nazar hai mujh pe (The Burning Train – 1980)

मेरी नज़र है तुझ पे, तेरी नज़र है मुझ पे
इसीलिए रहते हैं दोनों खोए हुए
तेरे बिना जियरा माने ना
लगी अगन है ये कैसी हाय! जाने ना !

तेरे लिए कलियां मैं चुनती रहूं 
आशाओं की मालाएं बुनती रहूं
जागे में भी सपनों में खोई रहूं
सोते में भी आहट सी सुनती रहूं
ओ साजना! बालमा! मुझे क्या हो गया, जानू ना! 

मेरे बिना अब तू भी रह न सके
तेरे बिना अब मैं भी रह न सकूं  
हाय! मगर तू भी ये कह न सके
हाय! मगर मैं भी ये कह न सकूं 
जानेमन!  दफ़अतन दिल को ये क्या हुआ, जानूं ना ! 

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Asha Bhonsle, Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Dharmendra, Hema Malini, Vinod Khanna, Praveen Bobby, ]

June 27, 2016

तेरी है ज़मीं, तेरा आसमां ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Teri hai zameen, tera aasmaan (The Burning Train – 1980)

तेरी है ज़मीं, तेरा आसमां, तू बड़ा मेहरबां, तू बख्शीश कर!
सभी का है तू, सभी तेरे, खुदा मेरे तू बख्शीश कर!

तेरी मर्ज़ी से ए मालिक, हम दुनिया में आए हैं
तेरी रहमत से हम सबने ये जिस्म और जान पाए हैं 
तू अपनी नज़र हम पर रखना
किस हाल में हैं, ये खबर रखना

तू चाहे तो हमें रखे, तू चाहे हो हमें मारे
तेरे आगे झुका के सर, खड़े हैं आज हम सारे
ओ! सबसे बड़ी ताकत वाले
तू चाहे तो हर आफत टाले 

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Padmini Kolhapure, Sushma Shresht, Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Dharmendra, Hema Malini, Simi Grewal, Jitendra, Neetu Singh ]

तुमसे कहना है कि दुश्वार है तुम बिन जीना (चेहरे पे चेहरा -1980) Tumse kehna hai ki dushwar hai tum bin jina (Chehre pe Chehra -1980)

तुमसे कहना है कि दुश्वार है तुम बिन जीना
तुमसे कहना है मगर तुम कभी आओ तो कहूं

तुमको बीते हुये दिन याद नहीं हैं तो न हो
मैंने अब भी उन्हें सीने से लगा रखा है
इस यकीं पर कि किसी रोज़ तुम आओगे जरूर
घर की दहलीज़ को फूलों से सज़ा रखा है

टूट जाए न कहीं नाजे-मुहब्बत मेरा
रस्मे-दुनिया ही निभाने के लिए आ जाओ
आजमाना इसे समझूं कि सताना समझूं
मुझको बस इतना बताने के लिए आ जाओ  

[Composer : N.Dutta, Singer : Sulakshana Pandit, Producer/ Director : Raj Tilak, Actor : Sulakshana Pandit, Sanjeev Kumar]

September 17, 2015

पल दो पल का साथ हमारा ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Pal do pal ka saath hamara (The Burning Train – 1980)

पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं
इस मंज़िल पर मिलने वाले, उस मंज़िल पर खो जाने हैं
पल दो पल.......

नज़रों के शोख़ नज़राने, होंठों के गरम पैमाने
हैं आज अपनी महफ़िल में, कल क्या हो कोई क्या जाने
ये पल खुशी की जन्नत है, इस पल में जी ले दीवाने
आज की खुशियाँ एक हकीकत, कल की खुशियाँ अफसाने हैं
पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं

हर खुशी कुछ देर की मेहमान है
पूरा कर ले दिल में जो अरमान है
जिंदगी इक तेज़ रौ तूफान है
इसका जो पीछा करे नादान है
गुमशुदा खुशियों पर क्यों हैरान है
वक़्त लौटे इसका कब इम्तहान है,
झूम जब तक झूम
झूम जब तक धड़कनों में जान है
झूमना ही जिंदगी की शान है
अव्वल आखिर हर कोई अंजान है
जिंदगी बस राह की पहचान है
दोस्तों अपना तो ये ईमान है
जो जितना भी साथ दे एहसान है
उम्र का रिश्ता जोड़ने वाले
अपने नज़र में दीवाने हैं
पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं । 

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Mohammad Rafi, Asha Bhonsle , Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Jitendra, Neetu Singh ]

June 22, 2014

आज सोचा है ख्यालों में बुलाकर तुमको (चेहरे पे चेहरा -1980) Aaj socha hai Khayalon me bulakar tumko (Chehre pe Chehra -1980)

आज सोचा है ख्यालों में बुलाकर तुमको
प्यार के नाम पे थोड़ी सी शिकायत कर लेँ ।

ऐसे बिछुड़े हो कि जैसे कभी मिलना ही नहीं
ऐसे भूले हो कि जैसे कभी जाना ही ना था
अजनबी बन के अगर यूँ ही सितम ढाना था
पास आना ही ना था, पास बुलाना ही ना था
आओ टूटे हुये ख़्वाबों की ज़ियारत कर लें
आज सोचा है.……

रंजिशें भी  वहीँ पलती हैं जहाँ प्यार पले
प्यार ही जिससे नहीं, उससे गिला क्या होगा
मेरी उम्मीद है तू, तेरी तमन्ना मैं हूँ
और चाहत की दुआओं का सिला क्या होगा
रंजिशें भूलकर ख़्वाबों को हकीकत कर लें
आज सोचा है.……

[Composer : N.Dutta, Singer : Sulakshana Pandit,  Md.Rafi, Producer/ Director : Raj Tilak, Actor : Sulakshana Pandit, Sanjeev Kumar]
 

April 24, 2014

लोग औरत को फकत एक जिस्म समझ लेते हैं (इंसाफ का तराजू -1980) Log aurat ko fakat ek jism samajh lete hain (Insaaf ka tarazoo-1980)

लोग औरत को फकत एक जिस्म समझ लेते हैं
रूह भी होती है उसमें ये कहाँ सोचते हैं ।

रूह क्या होती है, इससे उन्हें मतलब ही नहीं
वो तो बस तन के तक़ाज़ों का कहा मानते हैं
इस हकीकत समझते हैं, न पहचानते हैं  ।

कितनी सदियों से ये वहसत का चलन जारी है
कितनी सदियों से है कायम, ये गुनाहों का रिवाज़
लोग औरत की हर चीख को नगमा समझे
वो कबीलों का जमाना हो, कि शहरों का समाज । 
जब्र से नस्ल बढ़े, जुल्म से तन मेल करे 
ये अमल हमने है, बेइल्म परिंदों में नहीं 
हम जो इंसानो की तहजीब लिए फिरते हैं 
हम सा वहसी कोई जंगल के दरिंदो में नहीं । 
एक मैं ही नहीं, न जाने कितनी होंगी 
जिनको अब आइना तकने से झिझक आती है 
जिनके ख्वाबों में न सेहरे हैं, न सिन्दूर, न सेज 
राख ही राख है, जो जेहन पे मंडळाती है  । 
एक बुझी रूह, लुटे जिस्म के ढांचे में लिए
सोचती हूँ कि कहाँ जा के  मुक्कदर फोडूं 
मैं न जिन्दा हूँ कि मरने का सहारा ढूँढू
और न मुर्दा हूँ कि जीने के ग़मों से छूटूं  ।
कौन बतलायेगा मुझको,किसे जाके पूंछूं 
जिंदगी पहर के साँचो में ढलेगी कब तक  
कब तलक आँख न खोलगा जमाने का ज़मीर  
जुल्म और जब्र की ये रीत चलेगी कब तक । 
लोग औरत को फकत एक जिस्म समझ लेते हैं  |  

[Composer : Ravinder Jain, Singer : Asha Bhonsle, Producer : B.R.Films, Director : B.R.Chopra, Actor : Zeenat Aman, Raj Babbar]

October 04, 2012

किसी के वादे पे क्यूँ ऐतबार हमने किया ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Kisi ke vade pe kyun aitbar hamne kiya (The Burning Train – 1980)

किसी के वादे पे क्यूँ ऐतबार हमने किया
न आने वालों का क्यूँ इंतज़ार हमने किया


न वो हमारे हुये और न हम रहे अपने
मुहब्बतों का अजब कारोबार हमने किया


वो खेल खेल रहे थे, वो खेल खेल चुके
ख़ता हमारी थी क्यूँ उनसे प्यार हमने किया


बिछड़ के उनसे न जब दिल किसी तरह बदला
शराबख़ाने का रुख़ इख़्तियार हमने किया


[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Asha Bhonsle , Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra]

हज़ार ख्वाब हकीकत का रूप ले लेंगे (इंसाफ का तराजू-1980) Hazaar khawab haqeeqat ka roop le lengey (Insaaf Ka Tarazoo -1980)

हज़ार ख्वाब हकीकत का रूप ले लेंगे
मगर ये शर्त है के तुम मुस्कुरा के हाँ कह दो ।
          मुहब्बतों में है दोनों का एक ही मतलब
         अदा से न कहो या मुस्कुरा के हाँ कह दो ।

हज़ार ख्वाब बहारों के और सितारों के
तुम्हारे साथ मेरी जिंदगी में आये हैं,
         तुम्हारी बाहों के झूले में झूलने के लिए
        मचल-मचल के मेरे अंग गुनगुनाये हैं ।
ये सारे शौक,  सारे शौक, सदाक़त का रूप ले लेंगे
मगर ये शर्त है के तुम मुस्कुरा के हाँ कह दो ।

भरेगी मांग तुम्हारी वो दिन भी क्या होगा
सजेगी सेज हवाओं की सांस महकेगी
          तुम अपने हाथों से सरकाओगे मेरा आँचल 
         अजब आग मेरे तन बदन में दहकेगी
ये सारे शौक,  सारे शौक, सदाक़त का रूप ले लेंगे
मगर ये शर्त है के तुम मुस्कुरा के हाँ कह दो ।

         मैं अपनी जुल्फों के साये बिछाऊंगी तुम पर
मैं तुमपे अपनी  जवान धड़कने  लुटाऊंगा
        मैं सुबह तुमको जगाऊंगी लब पे लब रखकर
मैं तुमको भींच के कुछ और पास लाऊंगा
         ये सारे शौक,  सारे शौक, सदाक़त का रूप ले लेंगे
मगर ये शर्त है के तुम मुस्कुरा के हाँ कह दो ।
         मुहब्बतों में है दोनों का एक ही मतलब
        अदा से न कहो या मुस्कुरा के हाँ कह दो ।
हज़ार ख्वाब हकीकत का रूप ले लेंगे । 

[Composer :  Ravinder Jain, Singer : Mahender Kapoor,  Asha Bhosle, Producer &  Director : B.R.Chopra]