साहिर पर मेरी पुस्तक 'मेरे गीत तुम्हारे' का दूसरा संस्करण प्रकाशित हो चुका है। पेपर बैक और हार्ड बाउंड, दोनों । पहला संस्करण 2016 में आया था । दो साल बीतते-बीतते दूसरा संस्करण आना एक लेखक के तौर पर मेरे लिए सुकून भरा अहसास है कि इस दौर में भी किताबें पढ़ी जा रही हैं, और इनमें यह किताब भी शामिल है । कई पत्रिकाओं, समाचार पत्रों ने इस पर समीक्षाएं भी प्रकाशित की थीं, उनमें से कुछ का जिक्र पुस्तक के बैककवर पर किया गया है। नए संस्करण में कुछ गीत भी जोड़े गए हैं, जिससे पृष्ठों की संख्या भी बढ़ गई है । सभी मित्रों-परिचितों-पाठकों का इस पुस्तक को इतना प्यार देने से लिए शुक्रिया!
This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi, the greatest lyricist, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. For selecting a song of their choice, readers may type the name of song, movie, singer, composer etc in the SEARCH column on right side, or use the Labels on left side of page.
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August 13, 2018
March 27, 2016
पल दो पल के शायर की दास्तान
(आउटलुक, अप्रैल11, 2016 के अंक में प्रकाशित मेरी पुस्तक “साहिर लुधियानवी: मेरे गीत तुम्हारे”
की समीक्षा)
साहिर की ज़ुबान, साहिर की
नज़्म, साहिर के गीत, साहिर की कहानियां, अगर साहिर को गिनते रहें तो वक़्त कम लगेगा | हिन्दी
और उर्दू को उन्होंने अपनी दो आँखों की तरह प्यार से पाला |
यह पुस्तक उसी साहिर के काम को याद दिलाती है | सुनील भट्ट
ने जितना संभव हो सका है, साहिर को लफ्जों के माध्यम से
पाठकों तक पहुँचने की कोशिश की है | अलग-अलग संदर्भों के साथ
साहिर अपने गीतों के माध्यम से पाठकों से रूबरू होते हैं |
सुनील भट्ट ने उन गज़लों को भी यहाँ जगह दी है जो मूल से रूपांतरित होकर फिल्म में आईं
हैं | इस किताब को संदर्भ के लिए याद किया जाना चाहिए | हिन्दी में इस तरह की किताबों की हमेशा कमी रही है |
सुनील भट्ट ने साहिर के लोकप्रिय गीतों के साथ उन
गीतों-नज़्मों-गज़लों को भी लिया है, जो सन 50 के
दौर में उन्होंने लिखी थीं | फिल्म के साल के साथ दी गई इस
जानकारी से साहिर को समझना और एक शायर, फिल्मी गीतकार के रूप
में उनकी यात्रा को जानना दिलचस्प होगा | उनकी इस रचनात्मक
यात्रा में उन्होंने कैसे-कैसे प्यार, देश, रंग-नस्ल, समुदाय पर लिखा और कितना मारक लिखा यह
जानकारी महत्वपूर्ण है | सुनील भट्ट ने किताब को इस तरह बाँट
दिया है, जिससे यह पता चल सके कि उनकी कलम कैसे समाज पर
करारी चोट करती थी | उनके भजनों में भी सांप्रदायिक सौहार्द और
अमन की बात खुलकर सामने आती थी | वह एक गीतकार थे या शायर, इस पुस्तक को पढ़ते हुये यह विचार आना लाजिमी है, लेकिन
जब विविधताओं से भरी उनकी रचनाएं पढ़ें तो लगता है कि उन्होंने एक गीतकार को शायर
से कभी अलग नहीं होने दिया | वह इतने सफल ही इसलिए रहे कि धुन
के हिसाब से शब्द लिखने में माहिर थे | वह कहानी के मूल में
पहुँच कर उस बिन्दु को पकड़ लेते थे, जहां व्यक्ति फिल्मी कहानी
के साथ-साथ संगीत का मज़ा भी लेने लगता है | उनकी फिल्मी पकड़
और समझ ने उन्हें इतनी ख्याति दिलाई | सुनील भट्ट ने साहिर
के गीतों से परिचय करने के साथ-साथ उनका परिचय भी पाठकों से कराया है |
सुनील अपनी प्रस्तावना में ही लिखते हैं, अगर हम साहिर के शायर और गीतकार दोनों पहलुओं को मिला दें तो एक विरत
व्यक्तित्व सामने आता है, जिस पर अलग से काम करने की पूरी
गुंजाइश है | यह वाक्य ही साहिर को समझने के लिए काफी है | क्योंकि आम लोगों के बीच साहिर सिर्फ फिल्मी गीतकार के रूप में ही पहचाने
जाते हैं, जबकि साहिर एक उम्दा शायर भी थे | इसी को समझने के लिए इस पुस्तक में उनकी मूल गज़लों,
नज़्मों का ज़िक्र भी है, जो बताता है कि उनकी कलम से तराने और
शायरी कैसे निर्बाध रूप से बहती थी | हर एक पल के शायर साहिर
के लिए फिल्मी गीत लिखना सिर्फ पैसा कमाने का माध्यम कभी नहीं रहा | वह इसे सामाजिक दायित्व भी मानते थे | भट्ट की
मेहनत से वह एक सम्पूर्ण रूप से पाठकों तक पहुंचे हैं |
हिन्दी पाठकों के लिए यह अच्छी खबर है |
March 02, 2016
Sahir Ludhianvi : Mere Geet Tumhare
February 16, 2016
February 11, 2016
साहिर लुधियानवी : मेरे गीत तुम्हारे Sahir Ludhianvi : Mere Geet Tumhare
मुझे यह बताते हुए बहुत
खुशी हो रही है कि साहिर लुधियानवी पर मेरी दूसरी पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है -
साहिर लुधियानवी : मेरे गीत तुम्हारे | यह पुस्तक साहिर
के गीतों पर मेरे तीन वर्षों के अध्ययन का परिणाम है | इसे स्टार पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित
किया गया है |
साहिर फिल्मी-गीतों को महज मनोरंजन का साधन नहीं मानते थे | उन्होंने अपने गीतों में कई विषयों को उठाया | उन्होंने न सिर्फ सामाजिक बुराइयों पर आघात किया, बल्कि आजाद भारत के हालात, उसके भविष्य की रूपरेखा, धार्मिक सौहार्द, स्त्रियों की स्थिति, वक्त की ताकत, प्रेम की अवधारणा जैसे कई जटिल विषयों पर अपने विचार रखे । साहिर के अलावा शायद ही किसी गीतकार का कैनवास इतना विशाल रहा हो । मौजूदा पुस्तक में इन विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है और साहिर के विचारों को जानने, समझने की कोशिश की गई है |
साहिर ने 115-120 फिल्मों के लिए लगभग सवा से साढ़े सात सौ गीत लिखे । मुझे उनकी 114 फिल्मों के 712 गीतों की जानकारी मिली | इनमें से मुझे 696 गीत उपलब्ध भी हो पाये । प्रस्तुत पुस्तक इन्हीं 696 गीतों का सार है |
साहिर फिल्मी-गीतों को महज मनोरंजन का साधन नहीं मानते थे | उन्होंने अपने गीतों में कई विषयों को उठाया | उन्होंने न सिर्फ सामाजिक बुराइयों पर आघात किया, बल्कि आजाद भारत के हालात, उसके भविष्य की रूपरेखा, धार्मिक सौहार्द, स्त्रियों की स्थिति, वक्त की ताकत, प्रेम की अवधारणा जैसे कई जटिल विषयों पर अपने विचार रखे । साहिर के अलावा शायद ही किसी गीतकार का कैनवास इतना विशाल रहा हो । मौजूदा पुस्तक में इन विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है और साहिर के विचारों को जानने, समझने की कोशिश की गई है |
साहिर ने 115-120 फिल्मों के लिए लगभग सवा से साढ़े सात सौ गीत लिखे । मुझे उनकी 114 फिल्मों के 712 गीतों की जानकारी मिली | इनमें से मुझे 696 गीत उपलब्ध भी हो पाये । प्रस्तुत पुस्तक इन्हीं 696 गीतों का सार है |
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