This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi, the greatest lyricist, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. For selecting a song of their choice, readers may type the name of song, movie, singer, composer etc in the SEARCH column on right side, or use the Labels on left side of page.
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July 30, 2017
July 22, 2011
गम क्यों हो जीने वालों को जीते जी (शहंशाह - 1953) Gam Kyon Ho Jeenewaalon Ki Jeete Ji (Shahenshah - 1953)
जीने वालो को जीते जी मरने का गम क्यों हो, गम क्यों हो
शोख लबो पर आहें क्यों को, आँखों में नम क्यों हो, गम क्यों हो
आज अगर गुलशन में कली खिलती है तो कल मुरझाती है
फिर भी खिल कर हंसती है और हंस कर चमन महकाती है
महकाती है, गम क्यों हो ।
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन हम खोये क्यों
जिन घड़ियों में हंस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों
रोये क्यों, गम क्यों हो ।
गाये जा मस्ती के तराने, ठंडी आंहे भरना क्या
मौत आये तो मर भी लेंगे मौत से पहले मरना क्या,
मरना क्या, गम क्यों हो ।
शोख लबो पर आहें क्यों को, आँखों में नम क्यों हो, गम क्यों हो
आज अगर गुलशन में कली खिलती है तो कल मुरझाती है
फिर भी खिल कर हंसती है और हंस कर चमन महकाती है
महकाती है, गम क्यों हो ।
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन हम खोये क्यों
जिन घड़ियों में हंस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों
रोये क्यों, गम क्यों हो ।
गाये जा मस्ती के तराने, ठंडी आंहे भरना क्या
मौत आये तो मर भी लेंगे मौत से पहले मरना क्या,
मरना क्या, गम क्यों हो ।
[Music: S.D.Burman; Singer : Asha Bhonsle; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]
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जाम थाम ले (शहंशाह -1953) Jaam Tham Le (Shahenshah-1953)
जाम थाम ले, सोचते ही सोचते न बीते सारी रात
जाम थाम ले .
सज के आई है शीशे की परी
ढूंढ के लाई है दिलों की खुशी
जन्नत से कुदरत ने भेजा तेरे लिये ईनाम
दुनिया के हर दुख का दारु एक सुनहरी जाम
सुबह दूर है रात की कसम
दिल की मान ले मेरे सनम
मस्ती की इन घडियों में क्या सोच समझ का काम
ज़ुल्फ़ों के साये में नादां कर भी ले आराम
[Music: S.D.Burman; Singer : Shamshad Begum; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]
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नाजों के पले (शहंशाह -1953) Nazon ke paley (Shahenshah - 1953)
नाजों के पले काँटों पे चले ऐसा भी जहां में होता है
तकदीर के ज़ालिम हाथों से दिल खून के आंसूं रोता है .
नित जिन में चरांगा रहता था
ख़ाक उड़ती है उन ऐवानों में
मखमल पे न जो रखते थे कदम
फिरते हैं वो रेगिस्तानो में ।
चलने का सहारा कोई नहीं
रुकने का ठिकाना कोई नहीं
इस हाल में काम आने वाला
अपना बेगाना कोई नहीं ।
दुनिया में किसी को भी अपनी
क़िस्मत का लिखा मालूम नहीं
सामान हैं लाखों बरसों के
और कल का पता मालूम नहीं ।
[Music: S.D.Burman; Singer : Talat Mahmood; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]
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