This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi, the greatest lyricist, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. For selecting a song of their choice, readers may type the name of song, movie, singer, composer etc in the SEARCH column on right side, or use the Labels on left side of page.
Showing posts with label 1953. Show all posts
Showing posts with label 1953. Show all posts
July 30, 2017
May 21, 2015
क्रोध कपट के अंधियारे में (अरमान -1953) Krodh kapat ke andhiyare men (Armaan -1953)
क्रोध कपट
के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
आते जाते सांस की धुन पे हरी नाम गुण गाये जा
दर-दर अलख जगाने वाले
भीतर खोज लगाये जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
इस दुनिया में दान दिये जा
उस दुनिया में पाये जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
ये जग है दो दिन का ठिकाना
जोगी रे तोहे दूर है जाना
तोड़ के मायाजाल के बंधन
लौ ईश्वर से लगाये जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
[Composer : S D Burman, Singer :
Manna Dey, Producer : F.Tech of India, Director : Fali Mistry]
आते जाते सांस की धुन पे हरी नाम गुण गाये जा
क्या ढूंढे
बस्ती और बन में
प्रभु तेरा है तेरे मन में दर-दर अलख जगाने वाले
भीतर खोज लगाये जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
ये जीवन करमों
की खेती
जो बीजो तो
ही फल देती इस दुनिया में दान दिये जा
उस दुनिया में पाये जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
ये जग है दो दिन का ठिकाना
जोगी रे तोहे दूर है जाना
तोड़ के मायाजाल के बंधन
लौ ईश्वर से लगाये जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
Labels:
1953,
Armaan,
F.Tech of India,
Fali Mistry,
Manna Dey,
S.D.Burman
April 23, 2014
किसी ने नज़र से नज़र जब मिला दी (हमसफ़र - 1953) Kisi ne nazar se nazar jab mila di (Hamsafar -1953)
किसी ने नज़र से नज़र जब मिला दी
मेरी जिंदगी हाँ, यूँ मुस्कुरा दी ।
जुबां से तो कम कुछ न बोले थे लेकिन
निगाहों ने दिल की कहानी सुना दी ।
हर एक सांस मस्ती में डूबी हुई है
खुद जाने सकी ने क्या शै पिला दी ।
मेरी सादा दुनिया पे रंग आ गया है
किसी ने ख्यालों की महफ़िल सज़ा दी ।
[Composer : Ustad Ali Akbar Khan, Singer : Talat Mahmood, Asha Bhonsle, Producer : Navketan Films]]
मेरी जिंदगी हाँ, यूँ मुस्कुरा दी ।
जुबां से तो कम कुछ न बोले थे लेकिन
निगाहों ने दिल की कहानी सुना दी ।
हर एक सांस मस्ती में डूबी हुई है
खुद जाने सकी ने क्या शै पिला दी ।
मेरी सादा दुनिया पे रंग आ गया है
किसी ने ख्यालों की महफ़िल सज़ा दी ।
[Composer : Ustad Ali Akbar Khan, Singer : Talat Mahmood, Asha Bhonsle, Producer : Navketan Films]]
Labels:
1953,
Asha Bhonsle,
Hamsafar,
Navketan Films,
Talat Mahmood,
Ustad Ali Akbar Khan
December 31, 2013
बोल न बोल ऐ जानेवाले (अरमान -1953) Bol na bol ai janewale (Armaan -1953)
बोल न बोल
ऐ जानेवाले, सुन तो ले दीवानों की
अब नहीं देखी
जाती हमसे ये हालत अरमानों की |
हुस्न के
खिलते फूल हमेशा बेदर्दों के हाथ बिके
और चाहत के
मतवालों को धूल मिली वीरानों की |
दिल के नाज़ुक
जज़्बों पर भी राज है सोने चाँदी का
ये दुनिया
क्या क़ीमत देगी सादादिल इन्सानों
की |
Labels:
1953,
Armaan,
Asha Bhonsle,
F.Tech of India,
Fali Mistry,
S.D.Burman,
Talat Mahmood
ख़ामोश क्यों हो तारो, उम्मीद के सहारो (अलिफ़ लैला-1953) Khamosh kyon ho taron, Ummed ke saharon le (Alif Laila-1953)
ख़ामोश क्यों
हो तारो, उम्मीद के सहारो
तुम ही उन्हें
बुलाओ, तुम ही उन्हें पुकारो |
वीरान दिल की धड़कन आवाज़ दे रही है
तुम सामने तो आओ, पर्दानशीं बहारो |
सचमुच मेरी
दुआयें, क्या तुमको खींच लाईं
मेरे क़रीब
आकर इक बार फिर पुकारो |
बेचैन आरज़ूएं कब से तरस रही हैं
तुम दूर दूर क्यूँ हो, उल्फ़त की
यादगारो |बहार आई, खिली कलियाँ (अलिफ़ लैला-1953) Bahar aayi, khili kaliyan (Alif Laila-1953)
बहार आई, खिली कलियाँ, हँसे तारे, चले आओ
हमें जीने नहीं देते ये नज़ारे, चले आओ |
ज़ुबाँ पर आह बन-बन के तुम्हारा नाम आता है
मुहब्बत में तुम्हीं जीते हमीं हारे चले आओ |
कहीं ऐसा न हो दिल की लगी दिल ही को ले डूबे
बुझाए से नहीं बुझते ये अंगारे चले आओ |
किस को खबर थी किस को यक़ीं था, (देवदास -1955) Kis ko khabar thi kisko yakin tha (Devdas-1953)
किस को खबर थी किस को यक़ीं था, ऐसे भी दिन आयेंगे
जीना भी मुश्किल होगा और मरने भी न पायेंगे |
जीना भी मुश्किल होगा और मरने भी न पायेंगे |
हम जैसे बर्बाद दिलों का, जीना क्या और मरना क्या
आज तेरी महफ़िल से उठे, कल दुनिया से उठ जायेंगे ।
आज तेरी महफ़िल से उठे, कल दुनिया से उठ जायेंगे ।
ये बेबसी, ये मेरा हाल-ए-ज़ार देख तो ले (अलिफ़ लैला-1953) Ye bebasi, ye mera hal-e-zaar dekh to le (Alif Laila-1953)
ये बेबसी, ये मेरा हाल-ए-ज़ार देख तो ले
खड़ा हूँ देर से उम्मीदवार देख तो ले ।
ख़िज़ा ने लूट लिया दिल की आरज़ू का चमन
कहां है ऐ मेरी खोई बहार देख तो ले |
कहां है ऐ मेरी खोई बहार देख तो ले |
बसी रहे तेरे महलों की चारदीवारी
न आ सके तो न आ एक बार देख तो ले |
न आ सके तो न आ एक बार देख तो ले |
सहर क़रीब है और शमा बुझनेवाली है
तड़प है तेरा बेक़रार, देख तो ले |
Labels:
1953,
Alif Laila,
Shyam Sunder,
Talat Mahmood
April 14, 2013
भरम तेरी वफ़ाओं का मिटा देते तो क्या होता (अरमान -1953) Bharam teri wafaon ka mita dete to kya hota (Armaan -1953)
भरम तेरी वफ़ाओं का मिटा देते तो क्या होता
तेरे चेहरे से हम पर्दा उठा देते तो क्या होता |
मुहब्बत भी तिजारत हो गयी है इस ज़माने में
अगर ये राज़ दुनिया को बता देते तो क्या होता |
[Composer : S.D.Burman, Singer : Talat Mahmood, Producer : F.Tech of India, Director : Fali Mistry]
तेरे चेहरे से हम पर्दा उठा देते तो क्या होता |
मुहब्बत भी तिजारत हो गयी है इस ज़माने में
अगर ये राज़ दुनिया को बता देते तो क्या होता |
तेरी उम्मीद पर जीने से हासिल कुछ नहीं लेकिन
अगर यूँ ही न दिल को आसरा देते तो क्या होता |[Composer : S.D.Burman, Singer : Talat Mahmood, Producer : F.Tech of India, Director : Fali Mistry]
Labels:
1953,
Armaan,
F.Tech of India,
Fali Mistry,
S.D.Burman,
Talat Mahmood
July 22, 2011
गम क्यों हो जीने वालों को जीते जी (शहंशाह - 1953) Gam Kyon Ho Jeenewaalon Ki Jeete Ji (Shahenshah - 1953)
जीने वालो को जीते जी मरने का गम क्यों हो, गम क्यों हो
शोख लबो पर आहें क्यों को, आँखों में नम क्यों हो, गम क्यों हो
आज अगर गुलशन में कली खिलती है तो कल मुरझाती है
फिर भी खिल कर हंसती है और हंस कर चमन महकाती है
महकाती है, गम क्यों हो ।
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन हम खोये क्यों
जिन घड़ियों में हंस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों
रोये क्यों, गम क्यों हो ।
गाये जा मस्ती के तराने, ठंडी आंहे भरना क्या
मौत आये तो मर भी लेंगे मौत से पहले मरना क्या,
मरना क्या, गम क्यों हो ।
शोख लबो पर आहें क्यों को, आँखों में नम क्यों हो, गम क्यों हो
आज अगर गुलशन में कली खिलती है तो कल मुरझाती है
फिर भी खिल कर हंसती है और हंस कर चमन महकाती है
महकाती है, गम क्यों हो ।
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन हम खोये क्यों
जिन घड़ियों में हंस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों
रोये क्यों, गम क्यों हो ।
गाये जा मस्ती के तराने, ठंडी आंहे भरना क्या
मौत आये तो मर भी लेंगे मौत से पहले मरना क्या,
मरना क्या, गम क्यों हो ।
[Music: S.D.Burman; Singer : Asha Bhonsle; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]
Labels:
1953,
Amiya Chakravarty,
Asha Bhonsle,
G.P.Production,
S.D.Burman,
Shahenshah
जाम थाम ले (शहंशाह -1953) Jaam Tham Le (Shahenshah-1953)
जाम थाम ले, सोचते ही सोचते न बीते सारी रात
जाम थाम ले .
सज के आई है शीशे की परी
ढूंढ के लाई है दिलों की खुशी
जन्नत से कुदरत ने भेजा तेरे लिये ईनाम
दुनिया के हर दुख का दारु एक सुनहरी जाम
सुबह दूर है रात की कसम
दिल की मान ले मेरे सनम
मस्ती की इन घडियों में क्या सोच समझ का काम
ज़ुल्फ़ों के साये में नादां कर भी ले आराम
[Music: S.D.Burman; Singer : Shamshad Begum; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]
Labels:
1953,
Amiya Chakravarty,
G.P.Production,
S.D.Burman,
Shahenshah,
Shamshad Begum
नाजों के पले (शहंशाह -1953) Nazon ke paley (Shahenshah - 1953)
नाजों के पले काँटों पे चले ऐसा भी जहां में होता है
तकदीर के ज़ालिम हाथों से दिल खून के आंसूं रोता है .
नित जिन में चरांगा रहता था
ख़ाक उड़ती है उन ऐवानों में
मखमल पे न जो रखते थे कदम
फिरते हैं वो रेगिस्तानो में ।
चलने का सहारा कोई नहीं
रुकने का ठिकाना कोई नहीं
इस हाल में काम आने वाला
अपना बेगाना कोई नहीं ।
दुनिया में किसी को भी अपनी
क़िस्मत का लिखा मालूम नहीं
सामान हैं लाखों बरसों के
और कल का पता मालूम नहीं ।
[Music: S.D.Burman; Singer : Talat Mahmood; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]
Labels:
1953,
Amiya Chakravarty,
G.P.Production,
S.D.Burman,
Shahenshah,
Talat Mahmood
जब दुनिया बदली है फिर क्यों न बदलें हम- (अरमान-1953) Jab duniya badli hai fir kyon na badlen hum - (Armaan-1953)
जब दुनिया बदली है, फिर क्यों का बदले हम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |
इन नाज़ुक घडियो की, उम्रे होती है कम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |
ये दूरी कैसी है, मैं फूल हूँ तू शबनम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |
जो बीती बीत गयी, अब उसको याद न कर
रंगीन बहारो को, यूँ ही बर्बाद न कर इन नाज़ुक घडियो की, उम्रे होती है कम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |
चाहत के गुलशन से, खुशियों की कलियाँ चुन
कुछ अपने दिल की कह, कुछ मेरे दिल की सुन ये दूरी कैसी है, मैं फूल हूँ तू शबनम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |
[Music : S.D.Burman; Singer : Asha Bhonsle; Producer : F.Tech of India; Director : Fali Mistry]
Labels:
1953,
Armaan,
Asha Bhonsle,
F.Tech of India,
Fali Mistry,
S.D.Burman
May 27, 2011
रात के राही थक मत जाना (बाबला -1953) Raat ke rahi thak man jana (Babla -1953)
रात के रही थक मत जाना
सुबह की मंजिल दूर नहीं
रात के राही ...
धरती के फैले आँगन में, पल दो पल है रात का डेरा
जुल्म का सीना चीर के देखो, झांक रहा है नया सवेरा
ढलता दिन मजबूर सही,
चढ़ाता सूरज मजबूर नहीं, मजबूर नहीं
थक मत जाना, ओ राही थक मत जाना .
सदियों तक चुप रहने वाले, अब अपना हक़ लेके रहेंगे
जो करना है खुल के करेंगे, जो कहना है साफ़ कहेंगे
जीते जी घुट घुट कर मरना
इस जग का दस्तूर नहीं, दस्तूर नहीं
थक मत जाना, ओ राही थक मत जाना
टूटेंगी बोझल जंजीरे, जागेंगी सोयी तकदीरें
लूट पे कब तक पहरा देंगी, जंग लगी खूनी शमशीरें
रह नहीं सकता इस दुनिया में,
जो सब को मंजूर नहीं, मंजूर नहीं
थक मत जाना, ओ राही थक मत जाना .
[Music : S.D.Burman; Singer : Lata]
Subscribe to:
Posts (Atom)