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April 17, 2015

दो बूँदे सावन की (फिर सुबह होगी-1958) Do boonde sawan kii (Phir Subah Hogi -1958)

दो बूँदे सावन की
इक सागर की सीप में टपके और मोती बन जाये
दूजी गंदे जल में गिरकर अपना आप गंवाये
किसको मुजरिम समझे कोई, किसको दोष लगाये

दो कलियां गुलशन की
इक सेहरे के बीच गुँधे और मन ही मन इतराये
एक अर्थी के भेंट चढ़े और धूलि मे मिल जाये
किसको मुजरिम समझे कोई, किसको दोष लगाये

दो सखियाँ बचपन की
इक सिंहासन पर बैठे और रूपमती कहलाये
दूजी अपने रूप के कारण गलियों मे बिक जाये
किसको मुजरिम समझे कोई किसको दोष लगाये

[Composer : Khayyam, Singer : Asha Bhonsle, Director : Ramesh Saigal, Producer : Parijat Pictures;  Actor : Raj Kapoor, Mala Sinha]

January 05, 2014

चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना (दिल ही तो है -1963) Chura le na tumko ye mausam suhana (Dil hi to hai -1963)

चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना
खुली वादियों में अकेली न जाना |
         लुभाता है मुझको ये मौसम सुहाना
         मैं जाऊँगी तुम मेरे पीछे न आना |
लिपट जाएगा कोई बेबाक झोंका
जवानी की रौ में ना आँचल उड़ाना
          मेरे वास्ते तुम परेशां न होना
          मुझे ख़ूब आता है दामन बचाना  |

घटा भी कभी चूम लेती है चेहरा
समझ सोच कर रुख़ से ज़ुल्फ़ें हटाना
         घटा मेरे नज़दीक आकर तो देखे
         इन आँखों ने सीखा है बिजली गिराना । 

तुम एक फूल हो तुमको ढूंढूंगा कैसे
कहीं मिल के फूलों में गुम हो न जाना
         जो फूलों में रंगत मिले भी तो क्या है
         जुदा मेरी ख़ुश्बू, जुदा मुस्कुराना |


[Composer : Roshan, Singer : Mukesh, Suman Kalyanpur, Producer : B.L.Rawal, Director : C.L.Rawal, P.L.Santoshi, Actor : Raj Kapoor, Nutan]

December 31, 2013

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाहों का गिला (फिर सुबह होगी - 1958) Phir na kije meri gustakh nigahi ka gila (Phir Subah Hogi-1958)

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाहों का गिला
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको |
        
मैं कहाँ तक ना निगाहों को पलटने देती
        आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको |

इस कदर प्यार से देखो ना हमारी ज़ानिब
दिल अगर और मचल जाये तो मुश्किल होगी
        तुम जहाँ मेरी तरफ़ देख के रुक जाओगे
        वही मंजिल मेरी तक़दीर की मंजिल होगी |

एक यूँ ही सी नजर दिल को जो छू लेती है
कितने अरमान जगाती है तुम्हे क्या मालूम
        रूह बेचैन है कदमों से लिपटने के लिये
        तुमको हर साँस बुलाती है तुम्हे क्या मालूम |

हर नज़र आपकी जज्बात को उकसाती है
मैं अगर हाथ पकड़ लूं तो खफ़ा मत होना
        मेरी दुनिया--मोहब्बत है तुम्हारे दम से
        मेरी दुनिया--मोहब्बत से जुदा मत होना |
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको । 

[Composer : Khayyam;  Singer : Mukesh, Asha Bhonsle,  Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal;  Artist : Raj Kapoor, Mala Sinha ]
 

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना (दिल ही तो है -1963) Yun hi di ne chaha tha rona rulana (Dil hi to hai -1963)

यूँ ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई इक बहाना 

हमें भी नहीं इल्म, हम जिस पे रोए
वो बीती रुतें हैं के आता ज़माना|

ग़म--दिल है और ग़म--ज़िंदगी भी
इसका ठिकाना, उसका ठिकाना 

कोई किस पे तड़पे, कोई किसपे रोए
इधर दिल जला है, उधर आशियाना 


[Composer : Roshan, Singer : Suman Kalyanpur, Producer : B.L.Rawal, Director : C.L.Rawal, P.L.Santoshi, Actor : Raj Kapoor, Nutan]

तुम्हारी मस्त नज़र, गर इधर नहीं होती (दिल ही तो है -1963) Tumhari mast nazar, gar idhar nahin hoti (Dil hi to hai -1963)

तुम्हारी मस्त नज़र, गर इधर नहीं होती
नशे में चूर फ़िज़ा इस क़दर नहीं होती |

           तुम्हीं को देखने की दिल में आरज़ूएं हैं
           तुम्हारे आगे ही ऊँची नज़र नहीं होती |

ख़फ़ा होना अगर बढ़ के थाम लूँ दामन
ये दिल फ़रेब ख़ता जान कर नहीं होती |

           तुम्हारे आने तलक हमको होश रहता है
           फिर सके बाद हमें कुछ खबर नहीं होती |

[Composer : Roshan, Singer : Mukesh, Suman Kalyanpur, Producer : B.L.Rawal, Director : C.L.Rawal, P.L.Santoshi, Actor : Raj Kapoor, Nutan]

July 10, 2013

वो सुबह कभी तो आयेगी (फिर सुबह होगी - 1958) Wo subah kabhi to aayegi (Phir Subah Hogi-1958)

इन काली सदियों के सर से, जब रात का आंचल ढलकेगा
जब दुख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का सागर छलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा, जब धरती नज़्में गायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जिस सुबह की खातिर जुग-जुग से, हम सब मर-मर कर जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में, हम जहर के प्याले पीते हैं
इन भूखी प्यासी रूहों पर, इक दिन तो करम फर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

माना कि अभी तेरे मेरे, अरमानो की कीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर, इन्सानों की कीमत कुछ भी नहीं
इन्सानों की इज्जत जब झूठे, सिक्कों में तोली जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

दौलत के लिये जब औरत की, इस्मत को बेचा जायेगा
चाहत को कुचला जायेगा, ग़ैरत को बेचा जायेगा
अपनी काली करतूतों पर, जब ये दुनिया शर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर, ये भूख के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर, दौलत की इजारादारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

मजबूर बुढ़ापा जब सूनी, राहों की धूल फांकेगा
मासूम लड़कपन जब गंदी, गलियों भीख मांगेगा
ह़क मांगने वालों को जिस दिन, सूली दिखाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

फ़ाको की चिताओं पर जिस दिन, इन्सां जलाये जायेंगे
सीनों के दहकते दोज़ख में, अर्मां जलाये जायेंगे
ये नरक से भी गन्दी दुनिया, जब स्वर्ग बनाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

मनहूस समाजों ढांचों में जब जुर्म पाले जायेंगे
जब हाथ काटे जायेंगे जब सर उछाले जायेंगे
जेलों के बिना जब दुनिया की सरकार चलाई जायेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

संसार के सारे मेहनतकश, खेतो से, मिलों से निकलेंगे
बेघर, बेदर, बेबस इन्सां, तारीक बिलों से निकलेंगे
दुनिया अम्न और खुशहाली के, फूलों से सजाई जायेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

जब धरती करवट बदलेगी जब क़ैद से क़ैदी छूटेंगे
जब पाप घरौंदे फूटेंगे जब ज़ुल्म के बन्धन टूटेंगे
उस सुबह को हम ही लायेंगे वो सुबह हमीं से आयेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी


[Composer : Khayyam;  Singer : Mukesh, Asha Bhonsle;   Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal; Artist : Raj Kapoor, Mala Sinha]




June 21, 2012

साथी रे, भाई रे (चार दिल चार राहें -1959) sathi re, bhai re (Char dil char rahen- 1959 )

साथी रे, भाई रे
क़दम क़दम से दिल से दिल मिला रहे हैं हम
वतन में एक नया चमन खिला रहे हैं हम |

साथी रे, भाई रे
हम आज नींव रख रहे हैं उस निजाम की
बिके न ज़िन्दगी जहाँ किसी ग़ुलाम की
लुटे न मेहनते पिसे हुए आवाम की
भर सके तिजोरियाँ कोई हराम की
साथी रे भाई रे
हर एक ऊँच-नीच को मिटा रहे हैं हम
क़दम क़दम से.. ...


साथी रे भाई रे
हमारे बाजुओं में आँधियों का ज़ोर है
हमारी धड़कनों में बादलों का शोर है
हमारे हाथ में वतन की बागडोर है
बच के जा सकेंगे जिनके दिल में चोर है
साथी रे भाई रे
सुनो कि अपना फ़ैसला सुना रहे हैं हम
क़दम क़दम से ..

साथी रे भाई रे
उठा लिया है अब समाजवाद का निशान
अलग थलग न होंगे हमारी खेतियाँ
चलेंगीं सबके वास्ते मिलों की चरखियां
जमीन से आसमान तलक उठेगीं चिमनियाँ
साथीरे भाई रे
कहा था जो वो कर के अब दिखा रहें हैं हम
क़दम क़दम से ..

साथी रे भाई रे
उठे वो नौजवान जिनको प्यार चाहिए
बढे वो दुल्हने जिन्हे श्रृंगार चाहिए
चले वो गुलसितां जिन्हे निखार चाहिए
सुने वो बस्तियां जिन्हें बहार चाहिए
साथी रे भाई रे
कि जिंदगी को उसका हक़ दिला रहें हैं हम
क़दम क़दम से ...

साथी रे भाई रे
ये रास्ता सुनहरी मंजिलों को जायेगा
ये रास्ता ख़ुशी की बस्तियां बसाएगा
बिछुड़ गए थे जो उन्हे करीब लाएगा
ये रास्ता वो हैं जो दिल से दिल मिलाएगा
साथी रे भाई रे
कि अब तमाम फासले मिटा रहे हैं हम |
क़दम क़दम से ...

साथी रे भाई रे
विदेशी लूट की जगह हो देसी लूट क्यों
सफ़ेद झूठ की जगह सियाह झूठ क्यों
वतन सभी का है तो फिर वतन में फूट क्यों
समाज के दुश्मनों को मिल रही है छूट क्यों
साथी रे भाई रे
खुली सभा में ये सवाल उठा रहे हैं हम
क़दम क़दम से दिल से दिल मिला रहे हैं हम
वतन में एक नया चमन खिला रहे हैं हम



[Singer : Manna Dey, Meena Kapoor, Lata Mangeshkar, Mukesh & Mahender Kapoor, Composer : Anil Biswas,   Producer/Director : Khwaja Ahmad Abbas,   Actor : Raj Kapoor, Meena Kumari, Shammi Kapoor, Kumkum, Nimmi]