This is a humble collection of songs of Sahir Ludhianvi, the greatest lyricist, Bollywood has ever seen. Sahir used his songs for spreading message of love for humankind through philosophical notes or social commentary. He also used some of his ghazals & nazms in his movies also by simplifying them. For selecting a song of their choice, readers may type the name of song, movie, singer, composer etc in the SEARCH column on right side, or use the Labels on left side of page.
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July 30, 2017
May 21, 2014
कहीं क़रार न हो और कहीं ख़ुशी न मिले (चांदी की दीवार -1964) Kahin karar na ho aur kahin khushi na mile (Chandi ki Deewar- 1964)
कहीं क़रार न हो और कहीं ख़ुशी
न मिले
हमारे बाद किसी को ये ज़िन्दगी न मिले |
सियाह-नसीब कोई उनसे बढ़ के क्या होगा
जो अपना घर भी जला दें तो रोशनी न मिले |
यही सुलूक है गर आदमी से दुनिया का
तो कुछ अजब नहीं दुनिया में आदमी न मिले |
ये बेबसी भी किसी बद्दुआ से कम तो नहीं
के खुल के जी ना सके और मौत भी न मिले |
हमारे बाद किसी को ये ज़िन्दगी न मिले |
सियाह-नसीब कोई उनसे बढ़ के क्या होगा
जो अपना घर भी जला दें तो रोशनी न मिले |
यही सुलूक है गर आदमी से दुनिया का
तो कुछ अजब नहीं दुनिया में आदमी न मिले |
ये बेबसी भी किसी बद्दुआ से कम तो नहीं
के खुल के जी ना सके और मौत भी न मिले |
[Composer : N.Dutta, Singer: Md.Rafi, Producer : B.R.Chopra, Director:
Dilip Bose ]
Labels:
1964,
B.R.Chopra,
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Dilip Bose,
Md. Rafi,
N.Dutta
December 27, 2012
क से कुल दुनिया हमारी (चाँदी की दीवार -1964) Ka se kul duniya hamari (Chandi Ki Deewar 1964)
क से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
ख से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
ग से गंगा सबसे पहले आके उतरी थी जहाँ
घ से घर की आबरू रक्षक हैं जिसके नौजवान,
च से रजा चन्द्रगुप्त और छ से उसका छत्र है
देश के इतिहास का वो युग सुनहरा पत्र है ।
ज से जलालुद्दीन अकबर जिसने सोहिल ए कुल किये
हिन्दू मुस्लिम नस्ल और मजहब मिलाने के लिए,
झ से है झाँसी की रानी, ट से टीपू सूरमा
जिसके जीते जी न सिक्का चल सका अंग्रेज़ का,
ठ से वो ठाकुर जिसे टैगोर कहता है जहां
विश्व भर में उसकी रचनाओं से है भारत का मान ।
ड से डल कश्मीर की, जो हर नज़र का नूर है
ढ से ढाका जिसकी मलमल आज तक मैशहूर है ।
त से ताज आगरे का इक अछूता शाहकार
शाहजहाँ की लाडली मुमताज़ बेगम का मजार ।
द से दिल्ली दिल वतन का, ध से धड़कन प्यार की
न से नेहरु जिस पे हैं नज़र लगी संसार की,
प से उसका पंचशील और फ से उसका सुर्ख फूल
ब से बापू जिसको प्यारे थे अहिंसा के उसूल
भ भगत सिंह जिसने ललकारा विदेशी राज को
चढ़ के फँसी पर बचाया अपनी माँ की लाज को ।
म से हो मजदूर जिसका दौर अब आने को है
य से युग सरमायादारी का जो मिट जाने को है
र से रास्ता प्यार का, ल से लगन इन्साफ की
व से ऐसा वायुमंडल जिससे बरसे शांति
श से शाहों का जमाना, स से समझो जा चुका
ह से हम सब एक हों वक्त ये फरमा चुका ।
क से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
ख से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
[Note : I got the complete lyrics from audio files avaialble on internet. Once I got the complete song on Youtube, I will post it also. Meanwhile, readers may enjoy the lyrics. Personally I find last two para interesting. The 2nd last para shows the respect Sahir has for Nehru and his views. From the last para,the impact of marxist ideology on Sahir is clearly visible.
Sahir shared this viewpoint in another song from 1963 movie 'Aaj aur Kal' . The song is "Takht na hoga, taj na hog/ kal tha lekin, aaj na hoga. This song is also posted on my blog.]
ख से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
ग से गंगा सबसे पहले आके उतरी थी जहाँ
घ से घर की आबरू रक्षक हैं जिसके नौजवान,
च से रजा चन्द्रगुप्त और छ से उसका छत्र है
देश के इतिहास का वो युग सुनहरा पत्र है ।
ज से जलालुद्दीन अकबर जिसने सोहिल ए कुल किये
हिन्दू मुस्लिम नस्ल और मजहब मिलाने के लिए,
झ से है झाँसी की रानी, ट से टीपू सूरमा
जिसके जीते जी न सिक्का चल सका अंग्रेज़ का,
ठ से वो ठाकुर जिसे टैगोर कहता है जहां
विश्व भर में उसकी रचनाओं से है भारत का मान ।
ड से डल कश्मीर की, जो हर नज़र का नूर है
ढ से ढाका जिसकी मलमल आज तक मैशहूर है ।
त से ताज आगरे का इक अछूता शाहकार
शाहजहाँ की लाडली मुमताज़ बेगम का मजार ।
द से दिल्ली दिल वतन का, ध से धड़कन प्यार की
न से नेहरु जिस पे हैं नज़र लगी संसार की,
प से उसका पंचशील और फ से उसका सुर्ख फूल
ब से बापू जिसको प्यारे थे अहिंसा के उसूल
भ भगत सिंह जिसने ललकारा विदेशी राज को
चढ़ के फँसी पर बचाया अपनी माँ की लाज को ।
म से हो मजदूर जिसका दौर अब आने को है
य से युग सरमायादारी का जो मिट जाने को है
र से रास्ता प्यार का, ल से लगन इन्साफ की
व से ऐसा वायुमंडल जिससे बरसे शांति
श से शाहों का जमाना, स से समझो जा चुका
ह से हम सब एक हों वक्त ये फरमा चुका ।
क से कुल दुनिया हमारी जिसमे भारत देश है
ख से खेती जिसमे जीवनदान का सन्देश है ।
(तीसरे पैरे की पहली लाइन में अकबर के 'सुलह ए कुल' का जिक्र है ।)
[Note : I got the complete lyrics from audio files avaialble on internet. Once I got the complete song on Youtube, I will post it also. Meanwhile, readers may enjoy the lyrics. Personally I find last two para interesting. The 2nd last para shows the respect Sahir has for Nehru and his views. From the last para,the impact of marxist ideology on Sahir is clearly visible.
Sahir shared this viewpoint in another song from 1963 movie 'Aaj aur Kal' . The song is "Takht na hoga, taj na hog/ kal tha lekin, aaj na hoga. This song is also posted on my blog.]
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1964,
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Dilip Bose,
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NOTE ON SAHIR
April 27, 2011
अश्कों ने जो पाया है (चांदी की दीवार-1964) Ashkon ne jo paya hai (Chandi ki Deewar- 1964)
अश्कों ने जो पाया है वो गीतों में दिया है
इस पर भी सुना है के जमाने को गिला है ।
जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है
जो साज़ पे गुज़री है वो किस दिल को पता है ।
हम फूल हैं औरों के लिए लाये हैं खुशबू
अपने लिए ले दे के इक दाग मिला है ।
[Composer : N.Dutta, Singer: Talat Mahmood, Producer : B.R.Chopra, Director: Dilip Bose ]
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