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April 17, 2015

दो बूँदे सावन की (फिर सुबह होगी-1958) Do boonde sawan kii (Phir Subah Hogi -1958)

दो बूँदे सावन की
इक सागर की सीप में टपके और मोती बन जाये
दूजी गंदे जल में गिरकर अपना आप गंवाये
किसको मुजरिम समझे कोई, किसको दोष लगाये

दो कलियां गुलशन की
इक सेहरे के बीच गुँधे और मन ही मन इतराये
एक अर्थी के भेंट चढ़े और धूलि मे मिल जाये
किसको मुजरिम समझे कोई, किसको दोष लगाये

दो सखियाँ बचपन की
इक सिंहासन पर बैठे और रूपमती कहलाये
दूजी अपने रूप के कारण गलियों मे बिक जाये
किसको मुजरिम समझे कोई किसको दोष लगाये

[Composer : Khayyam, Singer : Asha Bhonsle, Director : Ramesh Saigal, Producer : Parijat Pictures;  Actor : Raj Kapoor, Mala Sinha]

December 31, 2013

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाहों का गिला (फिर सुबह होगी - 1958) Phir na kije meri gustakh nigahi ka gila (Phir Subah Hogi-1958)

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाहों का गिला
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको |
        
मैं कहाँ तक ना निगाहों को पलटने देती
        आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको |

इस कदर प्यार से देखो ना हमारी ज़ानिब
दिल अगर और मचल जाये तो मुश्किल होगी
        तुम जहाँ मेरी तरफ़ देख के रुक जाओगे
        वही मंजिल मेरी तक़दीर की मंजिल होगी |

एक यूँ ही सी नजर दिल को जो छू लेती है
कितने अरमान जगाती है तुम्हे क्या मालूम
        रूह बेचैन है कदमों से लिपटने के लिये
        तुमको हर साँस बुलाती है तुम्हे क्या मालूम |

हर नज़र आपकी जज्बात को उकसाती है
मैं अगर हाथ पकड़ लूं तो खफ़ा मत होना
        मेरी दुनिया--मोहब्बत है तुम्हारे दम से
        मेरी दुनिया--मोहब्बत से जुदा मत होना |
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको । 

[Composer : Khayyam;  Singer : Mukesh, Asha Bhonsle,  Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal;  Artist : Raj Kapoor, Mala Sinha ]
 

July 10, 2013

वो सुबह कभी तो आयेगी (फिर सुबह होगी - 1958) Wo subah kabhi to aayegi (Phir Subah Hogi-1958)

इन काली सदियों के सर से, जब रात का आंचल ढलकेगा
जब दुख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का सागर छलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा, जब धरती नज़्में गायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

जिस सुबह की खातिर जुग-जुग से, हम सब मर-मर कर जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन में, हम जहर के प्याले पीते हैं
इन भूखी प्यासी रूहों पर, इक दिन तो करम फर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

माना कि अभी तेरे मेरे, अरमानो की कीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर, इन्सानों की कीमत कुछ भी नहीं
इन्सानों की इज्जत जब झूठे, सिक्कों में तोली जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

दौलत के लिये जब औरत की, इस्मत को बेचा जायेगा
चाहत को कुचला जायेगा, ग़ैरत को बेचा जायेगा
अपनी काली करतूतों पर, जब ये दुनिया शर्मायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर, ये भूख के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर, दौलत की इजारादारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

मजबूर बुढ़ापा जब सूनी, राहों की धूल फांकेगा
मासूम लड़कपन जब गंदी, गलियों भीख मांगेगा
ह़क मांगने वालों को जिस दिन, सूली दिखाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

फ़ाको की चिताओं पर जिस दिन, इन्सां जलाये जायेंगे
सीनों के दहकते दोज़ख में, अर्मां जलाये जायेंगे
ये नरक से भी गन्दी दुनिया, जब स्वर्ग बनाई जायेगी
वो सुबह कभी तो आयेगी

मनहूस समाजों ढांचों में जब जुर्म पाले जायेंगे
जब हाथ काटे जायेंगे जब सर उछाले जायेंगे
जेलों के बिना जब दुनिया की सरकार चलाई जायेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

संसार के सारे मेहनतकश, खेतो से, मिलों से निकलेंगे
बेघर, बेदर, बेबस इन्सां, तारीक बिलों से निकलेंगे
दुनिया अम्न और खुशहाली के, फूलों से सजाई जायेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी

जब धरती करवट बदलेगी जब क़ैद से क़ैदी छूटेंगे
जब पाप घरौंदे फूटेंगे जब ज़ुल्म के बन्धन टूटेंगे
उस सुबह को हम ही लायेंगे वो सुबह हमीं से आयेगी
वो सुबह हमीं से आयेगी


[Composer : Khayyam;  Singer : Mukesh, Asha Bhonsle;   Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal; Artist : Raj Kapoor, Mala Sinha]




April 22, 2011

आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम (फिर सुबह होगी -1958) Aasmaan pe hai khuda aur zami pe hum (Phir subah hogi-1958)

आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
आज कल इस तरफ देखता है  कम ..
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम

आजकल किसी को वो टोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजिये रोकता नहीं
हो रही है लूटमार फट रहें हैं बम
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
आज कल इस तरफ देखता है  कम ..


किसको भेजे वो यहाँ खाक छानने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
आज कल इस तरफ देखता है  कम ..


जो भी है वो ठीक है फिर्क क्यों करे
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यों करें
जब उसे ही गम नहीं तो क्यों हमें हो  गम
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
आज कल इस तरफ देखता है  कम ..

[Singer : Mukesh;  Composer : Khayyam;   Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal; Artist : Raj Kapoor, Rahman ]



चीन ओ अरब हमारा (फिर सुबह होगी-1958) Chin o arab hamara (Phir Subah Hogi-1958)

चीन ओ अरब हमारा, हिन्दोस्तान हमारा
रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा .…

खोली भी छिन गयी है, बेंचें भी छिन गईं हैं
सड़कों पे घूमता है, अब कारवाँ हमारा
जेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गाली
वो संतरी हमारा, वो पासबां हमारा
चीन ओ अरब हमारा …

जितनी भी बिल्डिंगें थीं, सेठों ने बाँट ली हैं
फुटपाथ बंबई के हैं आशियाँ हमारा
होने को हम कलंदर, आते हैं बोरी बन्दर
हर एक कुली यहाँ है राजदा हमारा
चीन ओ अरब हमारा..

तालीम है अधूरी, मिलती नहीं मजूरी
मालूम क्या किसी को, दर्दे निहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा…

पतला है हाल अपना, लेकिन लहू है गाडा
फौलाद से बना है, हर नौजवान हमारा
मिल-जुल के इस वतन को, ऐसा सजायेंगे हम
हैरत से मुंह तकेगा, सारा जहां हमारा
चीन ओ अरब हमारा...

[Singer : Mukesh;  Composer : Khayyam;   Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal;  Artist : Raj Kapoor ]