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May 21, 2014

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा (काजल -1965) Ye zulf agar khul ke bikhar jaye to achchha (Kaajal -1965)

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा |

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा |

दुनिया की निगाहों में भला क्या है बुरा क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा |

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा |

[Composer : Ravi, Singer : Md. Rafi, Production : Kalpanalok; Direction :Ram Maheshwary, Actor : Raj Kumar, Helen]

 

April 14, 2013

निकले थे कहाँ जाने के लिये (बहू बेगम – 1967) Nikle the kahan jane ke liye (Bahu Begum – 1967)

निकले थे कहाँ जाने के लिये, पहुंचे है कहाँ मालूम नहीं
अब अपने भटकते क़दमों को, मंजिल का निशान मालूम नहीं |

हमने भी कभी इस गुलशन में, एक ख्वाब--बहारां देखा था
कब फूल झडे,  कब गर्द उड़ी, कब आई खिज़ां मालूम नहीं |

दिल शोला--ग़म से खाक हुआ, या आग लगी अरमानों में
क्या चीज़ जली क्यूं सीने से  उठता है धुआं मालूम नहीं |

बरबाद वफ़ा का अफ़साना हम किससे कहें और कैसे कहें
खामोश हैं लब और दुनिया को अश्कों की ज़ुबां मालूम नहीं |
[Composer: Roshan,  Singer : Asha Bhonsle, Actor : Meena Kumari, Helen,  Producer : Jan Nisar Akhtar,  Director : M.Sadiq ]