Showing posts with label Shaheed Latif. Show all posts
Showing posts with label Shaheed Latif. Show all posts

May 27, 2015

दिल का तराना गा ले (सोसाइटी -1955) Dil ka tarana ga le (Society -1955)

दिल का तराना गा ले, सोच न कर मतवाले
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?

सारे जहन्नुम, सारी बहिश्तें, झूठे बहाने हैं
पहलू की जन्नत, जिंदा हकीकत, बाकी फसाने हैं
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?

ये मस्त रातें, झूमे बारातें, जा के न आएंगी
इन महफ़िलों की, इन दिलबरों की यादें सताएंगी
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?

तड़पें अचल है, मरना अटल है, मरने से पहले जी
लहरा के गा के, दुनिया पे छा के, मस्ती के सागर पी
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?
 
[Composer ; S.D.Burman, Singer : Geeta Dutt, Director : Shahid Latif, Producer ; Ismat Chugtai] 


 

April 21, 2015

रात भर का है मेहमां अँधेरा (सोने की चिड़िया-1958) Raat bhar ka hai mehmaan andhera (Sone ki chidiya -1958)

मौत कभी भी मिल सकती है लेकिन जीवन कल मिलेगा
मरने वाले सोच समझ ले, फिर तुझे ये पल मिलेगा

रात भर का है मेहमां अँधेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

रात जितनी भी संगीन होगी
सुबह उतनी ही रंगीन होगी
ग़म कर गर है बादल घनेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

लब पे शिकवा ला, अश्क़ पी ले
जिस तरह भी हो कुछ देर जी ले
अब उखड़ने को है ग़म का डेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

यूँ ही दुनिया में आकर जाना
सिर्फ़ आँसू बहाकर जाना
मुस्कुराहट पे भी हक़ है तेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

कोई मिल के तदबीर सोचें
सुख के सपनों की ताबीर सोचें
जो तेरा है वही ग़म है मेरा
किसके रोके रुका है सवेरा
 

Note - 2nd last stanza was not used in movie. We take it from the collection of Sahir's song,  'Gata Jaye Banjara'

[Composer : O.P.Nayyar,  Singer : Md. Rafi,  Director : Shaheed Latif,  Producer : Ismat Chughtai, Actor : Nutan, Balraj Sahni]
 

October 11, 2013

प्यार पर बस तो नहीं है मेरा, लेकिन फिर भी (सोने की चिड़िया - 1958) Pyar par bas to nahi hai mera, lekin phir bhi (Sone ki chidiya -1958)

प्यार पर बस तो नहीं है मेरा, लेकिन फिर भी
तू बता दे के तुझे प्यार करूँ या ना करूँ |

मेरे ख़्वाबों के झरोखों को सजाने वाली
तेरे ख़्वाबों में कहीं मेरा गुज़र है के नहीं
पूछ कर अपनी निगाहों से बता दे मुझको
मेरी रातों के मुक़द्दर में सहर है के नहीं
प्यार पर बस तो नहीं है ...


कहीं ऐसा हो पाओं मेरे थर्रा जाएं
और तेरी मरमरी बाहों का सहारा मिले
अश्क बहते रहे खमोश सियाह रातों में
और तेरे रेशमी आंचल का किनारा मिले
प्यार पर बस तो नहीं है ...

[Composer : O.P.Nayyar,  Singer : Talat Mehmood, Asha Bhonsle,  Director : Shaheed Latif,  Producer : Ismat Chughtai, Actor : Nutan, Talat Mehmood]