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December 06, 2014

भूल सकता है भला कौन ये प्यारी आँखें (धर्मपुत्र -1961) Bhool sakta hai bhala kaun ye pyari aankhen – (Dharmputra- 1961)

भूल सकता है भला कौन ये प्यारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
मेरी हर सांस  ने हर सोच ने चाहा है तुम्हें
जब
से देखा है तुम्हें तब से सराहा है तुम्हें
बस
गई हैं मेरी आँखों में तुम्हारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
तुम जो नज़रों को उठाओ तो सितारे झुक जायें
तुम
जो पलकों को झुकाओ तो ज़माने रुक जायें
क्यूँ
बन जायें इन आँखों पुजारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
जागती रातों को सपनों का खज़ाना मिल जाये
तुम जो मिल जाओ तो जीने का बहाना मिल जाये
अपनी क़िस्मत पे करे नाज़ हमारी आँखें
रंग में डूबी हुई नींद से भारी आँखें |
 
[Composer : N.Dutta;  Singer : Mahender Kapoor;    Producer : B.R.Chopra;   Director : Yash Chopra;  Actor : Sashi Kapoor]
 
 

May 15, 2011

ये किसका लहू है कौन मरा - धर्मपुत्र (1961) Yeh Kiska Lahu Hai Kaun Mara - Dharmputra (1961)

धरती की सुलगती छाती के बैचेन शरारे पूछते हैं
तुम लोग जिन्हे अपना न सके, वो खून के धारे पूछते हैं
सड़कों की जुबान चिल्लाती है
सागर के किनारे पूछते हैं -
                      ये किसका लहू है कौन मरा 
                      ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
                     ये किसका लहू है कौन मरा.

ये  जलते हुए घर किसके हैं 
ये कटते हुए तन किसके है,
तकसीम  के अंधे तूफ़ान में
लुटते हुए गुलशन किसके हैं,
बदबख्त फिजायें किसकी हैं
बरबाद नशेमन किसके हैं,

कुछ हम भी सुने, हमको भी सुना.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

किस काम के हैं ये दीन धरम
जो शर्म के दामन चाक करें,
किस तरह के हैं ये देश भगत
जो बसते घरों  को खाक करें,
ये रूहें कैसी रूहें हैं
जो धरती को नापाक करें,

आँखे तो उठा, नज़रें तो मिला.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

जिस राम के नाम पे खून बहे
उस राम की इज्जत क्या होगी,
जिस दीन के हाथों लाज लूटे
उस दीन की कीमत क्या होगी,
इन्सान की इस जिल्लत से परे
शैतान की जिल्लत क्या होगी,

ये वेद हटा, कुरआन  उठा.

ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता
ये किसका लहू है कौन मरा.

 [Music: N.Dutta;  Singer : Mahender Kapoor;    Producer : B.R.Chopra;   Director : Yash Chopra;  Actor : Rajender Kumar, Sashi Kapoor]





May 14, 2011

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है (कभी-कभी-1976) Kabhi Kabhi mere dil mein khayal aata hai (Kabhi Kabhi-1976)

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है
कि जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए
तू अबसे पहले सितारों में बस रही थी कहीं
तुझे ज़मीं पे बुलाया गया है मेरे लिए |

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि ये बदन, ये निगाहें मेरी अमानत हैं
ये गेसुओं की घनी छाँव है मेरी खातिर
ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं |

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है
कि जैसे बजती है शहनाइयाँ सी राहों में
सुहागरात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं
सिमट रही है तू शरमा अपनी बाहों में |

कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है 
कि जैसे तू मुझे चाहेगी उम्र भर यूँ ही
उठेगी मेरी तरफ प्यार की नज़र यूँ ही
मैं जानता हूँ कि तू गैर है मगर यूँ ही
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है |

[आखिरी लाइन में  "यूँ ही" का अर्थ शुरू की दो लाइनों से अलग है.  पहले तो साहिर इसका इस्तेमाल  अपने ख़ूबसूरत हालात(ख़यालात) की निरंतरता के लिए करते हैं, परन्तु फिर उनकी हकीकत उन पर तारी हो जाती है .  वो ख्यालों की दुनिया से वापस आ जाते है और इन ख्यालों  की निरर्थकता के लिए वो एक बार फिर "यूँ ही" शब्द का इस्तेमाल करते  हैं .   "यूँ ही" शब्द का ये अद्भुत इस्तेमाल  पढने, सुनने वाले पर एक जादू सा असर  छोड़ता है,  जो साहिर जैसों के बस का ही कमाल है] 


[Composer : Khayyam;  Singer : Mukesh, Lata;   Producer/Director : Yash Chopra;  Actor : Amitabh Bachchan, Sashi Kapoor, Rakhi]