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August 13, 2017

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो (लाइट हाउस - 1958) Gumba-Rumba, Gumba- Rumba Gelo (Light House -1958)

गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
कल की बातें कल पर छोड़ो
आज मज़ा ले लो

           आ! तुझे कसम है
          आ! जहां का गम है
दिलवालों के इस मेले में मौज मना लो यारों
कस्टम-वस्टम, कल्चर वल्चर सबको गोली मारो
मुफ्त मिले जब दिल की खुशियाँ फिर तकलीफ़ें क्यों झेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो
     
      आ! नज़ारे हैं जवां
      आ! तू गुम है कहां
खिले खिले मुरझा न जाएं ये फूलों से चेहरे
इन फूलों को गूँथ के पहनो सर पर बांधों सेहरे
दुनिया तुम से खेल रही है तुम दुनिया से खेलो
मज़ा ले लो
गुम्बा-रुम्बा, गुम्बा-रुम्बा गेलो

[Composer : N.Dutta, Singer : Suman Kalyanpur, Mohd. Rafi, Director : G.P.Sippy]

किस जगह जाएँ, किसको दिखलाएँ (लाइट हाउस -1958) Kis jagah jayen, Kisko dekhlayen (Light House -1958)

हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलाएँ
ज़ख़्म--दिल अपना

सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुख का सपना कोई नहीं
हो किस जगह जाएँ ...

दिल के अरमाँ पूरे हो न सके
हँसना कैसा खुल कर रो न सके
हो किस जगह जाएँ  


[Composer : N.Dutta, Singer : Asha Bhonsle, Director : G.P.Sippy]

मस्त पवन, मस्त गगन, मस्त है सारा समां (लाइट हाउस -1958) Mast pawan, mast gagan, masta hai sara samaan (Light House - 1958)

मस्त पवनमस्त गगनमस्त है सारा समां
अंग-अंग झूम उठेआज ऐसा रंग जमा

आज मेरी चूड़ियों के साज गुनगुना उठे
धूल  भरे रास्तों  में फूल  मुस्कुरा उठे
दिल में झिलमिलाने लगी आस की नन्हीं-सी शमा

सोई-सोई  ज़िंदगी  में  इक तरंग जाग पड़ी
करवटें बदल के दिल की हर उमंग जाग पड़ी
बिगड़ी हुई बात बनीजाता हुआ वक़्त थमा

[Composer : N.Dutta, Singer : Asha Bhonsle, Director : G.P.Sippy]

April 21, 2015

रात भर का है मेहमां अँधेरा (सोने की चिड़िया-1958) Raat bhar ka hai mehmaan andhera (Sone ki chidiya -1958)

मौत कभी भी मिल सकती है लेकिन जीवन कल मिलेगा
मरने वाले सोच समझ ले, फिर तुझे ये पल मिलेगा

रात भर का है मेहमां अँधेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

रात जितनी भी संगीन होगी
सुबह उतनी ही रंगीन होगी
ग़म कर गर है बादल घनेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

लब पे शिकवा ला, अश्क़ पी ले
जिस तरह भी हो कुछ देर जी ले
अब उखड़ने को है ग़म का डेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

यूँ ही दुनिया में आकर जाना
सिर्फ़ आँसू बहाकर जाना
मुस्कुराहट पे भी हक़ है तेरा
किसके रोके रुका है सवेरा

कोई मिल के तदबीर सोचें
सुख के सपनों की ताबीर सोचें
जो तेरा है वही ग़म है मेरा
किसके रोके रुका है सवेरा
 

Note - 2nd last stanza was not used in movie. We take it from the collection of Sahir's song,  'Gata Jaye Banjara'

[Composer : O.P.Nayyar,  Singer : Md. Rafi,  Director : Shaheed Latif,  Producer : Ismat Chughtai, Actor : Nutan, Balraj Sahni]
 

April 17, 2015

दो बूँदे सावन की (फिर सुबह होगी-1958) Do boonde sawan kii (Phir Subah Hogi -1958)

दो बूँदे सावन की
इक सागर की सीप में टपके और मोती बन जाये
दूजी गंदे जल में गिरकर अपना आप गंवाये
किसको मुजरिम समझे कोई, किसको दोष लगाये

दो कलियां गुलशन की
इक सेहरे के बीच गुँधे और मन ही मन इतराये
एक अर्थी के भेंट चढ़े और धूलि मे मिल जाये
किसको मुजरिम समझे कोई, किसको दोष लगाये

दो सखियाँ बचपन की
इक सिंहासन पर बैठे और रूपमती कहलाये
दूजी अपने रूप के कारण गलियों मे बिक जाये
किसको मुजरिम समझे कोई किसको दोष लगाये

[Composer : Khayyam, Singer : Asha Bhonsle, Director : Ramesh Saigal, Producer : Parijat Pictures;  Actor : Raj Kapoor, Mala Sinha]

August 16, 2014

औरत ने जनम दिया मर्दों को (साधना -1958) Aurat ne janam diya mardon ko (Sadhna - 1958)

औरत ने जनम दिया मर्दों को,  मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया |.

तुलती है कहीं दीनारों में, बिकती है कहीं बाज़ारों में
नंगी नचवाई जाती है, ऐय्याशों के दरबारों में
ये वो बेइज्ज़त चीज़ है जो, बंट जाती है इज्ज़तदारों में ।

मर्दों के लिए हर ज़ुल्म रवां, औरत के लिए रोना भी खता
मर्दों के लिए लाखों सेजें, औरत के लिए बस एक चिता
मर्दों के लिए हर ऐश का हक, औरत के लिए जीना  भी सज़ा ।

जिन होठों ने इनको प्यार किया, उन होठों का व्योपार किया
जिस कोख में इनका जिस्म ढला, उस कोख का कारोबार किया
जिस तन से उगे कोपल बन कर, उस तन को ज़लील-ओ-खार किया ।

मर्दों ने बनायीं जो रस्में, उनको हक का फरमान कहा
औरत के ज़िंदा जलने 
को, कुर्बानी और बलिदान कहा
किस्मत के बदले रोटी 
दी, और उसको भी एहसान कहा ।

संसार की हर इक बेशर्मी, ग़ुरबत की गोद में पलती है
चकलों ही में आ के रूकती है, फाकों से जो राह निकलती है
मर्दों की हवस है जो अक्सर, औरत के पाप में ढलती  है ।

औरत संसार की इस्मत है, फिर भी तकदीर की हेटी है
अवतार पयम्बर जनती है, फिर भी शैतान की बेटी है
ये वो बदकिस्मत माँ है  जो, बेटों की सेज पे लेटी है  | 


[Composer : N.Dutta; Singer : Lata Mangeshkar;  Producer & Director : B.R. Chopra;  Actor : Vaijyanthi Mala]

December 31, 2013

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाहों का गिला (फिर सुबह होगी - 1958) Phir na kije meri gustakh nigahi ka gila (Phir Subah Hogi-1958)

फिर ना कीजै मेरी गुस्ताख़ निगाहों का गिला
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको |
        
मैं कहाँ तक ना निगाहों को पलटने देती
        आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको |

इस कदर प्यार से देखो ना हमारी ज़ानिब
दिल अगर और मचल जाये तो मुश्किल होगी
        तुम जहाँ मेरी तरफ़ देख के रुक जाओगे
        वही मंजिल मेरी तक़दीर की मंजिल होगी |

एक यूँ ही सी नजर दिल को जो छू लेती है
कितने अरमान जगाती है तुम्हे क्या मालूम
        रूह बेचैन है कदमों से लिपटने के लिये
        तुमको हर साँस बुलाती है तुम्हे क्या मालूम |

हर नज़र आपकी जज्बात को उकसाती है
मैं अगर हाथ पकड़ लूं तो खफ़ा मत होना
        मेरी दुनिया--मोहब्बत है तुम्हारे दम से
        मेरी दुनिया--मोहब्बत से जुदा मत होना |
देखिये आप ने फिर प्यार से देखा मुझको
आप के दिल ने कई बार पुकारा मुझको । 

[Composer : Khayyam;  Singer : Mukesh, Asha Bhonsle,  Producer : Parijat Pictures;  Director: Ramesh Saigal;  Artist : Raj Kapoor, Mala Sinha ]
 

December 28, 2013

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िन्दगी से हम (लाइट हाउस -1958) Tang aa chuke hain kashmkash-e-zindagi se hum (Light House -1958)

तंग चुके हैं कशमकश--ज़िन्दगी से हम
ठुकरा ना दें जहां को कहीं बेदिली से हम |

लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता--उम्मीद
लो अब कभी गिला ना करेंगे किसी से हम |

गर ज़िन्दगी में मिल गये फिर इत्तफ़ाक़ से 
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम |

आसमान वाले कभी तो निगाह कर 
अब तक ये ज़ुल्म सहते रहे खामोशी से हम |

[Composer : N.Dutta, Singer : Asha Bhonsle, Director : G.P.Sippy]