July 22, 2011

न मुँह छुपा के जियो (हमराज़ 1967) Na muhn chupa ke jiyo (Hamraaz-1967)

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
ग़मों का दौर भी आये तो मुस्कुरा के जियो ।

घटा में छुप के सितारे फना नहीं होते 
अँधेरी रात के दिल में दिये जला के जियो 

न जाने कौन सा पल मौत की अमानत  हो
हरेक पल की ख़ुशी को गले लगा के जियो ।

ये  ज़िन्दगी किसी मंजिल पे रुक नहीं सकती 
हर  इक मक़ाम से आगे क़दम बढ़ा  के जियो ।


[Music : Ravi;  Singer : Mahender Kapoor;  Producer & Director : B.R.Chopra;  Actor : Sunil Dutt]


जाने वो कैसे लोग थे (प्यासा- 1957) Jane wo kaise log the (Pyaasa- 1957)

जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला
हमने तो जब कलियाँ मांगी काँटों का हार मिला । 
 
खुशियों की मंजिल ढूँढी तो गम की गर्द मिली
चाहत के नगमे चाहे तो आंहें सर्द मिली
दिल के बोझ को दूना कर गया जो गमख्वार मिला
हमने तो जब कलियाँ मांगी काँटों का हार मिला । 
 
बिछड़ गया हर साथी दे कर पल दो पल का साथ
किसको फुर्सत है जो थामे दीवानों का हाथ
हमको अपना साया तक अक्सर बेजार मिला
हमने तो जब कलियाँ मांगी काँटों का हार मिला । 
 
इसको ही जीना कहते है तो यूँ ही जी लेंगे
उफ़ न करेंगे, लब सी लेंगे, आँसू पी लेंगे
गम से अब घबराना कैसा, गम सौ बार मिला
हमने तो जब कलियाँ मांगी काँटों का हार मिला । 
 
[Composer : S.D.Burman;  Singer : Hement Kumar;  Producer/Director : Guru Dutt;   Actor : Guru Dutt,  Rahman, Mala Sinha]



गम क्यों हो जीने वालों को जीते जी (शहंशाह - 1953) Gam Kyon Ho Jeenewaalon Ki Jeete Ji (Shahenshah - 1953)

जीने वालो को जीते जी मरने का गम क्यों हो, गम क्यों हो
शोख लबो पर आहें क्यों को, आँखों में नम क्यों हो, गम क्यों हो

आज अगर गुलशन में कली खिलती है तो कल मुरझाती है
फिर भी खिल कर हंसती  है और हंस कर चमन महकाती  है
महकाती है, गम क्यों हो ।

कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन हम खोये क्यों
जिन घड़ियों  में हंस सकते है, उन  घड़ियों में रोये क्यों
रोये क्यों, गम क्यों हो ।

गाये जा मस्ती के तराने, ठंडी आंहे भरना क्या
मौत आये तो मर भी लेंगे मौत से पहले मरना क्या,
मरना क्या, गम क्यों हो ।

[Music: S.D.Burman;  Singer : Asha Bhonsle; Producer : G.P.Production; Director : Amiya Chakravarty]


जाम थाम ले (शहंशाह -1953) Jaam Tham Le (Shahenshah-1953)

जाम थाम ले, सोचते ही सोचते न बीते सारी रात
जाम थाम ले .

सज के आई है शीशे की परी
ढूंढ के लाई है दिलों की खुशी
जन्नत से कुदरत ने भेजा तेरे लिये ईनाम
दुनिया के हर दुख का दारु एक सुनहरी जाम

सुबह दूर है रात की कसम
दिल की मान ले मेरे सनम
मस्ती की इन घडियों में क्या सोच समझ का काम
ज़ुल्फ़ों के साये में नादां कर भी ले आराम


[Music:  S.D.Burman;  Singer : Shamshad Begum;  Producer : G.P.Production;  Director : Amiya Chakravarty]


नाजों के पले (शहंशाह -1953) Nazon ke paley (Shahenshah - 1953)

नाजों के पले काँटों पे चले ऐसा भी जहां में होता है 
तकदीर के ज़ालिम हाथों से दिल खून के आंसूं रोता है .

नित जिन में चरांगा रहता था
ख़ाक उड़ती है उन ऐवानों में
मखमल पे न जो रखते थे कदम
फिरते हैं वो रेगिस्तानो में ।

चलने का सहारा कोई नहीं
रुकने का ठिकाना कोई नहीं
इस हाल में काम आने वाला
अपना बेगाना कोई नहीं ।

दुनिया में किसी को भी अपनी
क़िस्मत का लिखा मालूम नहीं
सामान हैं लाखों बरसों के
और कल का पता मालूम नहीं ।
[Music:  S.D.Burman;  Singer : Talat Mahmood;  Producer : G.P.Production;  Director : Amiya Chakravarty]






जब दुनिया बदली है फिर क्यों न बदलें हम- (अरमान-1953) Jab duniya badli hai fir kyon na badlen hum - (Armaan-1953)

जब दुनिया बदली है, फिर क्यों का बदले हम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |

जो बीती बीत गयी, अब उसको याद न कर
रंगीन बहारो को, यूँ ही बर्बाद न कर
इन नाज़ुक घडियो की, उम्रे होती है कम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |

चाहत के गुलशन से, खुशियों की कलियाँ चुन
कुछ अपने दिल की कह, कुछ मेरे दिल की सुन
ये दूरी कैसी है, मैं फूल हूँ तू शबनम
खिलते हुए मौसम में, क्यों बीती ऋत का गम |

[Music : S.D.Burman; Singer : Asha Bhonsle;  Producer : F.Tech of India; Director : Fali Mistry]




June 11, 2011

मन रे तू काहे न धीर धरे (चित्रलेखा-1964) Man Re Tu Kahe Na Dheer Dhare (Chitralekha-1964)

मन रे तू काहे ना धीर धरे
ओ निर्मोही मोह ना जाने,  जिनका मोह करे
मन रे तू काहे ना धीर धरे |

इस जीवन की चढ़ती ढलती
धूप को किसने बांधा
रंग पे किसने पहरे डाले
रुप को किसने बांधा
काहे ये जतन करे |

उतना ही उपकार समझ कोई
जितना साथ निभा दे
जनम मरन का मेल है सपना
ये सपना बिसरा दे
कोई न संग मरे |

[Composer: Roshan;  Singer : Md. Rafi;  Producer : Pusha Picture ; Director: Kidar Nath Sharma;  Actor : Pradeep Kumar]




तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा (धूल का फूल-1959) Tu Hindu Banega Na Musalman Banega (Dhool ka Phool-1959)

तू हिन्दु बनेगा ना मुसलमान बनेगा
इन्सान की औलाद है इन्सान बनेगा  

अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है
तुझको किसी मजहब से कोई काम नहीं है
जिस इल्म ने इंसान को तकसीम किया है
उस इल्म का तुझ पर कोई इलज़ाम नहीं है
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा ।

मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया
कुदरत ने तो बख्शी थी हमें एक ही धरती

हमने कहीं भारत कहीं इरान बनाया
जो तोड़ दे हर बंध वो तूफ़ान बनेगा ।

नफरत जो सिखाये वो धरम तेरा नहीं है
इन्सां को जो रौंदे वो कदम तेरा नहीं है
कुरआन न हो जिसमे वो मंदिर नहीं तेरा
गीता न हो जिसमे वो हरम तेरा नहीं है  
तू अम्न का और सुलह का अरमान बनेगा ।

ये दीन के ताजिर ये वतन बेचने वाले
इंसानों की लाशों के कफ़न बेचने वाले
ये महलों में बैठे हुए ये कातिल ये लुटेरे
काँटों के एवज़ रूह-ए-चमन बेचने वाले
तू इनके लिये मौत का ऐलान बनेगा 

[Composer:  N.Dutta;  Singer : Rafi;  Producer ; B.R.Chopra,   Director : Yash Chopra;  Actor : Manmohan Krishan]

Note : With this movie, Yash Chopra started his career as a Director.



ज़िन्दगी इत्तफ़ाक़ है (आदमी और इंसान-1969) Zindagi itafaq hai (Aadmi aur Insaan -1969)

ज़िन्दगी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इत्तफ़ाक़ थी
आज भी इत्तफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इत्तफ़ाक़ है ...

जाम पकड़ बढ़ा के हाथ
माँग दुआ घटे न रात
जान-ए-वफ़ा तेरी क़सम
कहते हैं दिल की बात हम
ग़र कोई मेल हो सके
आँखों का खेल हो सके
अपने को ख़ुशनसीब जान
वक़्त को मेहरबान मान
मिलते हैं दिल कभी-कभी
वरना हैं अजनबी सभी
मेरे हमदम मेरे मेहरबाँ
हर ख़ुशी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इत्तफ़ाक़ थी ...

हुस्न है और शबाब है
ज़िन्दगी क़ामयाब है
बज़्म यूँ ही खिली रहे
अपनी नज़र मिली रहे
रंग यूँ ही जमा रहे
वक़्त यूँ ही थमा रहे
साज़ की लय पे झूम ले
ज़ुल्फ़ के ख़म को चूम ले
मेरे किए से कुछ नहीं
तेरे किए से कुछ नहीं
मेरे हमदम मेरे मेहरबाँ
ये सभी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इत्तफ़ाक़ थी ...

(Composer : Ravi;  Singer : Asha Bhonsle;  Producer: B.R.Chopra,  Director : Yash Chopra; Actor: Mumtaaz, Dharmendra, Firoz Khan]

वतन का क्या होगा अंजाम (आदमी और इंसान -1969) Vatan Ka Kya Hoga Anjaam (Aadmi Aur Insaan-1969)

बिना सिफारिश मिले नौकरी
बिन रिश्वत हो काम
अरे इसी को अनहोनी कहते हैं
इसी का कलजुग नाम 
वतन का क्या होगा अंजाम 
बचा ले ऐ मोला ऐ राम ..

रिश्वत पर पलते थे अफसर, छोटे हो या मोटे
बंद हुयी ये रस्म तो  धंधे हो जायेंगे खोटे
घर-घर में मातम होगा  दफ्तर-दफ्तर कोहराम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम ..

यही चला गर ढंग यारों होंगे बुरे नतीजे
भूखे मरेंगे नेताओं के बेटे और भतीजे
जितनी इज्ज़त बनी थी अब तक
सब होगी नीलाम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम ..

रिश्वत से मुंह  बंद थे सबके अब फूटेंगे भांडे
अरे पता चलेगा किसके  किससे मिले हुए थे डांडे
कौन सा ठेका लेकर किसने कितना माल बनाया
कितनी उजरत दी लोगों  को कितना बिल दिखलाया
कौन सी फाईल किस दफ्तर से कैसे हो गयी चोरी
किसने कितनी गद्दारी की  कितनी  भरी तिजोरी
किस मिल मालिक के पैसे से कितने वोट कमाए
कुर्सी मिली तो देशभगत ने कितने नोट कमाए
रिश्वत से ही छुपे हुए थे सब काले करतूत
नंगे होकर सामने आयेंगे अब सभी  सबूत
दुनिया भर के मुल्कों में होगा भारत बदनाम
बचा ले ऐ मोला ऐ राम
वतन का क्या होगा अंजाम ..


[Composer : Ravi; Singer ; Rafi; Producer: B.R.Chopra,  Director : Yash Chopra; Actor: Johny Walker, Saira Bano]