December 14, 2016

नीले गगन के तले (हमराज़ -1967) Neele Gagan ke tale (Hamraaz-1967)

नीले गगन के तले
धरती का प्यार पले
ऐसे ही जग में आती हैं सुबहें
ऐसे ही शाम ढले
नीले गगन के तले

शबनम के मोती
फूलों पे बिखरें
दोनों की आस फले
नीले गगन के तले

बलखाती बेलें
मस्ती में खेलें
पेड़ों से मिल के गले
नीले गगन के तले

नदिया का पानी
दरिया से मिल के
सागर की ओर चले
नीले गगन के तले

[Composer : Ravi;  Singer : Mahender Kapoor;  Producer & Director : B.R.Chopra;  Actor : Raj Kumar, Vimi]

गंगा तेरा पानी अमृत, झर-झर बहता जाए(गंगा तेरा पानी अमृत -1971) Ganga tera pani amrit, jhar jhar bahta jaye (Ganga Tera Pani Amrit -1971)

गंगा तेरा पानी अमृत, झर-झर बहता जाए
युग-युग से इस देश की धरती तुझसे जीवन पाए

दूर हिमालय से तू आई गीत सुहाने गाती
बस्ती-बस्ती, जंगल-जंगल सुख-संदेश सुनाती
तेरी चांदी जैसी धारा मीलों तक लहराए

कितने सूरज उभरे डूबे गंगा तेरे द्वारे
युगों-युगों की कथा सुनाएं तेरे बहते धारे
तुझको छोड़ के भारत का इतिहास लिखा न जाए

इस धरती का दुख-सुख तूने अपने बीच समोया
जब-जब देश ग़ुलाम हुआ है तेरा पानी रोया
जब-जब हम आज़ाद हुए हैं तेरे तट मुस्काए

खेतों-खेतों तुझसे जागी धरती पर हरियाली
फसलें तेरा राग अलापें, झूमे बाली बाली
तेरा पानी पी कर मिट्टी, सोने में ढल जाए

तेरे दान की दौलत ऊंचे खलियानों में ढलती
खुशियों के मेले लगते, मेहनत की डाली फलती
लहक लहककर धूम मचाते, तेरी गोद के जाए

गूंज रही है तेरे तट पर नवजीवन की सरगम
तू नदियों का संगम करती, हम खेतों का संगम
यही वो संगम है जो दिल का दिल से मेल कराए

हर हर गंगे कह के दुनिया तेरे आगे झुकती
तुझी से हम सब जीवन पाएं, तुझी से पाएं मुक्ति
तेरी शरण मिले तो मईय्या, जनम सफल जो जाए   

[Composer : Ravi, Singer ; Md. Rafi, Lata Mangeshkar, Actor : Navin Nischal, Yogita Bali]

November 30, 2016

मैं बम्बई का बाबू, नाम मेरा अंजाना (नया दौर -1957) Main Bombay ka babu, naam mere Anjana (Naya Daur-1957)

मैं बम्बई का बाबू, नाम मेरा अंजाना
इंग्लिश धुन में गाऊं,  मैं हिंदुस्तानी गाना

यह दुनिया है उस की जो दुनिया से खेले
सख़्ती हो या नर्मी हँसते-हँसते झेले
सुन लो अजी सुन लो ! ये जादू का तराना

कुछ हैं दौलत वाले, कुछ हैं ताक़त वाले
असली वाले वो हैं,  जो  हैं हिम्मत वाले
सुन लो, अजी सुन लो ! ये जादू का तराना

आया हूं मैं बंधु रूस और चीन में जा के
काम की बात बता दी, मैंने कॉमेडी गाना गा के
सुन लो, अजी सुन लो ! ये जादू का तराना

[Composer : O.P.Nayar, Singer : Md. Rafi , Producer & Director : B.R.Chopra, Actor : Johny Walker, Dilip Kumar, Vaijyanthi Mala]

माँग के साथ तुम्हारा (नया दौर -1957) Maang ke saath tumhara (Naya Daur-1957)

माँग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार

दिल कहे दिलदार मिला, हम कहें हमें प्यार मिला

प्यार मिला हमें यार मिला, इक नया संसार मिला
आस मिली अरमान मिला
जीने का सामान मिला
मिल गया एक सहारा
माँग के साथ तुम्हारा

दिल जवां और रुत हसीं, चल यूँ ही चल दें कहीं
तू चाहे ले चल कहीं, तुझ पे है मुझको यकीं
जान भी तू है, दिल भी तू ही
राह भी तू, मंज़िल भी तू ही
और तू ही आस का तारा
माँग के साथ तुम्हारा


[Composer : O.P.Nayar, Singer : Md. Rafi, Asha Bhonsle, Producer & Director : B.R.Chopra, Actor : Dilip Kumar, Vaijyanthi Mala]


साथी हाथ बढ़ाना (नया दौर -1957) Sathi haath badhana (Naya Daur-1957)

साथी हाथ बढ़ाना !
एक अकेला थक जायेगा मिलकर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना !

हम मेहनतवालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने शीश झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाहें
हम चाहें तो पैदा कर दें, चट्टानों में राहें,
साथी हाथ बढ़ाना !

मेहनत अपनी लेख की रेखा, मेहनत से क्या डरना
कल गैरों की खातिर की, अब अपनी खातिर करना
अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक
अपनी मंजिल सच की मंजिल, अपना रस्ता नेक
साथी हाथ बढ़ाना !

एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सहरा
एक से एक मिले तो राई बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इंसां बस में कर ले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना !

माटी से हम लाल निकालें, मोती लाएं जल से
जो कुछ इस दुनिया में बना है ,बना हमारे बल से
कब तक मेहनत के पैरों में दौलत की ज़ंज़ीरें?
हाथ बढ़ाकर छीन लो अपने सपनों की ताबीरें
साथी हाथ बढ़ाना !

[Composer : O.P.Nayar, Singer : Md. Rafi, Asha Bhonsle, Producer & Director : B.R.Chopra, Actor : Dilip Kumar, Vaijyanthi Mala]

November 22, 2016

ऐ मेरी ज़ोहरा-जबीं (वक्त -1965) Aye meri zohare-jabeen (Waqt-1965)

ऐ मेरी ज़ोहरा-जबीं, तुझे मालूम नहीं
तुझ पे क़ुरबान मेरी जान मेरी जान
तो अभी तक है हसीं और मैं जवां  

ये शोखियाँ ये बाँकपन जो तुझ में है, कहीं नहीं
दिलों को जीतने का फन जो तुझ में है, कहीं नहीं
मैं तेरी आंखों में पा गया दो जहां

तू मीठे बोल जानेमन जो मुस्कुरा के बोल दो
तो धडकनों में आज भी शराबी रंग घोल दे
ओ सनम! मैं तेरा आशिक-ए-जां-विदां

 [Composer : Ravi;  Singer : Manna Dey;  Producer : B.R.Chopra;  Director : Yash Chopra;  Actor : Balraj Sahni]

June 27, 2016

तेरी है ज़मीं, तेरा आसमां ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Teri hai zameen, tera aasmaan (The Burning Train – 1980)

तेरी है ज़मीं, तेरा आसमां, तू बड़ा मेहरबां, तू बख्शीश कर!
सभी का है तू, सभी तेरे, खुदा मेरे तू बख्शीश कर!

तेरी मर्ज़ी से ए मालिक, हम दुनिया में आए हैं
तेरी रहमत से हम सबने ये जिस्म और जान पाए हैं 
तू अपनी नज़र हम पर रखना
किस हाल में हैं, ये खबर रखना

तू चाहे तो हमें रखे, तू चाहे हो हमें मारे
तेरे आगे झुका के सर, खड़े हैं आज हम सारे
ओ! सबसे बड़ी ताकत वाले
तू चाहे तो हर आफत टाले 

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Padmini Kolhapure, Sushma Shresht, Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Dharmendra, Hema Malini, Simi Grewal, Jitendra, Neetu Singh ]

तुमसे कहना है कि दुश्वार है तुम बिन जीना (चेहरे पे चेहरा -1980) Tumse kehna hai ki dushwar hai tum bin jina (Chehre pe Chehra -1980)

तुमसे कहना है कि दुश्वार है तुम बिन जीना
तुमसे कहना है मगर तुम कभी आओ तो कहूं

तुमको बीते हुये दिन याद नहीं हैं तो न हो
मैंने अब भी उन्हें सीने से लगा रखा है
इस यकीं पर कि किसी रोज़ तुम आओगे जरूर
घर की दहलीज़ को फूलों से सज़ा रखा है

टूट जाए न कहीं नाजे-मुहब्बत मेरा
रस्मे-दुनिया ही निभाने के लिए आ जाओ
आजमाना इसे समझूं कि सताना समझूं
मुझको बस इतना बताने के लिए आ जाओ  

[Composer : N.Dutta, Singer : Sulakshana Pandit, Producer/ Director : Raj Tilak, Actor : Sulakshana Pandit, Sanjeev Kumar]

June 15, 2016

साहिर के गीतों को आधार बनाकर रची गई मेरी पुस्तक ‘साहिर लुधियानवी : मेरे गीत तुम्हारे’ के कुछ अंश

फ़िल्मी दुनिया में  साहित्य से जुड़े कई सफल लोगों ने जोर आजमाईश की, पर उन्हें वसफलता नहीं मिल पाजो साहिर को नसीब हुयी । इसका एक कारण तो यह था कि ये लोग फिल्म के फॉरमेट को ठीक से पकड़ नहीं पा। एक फिल्म लेखक या गीतकार को कई बंधनों में रहकर काम करना होता है । उसे फिल्म की  कहानी, पात्रों के परिवेश, नायक-नायिका की  इमेज, प्रचलित गीत-संगीत, निर्माता-निर्देशक की पसंद-नापसंद सबका ख्याल रखना होता है ।  जाहिर है,  इतने बंधनों में रहकर काम करना  काफी मुश्किल है । इसलिए कोई हैरानी यहीं कि जिन लोगों ने साहित्य के क्षेत्र में नाम व शोहरत कमाई, वे मुंबई में चल नहीं पाऔर निराश होकर या मोहभंग करा कर वापस चले ग। साहिर के मामले में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने फ़िल्मी गीतों की इन सीमाओं को पहचान लिया । उन्होंने इन बंधनों का रोना नहीं रोया, बल्कि  उसे स्वीकार कर लिया । ये बंधन उनकी सीमा-रेखा बन गए । उन्होंने मान लिया कि अब जो भी खेल करना है,  इसी में करना है । और उन्होंने खेल किया और खूब किया 

साहिर के कैरियर के पहले दौर की सफलता का बड़ा कारण उनकी धुनों के हिसाब से गीत लिख पाने की क्षमता थी । धुन की रिदम से मिलते-जुलते शब्द चुनना और उन्हें ऐसे वाक्यों में पिरोना कि एक निश्चित समय-सीमा में फिट हो सकें, एक जटिल काम है । यह काम और भी मुश्किल हो जाता है जब कोई गीतकार अच्छा गीत लिखने की तमन्ना रखता हो । अपने अहसास और विचारों की गहराई को बनी-बनाई धुनों में बांधने का काम साहिर खूब किया और बहुत खूबसूरती से किया । साहिर की इस काव्य प्रतिभा के बारे में फ़िल्मी गीतकार व शायर जां निसार अख्तर कहते हैं, "अल्फ़ाज़ और जज़्बात की खूबसूरती गीतों के लिए बड़ी अहम है । जो धुन साहिर को 'सुन जा दिल की दास्तां' के लिये दी गयी होगी, उस पर 'आ जा, आ जा बलमा' भी दिया जा सकता था, लेकिन यहीं पर एक शायर और तुकबंद का फर्क सामने आता है ।" 

June 01, 2016

तुमको देखा तो समझ में आया (दीदार-ए-यार- 1982) Tumko dekha to samajh me aaya (Deedar-e-Yaar - 1982)

तुमको देखा तो समझ में आया
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
बुत में बुतगर की झलक होती है
इसको छूकर उसे पहचानते हैं
पहले अंजान थे, अब जानते हैं
तुमको देखा तो समझ में आया

तुमको देखा तो ये मालूम हुआ,
लोग क्यों इश्क़ में दीवाने बने
ताज छोड़े गए और तख्त लुटे
कैस-ओ-फरहाद के अफसाने बने
पहले अंजान थे, अब जानते हैं
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
तुमको देखा तो ये समझ में आया

तुमको देखा तो ये अहसास हुआ
ऐसे बुत भी हैं जो लब खोलते हैं
जिनकी अंगड़ाइयां पर तोलती हैं
जिनके शादाब बदन  बोलते हैं
पहले अंजान थे, अब जानते हैं
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
तुमको देखा तो ये समझ में आया

हुस्न के जलवा-ए-रंगीं में खुदा होता है
हुस्न के सामने सजदा भी रवां होता है
दीन-ए-उल्फ़त में यही रस्म चली आई है
लोग इसे कुफ़्र भी कहते हों तो क्या होता है
 पहले अंजान थे, अब जानते हैं
लोग क्यों बुत को खुदा मानते हैं
तुमको देखा तो ये समझ में आया

(Composer : Laxmikant Pyarelal, Singer : Lata Mangeshkar, Director : H S Rawal, Producer:  Prasan Kapoor,  Actor : Rishi Kapoor, Tina Munim)