September 17, 2015

पल दो पल का साथ हमारा ( द बर्निंग ट्रेन -1980) Pal do pal ka saath hamara (The Burning Train – 1980)

पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं
इस मंज़िल पर मिलने वाले, उस मंज़िल पर खो जाने हैं
पल दो पल.......

नज़रों के शोख़ नज़राने, होंठों के गरम पैमाने
हैं आज अपनी महफ़िल में, कल क्या हो कोई क्या जाने
ये पल खुशी की जन्नत है, इस पल में जी ले दीवाने
आज की खुशियाँ एक हकीकत, कल की खुशियाँ अफसाने हैं
पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं

हर खुशी कुछ देर की मेहमान है
पूरा कर ले दिल में जो अरमान है
जिंदगी इक तेज़ रौ तूफान है
इसका जो पीछा करे नादान है
गुमशुदा खुशियों पर क्यों हैरान है
वक़्त लौटे इसका कब इम्तहान है,
झूम जब तक झूम
झूम जब तक धड़कनों में जान है
झूमना ही जिंदगी की शान है
अव्वल आखिर हर कोई अंजान है
जिंदगी बस राह की पहचान है
दोस्तों अपना तो ये ईमान है
जो जितना भी साथ दे एहसान है
उम्र का रिश्ता जोड़ने वाले
अपने नज़र में दीवाने हैं
पल दो पल का साथ हमारा, पल दो पल के याराने हैं । 

[Composer :  R.D.Burman,  Singer : Mohammad Rafi, Asha Bhonsle , Producer: B.R.Chopra, Director : Ravi Chopra, Actor : Jitendra, Neetu Singh ]

August 24, 2015

तख़्त न होगा ताज न होगा (आज और कल -1963) Takht Na Hoga Taaj Na Hoga -(Aaj Aur Kal -1963)

तख्त न होगा, ताज़ न होगा, कल था लेकिन आज न होगा जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा |

लाखों की मेहनत पर कब्जा मुट्ठी भर धनवानों का
दीन-धरम के नाम पे खूनी बंटवारा इंसानों का
जिसका ये इतिहास रहा है, अब वो अंधा राज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा |

जनता का फरमान चलेगा, जनता की सरकार बनेगी
धरती की बेहक आबादी, धरती की हकदार बनेगी
सामंती सरकार न होगी, पूंजीवाद समाज न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा |

मिल पर मजदूरों का हक़ है, खेतों पर दहकान का हक़ है
जीने पर पाबंदी क्यों हो, जीना हर इंसान का हक़ है
जय हो जनता राज कि जिसमें हुल्लड़ और नियाज़ न होगा
जिसमें सब अधिकार न पायें, वो सच्चा स्वराज न होगा

(हाइलाइट किए शब्दों को मैं ठीक से समझ नहीं पाया हूँ | पाठकगण कृपया मदद करें ) 

[Composer : Ravi;  Singer : Rafi, Geeta Dutt;  Production House : Panchdeep Chitra;  Director : Vasant Joglekar  Actor : Sunil Dutt, Tanuja]

 

July 16, 2015

दिल करता, ओ यारा दिलदारा! मेरा दिल करता (आदमी और इंसान -1969) Dil Karta, O yara Dildara! mera dil karta (Aadmi aur insaan -1969)

दिल करता
ओ यारा ! दिलदारा मेरा दिल करता  
ऐसा कुछ कर पायें यादों में बस जायेँ  
ओ यारा ! दिलदारा मेरा दिल करता  
सदियों जहान में हो चर्चा हमारा

जलती मसालें ले के मिलनी की रातों में 
आगे-आगे हम चलें, यारों की बारातों में
 हंसे कोई भोली-भाली अपनी भी  बातों में 
किसी की कलाई आये अपने भी हाथों में
सदियों जहान में हो चर्चा हमारा |

नित नई धूमे मचें, नित नये मेले हों  
परियों में घिरे रहें, कभी न अकेले हों
गम की घटायेँ हों के खुशियों के रेले हों  
दोनों से निभाने वाले हम अलबेले हों  
सदियों जहान में हो चर्चा हमारा 

हम सा जियाला कोई मिले न हजारों में 
मरे चाहे जिये, रहें अगली कतारों में  
झलके हमारा लहू कल की बहारों में
अश्कों का तोहफा हो के बट जायें यारों में 
सदियों जहान में हो चर्चा हमारा

(Composer: Ravi;  Singer : Mahender Kapoor;  Producer: B.R.Chopra,  Director : Yash Chopra]
 

June 12, 2015

ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले (नाचघर-1959) Aye dil zuban na khol, sirf dekh le (Nachghar -1959)

ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले
किसी से कुछ न बोल सिर्फ देख ले |

ये हसीन जगमगाहटें,
आँचलों की सरसराहटें
ये नशे में झूमती ज़मीं
सबके पाँव चूमती ज़मीं
किस कदर है गोल सिर्फ देख ले
ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले |

कितना सच है, कितना झूठ है
कितना हक है, कितनी लूट है
रख सभी की लाज, कुछ न कह
क्या है ये समाज, कुछ न कह
ढ़ोल का ये पोल सिर्फ देख ले
ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले |

मान ले जहां की बात को
दिन समझ ले काली रात को
चलने दे यूं ही ये सिलसिला
ये न बोल किसको क्या मिला
तराजुओं का झोल सिर्फ देख ले
ऐ दिल जुबां न खोल सिर्फ देख ले |
 
[Composer : N.Dutta, Singer : Lata Mangeshkar, Producer : Kwality Pictures, Director : R.S.Tara] 
 

May 27, 2015

दिल का तराना गा ले (सोसाइटी -1955) Dil ka tarana ga le (Society -1955)

दिल का तराना गा ले, सोच न कर मतवाले
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?

सारे जहन्नुम, सारी बहिश्तें, झूठे बहाने हैं
पहलू की जन्नत, जिंदा हकीकत, बाकी फसाने हैं
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?

ये मस्त रातें, झूमे बारातें, जा के न आएंगी
इन महफ़िलों की, इन दिलबरों की यादें सताएंगी
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?

तड़पें अचल है, मरना अटल है, मरने से पहले जी
लहरा के गा के, दुनिया पे छा के, मस्ती के सागर पी
ये ज़िंदगानी, ये नौजवानी, ये शादमानी
फिर कहाँ, फिर कहाँ, फिर कहाँ ?
 
[Composer ; S.D.Burman, Singer : Geeta Dutt, Director : Shahid Latif, Producer ; Ismat Chugtai] 


 

May 26, 2015

प्यार भरी धडकनों के हार ले के आऊँगी (अंगारे-1954) Pyar bhari dhadkano ke haar le ke aaungi (Angaarey -1954)

प्यार भरी धडकनों के हार ले के आऊँगी
तेरे लिये आज रात को

कहना दिल-ए-बेक़रार से
बाहर न हो इख़्तियार से
चैन ले के आऊँगी, करार ले के आऊँगी
तेरे लिये आज रात को

मस्ती की बाहों में झूल के
आऊँगी दुनिया को भूल के
रंग ले के आऊँगी, निखार ले के आऊँगी
तेरे लिये आज रात को

झपके न आँख इंतज़ार की
टूटे न लय दिल के तार की
ज़िंदगी का सोलहवां सिंगार ले के आऊँगी
तेरे लिये आज रात को

[Composer : S.D.Burman, Singer : Lata Mangeshkar, Actor - Nargis, Nasir Khan]
 
 

May 21, 2015

क्रोध कपट के अंधियारे में (अरमान -1953) Krodh kapat ke andhiyare men (Armaan -1953)

क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा
आते जाते सांस की धुन पे हरी नाम गुण गाये जा  

क्या ढूंढे बस्ती और बन में
प्रभु  तेरा  है  तेरे  मन में
दर-दर अलख जगाने  वाले
भीतर  खोज  लगाये  जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा

ये जीवन करमों की खेती
जो बीजो तो ही फल देती
इस दुनिया में दान दिये जा
उस  दुनिया  में  पाये  जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा

ये जग है दो दिन का ठिकाना
जोगी  रे  तोहे  दूर  है जाना
तोड़  के मायाजाल  के  बंधन
लौ  ईश्वर  से   लगाये   जा
क्रोध कपट के अंधियारे में जीवन ज्योत जगाये जा

 
 [Composer :  S D Burman, Singer : Manna Dey, Producer : F.Tech of India, Director : Fali Mistry]

May 19, 2015

इश्क़ और मुश्क़ कदे न छुप दे (काला पत्थर -1979) Isq aur musq kade na chhup de (Kala Pathar-1979)

इश्क़ और मुश्क़ कदे न छुप दे, ते चाहे लख छुपाइये
अखां लख झुका के चलिये, ते पल्ला लख बचाइये
इश्क़ है सच्चे रब दी रहमत, इश्क़ तों क्यूँ शर्माइये
चढ़ दे चंद ने चढ़ के रहना, कान्नू पर्दे पाइये

जग्गेया जग्गेया जग्गेया,
कदे इश्क़ छुपण नयो लगेया

दुनिया दी इस भीड़ दे अंदर, जे कोई अपणा पाइये
अपणे नूँ खुशकिस्मत कहिये, ते रब दा शुकर मनाइये
दिल बदले दिल मिलें ते यारा, सौदा झट चुकाइये
अम्बर ते जो स्वर्ग बसे, ओ धरती ते लै आइये
जग्गेया जग्गेया जग्गेया,
कदे इश्क़ छुपण नयो लगेया

दुनिया चार दिनां दा मेला, मत्थे बल न पाइये
कौण भले कौण मन्दे जग विच्च, सबणा नाल निभाइये
जग्गेया जग्गेया जग्गेया
सान्नू कौल ऐ सच्चा लगेया

पापां दी इस नगरी अंदर किस दे ऐब गिणाइये
अपणे अंदर जद-जद तकिये, अपणे तों शर्माइये
जग्गेया जग्गेया जग्गेया
सान्नू कौल ऐ सच्चा लगेया  

[Music : Rajesh Roshan;  Singer : Mahendra Kapoor, Pamela Chopra, S.K.Mahaan;  Producer/Director : Yash Chopra;   Artist : Parikshit Sahni, Amitabh Bachchan, Rakhi]


तुम अगर साथ देने का वादा करो (हमराज़ 1967) Tum agar saath dene ka wada karo (Hamraaz-1967)

तुम अगर साथ देने का वादा करो
मैं यूं ही मस्त नग़में लुटाता रहूं
तुम मुझे देखकर मुस्कुराती रहो
मैं तुम्हें देखकर गीत गाता रहूँ

कितने जलवे फ़िज़ाओं में बिखरे मगर
मैंने अब तक किसी को पुकारा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें ये कहने लगीं
हमको चेहरे से हटना गवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
मै हर एक शै से नज़रें चुराता रहूँ

मैने ख़्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संग-ए-मरमर की तस्वीर हो
तुम न समझो तुम्हारा मुक़द्दर हूँ मैं
मैं समझता हूं तुम मेरी तक़दीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
मैं बहारों की महफ़िल सजाता रहूं

मैं अकेला बहुत देर चलता रहा
अब सफ़र ज़िन्दगानी का कटता नहीं
जब तलक कोई रंगीं सहारा ना हो
वक़्त क़ाफ़िर जवानी का कटता नहीं
तुम अगर हमक़दम बन के चलती रहो
मैं ज़मीं पर सितारे बिछाता रहूं |


[Composer : Ravi;  Singer : Mahender Kapoor;  Producer & Director : B.R.Chopra;  Actor : Sunil Dutt, Vimi]

April 23, 2015

साहिर लुधियानवी के गीतों पर आधारित मेरी पहली पुस्तक - साहिर लुधियानवी के हिन्दी गीत

अमर वर्मा जी इसके सह-संपादक हैं और इसे स्टार पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है |

इस संकलन में साहिर के लिखे ऐसे गीत शामिल किए गए हैं, जिन्हें हम ठेठ हिन्दी गीत कह सकते हैं | इन गीतों की विशेषता यह है कि इन्हें लिखते वक्त साहिर ने उर्दू-शब्दों से परहेज किया | इनमें प्रेम गीत हैं तो विरह व जुदाई के गीत भी, जीवन-दर्शन समझते गीत हैं तो मस्ती भरे गीत भी, देशभक्ति के गीत हैं तो आरतियां, भजन, बालगीत व विदाई गीत भी | ये गीत साहिर की हिन्दी भाषा पर गहरी पकड़ को दर्शाते हैं | साहिर के गीतों का यह ऐसा पक्ष है, जो उनके उर्दू शायरी की विराटता के कारण ओझल ही रहता है | इस संकलन में ऐसे 100 गीतों को शामिल किया गया है, जो साहिर के इस पक्ष को सामने लाते हैं  |