December 28, 2013

मैं पल दो पल का शायर हूँ (कभी-कभी - 1976) Main Pal Do Pal Ka Shayar Hoon (Kabhi Kabhi - 1976)

कल नई कोंपलें फूटेंगी, कल नए फूल मुस्काएंगे
और नई घास के नए फर्श पर नए पांव  इठलाएंगे
वो मेरे बीच नहीं आए, मैं उनके बीच में क्यों आऊं
उनकी सुबह और शामों का मैं एक भी लम्हा क्यों पाऊँ

मै पल दो पल का शायर हूँपल दो पल मेरी कहानी है 
पल दो पल मेरी हस्ती है पल दो पल मेरी जवानी है

मुझसे पहले कितने शायर आये और आकर चले गये
कुछ आहें भरकर लौट गयेकुछ नगमें गाकर चले गये
वो भी इक पल का किस्सा थेमै भी इक पल का किस्सा हूँ
कल तुमसे जुदा हो जाऊंगागो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ

कल और आयेंगे नगमों की खिलती कलियाँ चुनने वाले
मुझसे बेहतर कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले
कल कोई मुझको याद करेक्यों कोई मुझको याद करे
मशरूफ जमाना मेरे लिए क्यों वक़्त अपना बर्बाद करे |  


[Composer : Khayyam;  Singer: Mukesh;   Producer/Director : Yash Chopra;   Actor: Amitabh Bachchan, Rakhi]



December 26, 2013

हमने सुना था एक है भारत (दीदी -1959) Humne suna tha ek hai Bharat (Didi -1959)

हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत 
लेकिन जब नजदीक से देखा सोच समझ कर ठीक  से देखा
हमने नक्शे और ही पाए बदले  हुए सब तौर ही पाए
एक से एक की बात जुदा है, धर्म जुदा है जात जुदा है
आप ने जो कुछ हम को पढाया, वह तो कही भी  नज़र   आया |

जो कुछ मैंने तुम को पढाया, उसमे कुछ भी झूठ नहीं
           भाषा से भाषा मिले तो इसका मतलब फूट नहीं
          इक डाली पर रह कर जब फूल जुदा है पात जुदा
          बुरा नहीं गर यूँ ही वतन में धर्म जुदा हो जात जुदा |

वही है जव कुरआन का कहना, जो है वेद पुरान का कहना
फिर ये शोर - शराबा  क्यों है, इतना खून - खराबा क्यों है ?

                सदियों तक इस देश में बच्चो रही हुकूमत गैरों की
          अभी तलक हम सबके मुँह  पर धुल है उनके पैरों की,
          लडवाओ और राज करो, यह उन लोगो की हिकमत थी
          उन लोगों की चल में आना हम लोगों की जिल्लत  थी,
          यह जो बैर है इक  दूजे से यह जो फुट और रंजिश है
          उन्ही विदेशी आकाओं  की सोची समझी बखशिश  है |

 कुछ इन्सान  ब्रहान क्यों है, कुछ इंसान हरिजन क्यों है,
एक की इतनी इज्जत क्यों है, एक की इतनी ज़िल्लत  क्यों है ?

धन और ज्ञान को ताकत वालों ने अपनी जागीर कहा
मेहनत और गुलामी को कमजोरों की तक़दीर कहा,
इन्सानों का यह बटवारा वहशत और जहालत है
जो नफ़रत की शिक्षा दे वह धर्म नहीं है , लानत है,
      जन्म  से कोई नीच नहीं है, जन्म  से कोई  महान  नहीं
      करम से बढ़कर  किसी मनुष्य की कोई भी पहचान नहीं |

ऊँचे महल बनाने वाले फुटपाथों पर क्यों नहीं रहते है,
दिन भर मेहनत करने वाले फाकों का दुख क्यों  सहते है ?

खेतों और मिलों पर अब तक धन वालों का इजारा है
हमको अपना देश प्यारा, उन्हें मुनाफा प्यारा है,
उनके राज में बनती है हर चीज़ तिजारत की खातिर
अपने राज में बना करेगी सब की जरुरत की खातिर,

अब तो देश में आज़ादी है अब क्यों जनता फरियादी  है,
कब जएगा दौर पुराना, कब आएगा नया जमाना ?

सदियों की भूख और बेकारी क्या इक दिन में जाएगी,
इस उजड़े गुलशन पर रंगत आते आते आएगी,
ये जो नये मनसूबे है ये जो नई तामीरे है 
आने वाली दौर की  कुछ धुधली -धुधली तस्वीरे है,
तुम ही रंग भरोगे इनमें तुम ही इन्हें चमकाओगे
नवयुग  आप नहीं आएगा नवयुग को तुम लाओगे । 

[Composer :N. Dutta;   Singer : Md. Rafi, Asha Bhonsle;  Actor : Sunil Dutt]

December 19, 2013

हम इंतज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक (बहू बेगम -1967) Hum Intezar karenge tera qayamat tak (Bahu Begum -1967)

हम इंतज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक
ख़ुदा करे कि क़यामत होऔर तू आए  |

ये इंतज़ार भी एक इम्तिहां होता है
इसी से इश्क़ का शोला जवां होता है
ये इंतज़ार सलामत हो और तू आए
ख़ुदा करे कि क़यामत होऔर तू आए । 

बिछाए शौक़ सेख़ुद बेवफ़ा की राहों में
खड़े हैं दीप की हसरत लिए निगाहों में
क़बूल--दिल की इबादत हो और तू आए
ख़ुदा करे कि क़यामत होऔर तू आए ।

वो ख़ुशनसीब है जिसको तू इंतख़ाब करे
ख़ुदा हमारी मोहब्बत को क़ामयाब करे
जवां सितारा--क़िस्मत हो और तू आए ।



[Composer: Roshan,  Singer : Asha Bhonsle, Md. Rafi, Actor : Meena Kumari, Pradeep Kumar  Producer : Jan Nisar Akhtar,  Director : M.Sadiq ]

November 16, 2013

मरता है कोई तो मर जाये (चंबल की कसम - 1979) Marta hai koi to mar jaye (Chambal ki Kasam -1979)

मरता है कोई तो मर जाये, हम अपना निशाना क्यों छोड़े 
दिलवाले बचाएँ दिल अपना, हम तीर चलाना क्यों छोड़े |

मजबूर ना हो तो इश्क ही क्या, मगरूर ना हो तो हुस्न ही क्या
तुम हमको मनाना क्यों छोडो, हम तुमको सताना क्यूँ छोड़े |

जो हमको नसीहत करते है, वो अपना जमाना देख चुके
हम पर भी जवानी आई है, हम अपना जमाना क्यूँ छोड़े । 

दुनिया तो हमारे सामने हैं, जन्नत का पता क्या हो कि ना हो 
जन्नत में छुपी दौलत के लिए, दुनिया का खज़ाना क्यूँ छोड़े । 


[Composer : Khayyam, Singer : Lata Mangeshkar,  Director : Ram Maheshwari, Actor : Rajkumar, Satrughan Sinha, Mausami Chaterjee]

कुछ और बहक जाऊँ, तब मेरे करीब आना (चंबल की कसम -1979) Kuch der bahak jaun, tab mere kareeb aana (Chambal ki kasam -1979)

कुछ और बहक जाऊँ, तब मेरे करीब आना
खिल जाऊँ, महक जाऊँ, तब मेरे करीब आना |

कम-कम है अभी नशा, कम-कम है अभी मस्ती 
थोड़ी सी अभी पी है, थोड़ी सी अभी ली है 
हसरत अभी बाकी है, तू आज का साकी है 
पीने दे पिलाने दे, कुछ रंग पे आने दे 
कम-कम है अभी नशा, कम-कम है अभी मस्ती
कुछ और बहक जाऊँ, तब मेरे करीब आना | 
 
मचले हुए इस दिल को, कुछ और मचलने दे 
ऐसी जल्दी भी है क्या, गर्म होने दे फज़ा  
रात ढलने दे जरा, शौक पलने दे जरा
डगमगाने दे बदन, तेज होने दे लगन 
मचले हुए इस दिल को, कुछ और मचलने दे 
लहराऊँ लहक जाऊँ, तब मेरे करीब आना 
कुछ और बहक जाऊँ, तब मेरे करीब आना । 
 
रग-रग में उतरने दे, जज्बात की गर्मी को 
दिल और धड़कने दे, आग और भड़कने दे 
तब हुस्न जवां होगा आलम ही जुदा होगा 
रग रग में उतरने दे जज्बात की गर्मी को 
शोला सी दहक जाऊँ , तब मेरे करीब आना 
कुछ और बहक जाऊँ, तब मेरे करीब आना । 
 

[Composer : Khayyam, Singer : Lata Mangeshkar, Director : Ram Maheshwari, Actor : Mausami Chaterjee, Ranjit, Rajkumar]