December 26, 2013

हमने सुना था एक है भारत (दीदी -1959) Humne suna tha ek hai Bharat (Didi -1959)

हमने सुना था एक है भारत सब मुल्कों से नेक है भारत 
लेकिन जब नजदीक से देखा सोच समझ कर ठीक  से देखा
हमने नक्शे और ही पाए बदले  हुए सब तौर ही पाए
एक से एक की बात जुदा है, धर्म जुदा है जात जुदा है
आप ने जो कुछ हम को पढाया, वह तो कही भी  नज़र   आया |

जो कुछ मैंने तुम को पढाया, उसमे कुछ भी झूठ नहीं
           भाषा से भाषा मिले तो इसका मतलब फूट नहीं
          इक डाली पर रह कर जब फूल जुदा है पात जुदा
          बुरा नहीं गर यूँ ही वतन में धर्म जुदा हो जात जुदा |

वही है जव कुरआन का कहना, जो है वेद पुरान का कहना
फिर ये शोर - शराबा  क्यों है, इतना खून - खराबा क्यों है ?

                सदियों तक इस देश में बच्चो रही हुकूमत गैरों की
          अभी तलक हम सबके मुँह  पर धुल है उनके पैरों की,
          लडवाओ और राज करो, यह उन लोगो की हिकमत थी
          उन लोगों की चल में आना हम लोगों की जिल्लत  थी,
          यह जो बैर है इक  दूजे से यह जो फुट और रंजिश है
          उन्ही विदेशी आकाओं  की सोची समझी बखशिश  है |

 कुछ इन्सान  ब्रहान क्यों है, कुछ इंसान हरिजन क्यों है,
एक की इतनी इज्जत क्यों है, एक की इतनी ज़िल्लत  क्यों है ?

धन और ज्ञान को ताकत वालों ने अपनी जागीर कहा
मेहनत और गुलामी को कमजोरों की तक़दीर कहा,
इन्सानों का यह बटवारा वहशत और जहालत है
जो नफ़रत की शिक्षा दे वह धर्म नहीं है , लानत है,
      जन्म  से कोई नीच नहीं है, जन्म  से कोई  महान  नहीं
      करम से बढ़कर  किसी मनुष्य की कोई भी पहचान नहीं |

ऊँचे महल बनाने वाले फुटपाथों पर क्यों नहीं रहते है,
दिन भर मेहनत करने वाले फाकों का दुख क्यों  सहते है ?

खेतों और मिलों पर अब तक धन वालों का इजारा है
हमको अपना देश प्यारा, उन्हें मुनाफा प्यारा है,
उनके राज में बनती है हर चीज़ तिजारत की खातिर
अपने राज में बना करेगी सब की जरुरत की खातिर,

अब तो देश में आज़ादी है अब क्यों जनता फरियादी  है,
कब जएगा दौर पुराना, कब आएगा नया जमाना ?

सदियों की भूख और बेकारी क्या इक दिन में जाएगी,
इस उजड़े गुलशन पर रंगत आते आते आएगी,
ये जो नये मनसूबे है ये जो नई तामीरे है 
आने वाली दौर की  कुछ धुधली -धुधली तस्वीरे है,
तुम ही रंग भरोगे इनमें तुम ही इन्हें चमकाओगे
नवयुग  आप नहीं आएगा नवयुग को तुम लाओगे । 

[Composer :N. Dutta;   Singer : Md. Rafi, Asha Bhonsle;  Actor : Sunil Dutt]

9 comments:

  1. This Song is ....

    Facts of Indian...



    Ye Song abhi ke Halat pe Ek Dam Sahi Utarta he ...



    सदियों तक इस देश में बच्चो रही हुकूमत गैरों की
    अभी तलक हम सबके मुँह पर धुल है उनके पैरों की,
    लडवाओ और राज करो, यह उन लोगो की हिकमत थी
    उन लोगों की चल में आना हम लोगों की जिल्लत थी,
    यह जो बैर है इक दूजे से यह जो फुट और रंजिश है
    उन्ही विदेशी आकाओं की सोची समझी बखशिश है |

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  2. अब तो देश में आज़ादी है अब क्यों जनता फरियादी है,
    कब जएगा दौर पुराना, कब आएगा नया जमाना ?
    😖😖😖😖😖😖

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  3. तुम ही रंग भरोगे इनमें तुम ही इन्हें चमकाओगे

    नवयुग आप नहीं आएगा नवयुग को तुम लाओगे ।

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  4. इस गाने में भारत की हकीकत बयां है । आशा जी की एवं रफी जी सुरीली आवाज़ ने इस गीत को चार चाँद लगा दिए ।

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  5. इस ब्लॉग पर बार-बार आता हूं। आता रहूंगा। -धीरेश

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  6. Jis Daur Mein Ye Geet Gaya Gaya Tab se Aaj Tak Kafi Parivartan aa chuka hai parantu Aaj Bhi Kai samasyayen jus ki tus bani hain. Umeed hai Aane Wale Samay mein yeah geet Purne roop se Sarthak hoga aur Apna Bharat Pune vishwaguru Banega.

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  7. अभी फिर से ग़ुलामी की ओर जा रहे हे
    विदेशी भाषा बोलते हे
    विदेशी भोजन करते हे
    विदेशी कपड़े पहनते हे
    एक दिन फिर से ग़ुलाम बनेगे
    सदियों तक ग़ुलामी सहेंगे
    फिर नये भगत सिंघ राजगुरु पैदा होंगे
    फिर से देश भक्तों का ख़ून बहेगा

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  8. भारत माँ ने राजीव दीक्षित जी को पैदा किया हे
    उनका अनुसरण करलो सारे विदेशी आका धुआँ धुआँ हो जायेंगे

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