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December 28, 2016

ईद का दिन है, गले आज तो मिल ले ज़ालिम (दीदार-ए-यार- 1982) Eid ka din hai, aaj to mil le gale zalim (Deedar-e-Yaar - 1982)

ईद का दिन है, गले आज तो मिल ले ज़ालिम
रस्मे-दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है

        इश्क़ इस तरह कि गुस्ताख़ तकाजे न करे
        हुस्न मस्तूर भी, मजबूर भी, मगरूर भी है (मस्तूर- veiled, hidden)
गुरूरे-हुस्न के सदके मुहब्बत यूं नहीं करते
        भरी महफिल में ज़ाहिर दिल की वहशत यूं नहीं करते

ये माना तुम हसीं हो और तुम्हें हक़ है शरारत का
किसी की जां पे बन जाए, शरारत यूं नहीं करते
        जिसे तुम हुस्न कहते हो, वो काबा है निगाहों का
        अदब लाज़िम है, काबे की जियारत यूं नहीं करते

कुछ अपने हुस्न की खैरात दे दो हम फकीरों को
किसी साइल को अपने दर से रुखसत यूं नहीं करते (साइल –begger, petitioner)
        हया और शर्म को हम हुस्न का जेवर समझते हैं
        ये जेवर लुट के रह जाए, सखावत यूं नहीं करते (सखावत -दानशीलता)
तुम्हारी इक नज़र पर फैसला है ज़िंदगानी का
मसीहा हो के बीमारों से गफ़लत यूं नहीं करते
        मसीहा और हम!! इन कुफ़्र की बातों से बाज़ आओ
        खुदा को छोड़कर बुत की इबादत यूं नहीं करते

आपने जो कहा वो ठीक सही, मेरा कहना भी कुछ बुरा तो नहीं
कि ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम
          रस्मे-दुनिया भी है, मौका भी है, दस्तूर भी है

(Composer : Laxmikant Pyarelal, Singer : Asha Bhonsle, Mohd. Rafi; , Director : H S Rawal, Producer:  Prasan Kapoor,  Actor : Rishi Kapoor, Tina Munim, Reena Roy)

March 05, 2014

सीता भी जहाँ सुख पा ना सकी, तू उस धरती की नारी है (-1982) Sita bhi jahan sukh paa na saki, tu us dharti kii naari hai (Lakshmi -1982)

ना तेरा दुर्भाग्य नया है, ना जग का व्यवहार नया
ना राहों के शूल नयी, ना पत्थर दिल संसार नया |

सीता भी जहाँ सुख पा ना सकी, तू उस धरती की नारी है
जो जुल्म तेरी तकदीर बना, वो जुल्म युगों से जारी है ।

वो कन्या हो या गर्भवती, नारी को सदा अपमान मिले
अवतारों की नस्ल बढ़ा कर भी, पतिताओं में स्थान मिले
सदियों से यहाँ हर अबला ने , रो रो कर उम्र गुज़री है ।

कहने को तो देवी कहलाई, पर नारी यहाँ दासी ही रही
दो प्यार के मीठे बोलों की, मरते दम तक प्यासी ही रही
जो जहर मिले वो पीती जा, तू कौन सी जनक दुलारी है  ।

मायका छूटा,  ससुराल छूटा, जायेगी मगर जायेगी कहाँ
अब बाल्मीकि सा कोई ऋषि, इस धरती पे पायेगी कहाँ
अब तू एक भटकती हिरनी है, और मर्द की नज़र शिकारी है
जो जुल्म तेरी तकदीर बना, वो जुल्म युगों से जारी है ।

[Composer : Usha Khanna, Singer : Mahender Kapoor, Director : B.S.Thapa, Producer : Raja Desai, Actor : Reena Roy] 
 

October 04, 2012

ये आँखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं (धनवान –1973) Yeh aankhen dekh kar hum sari duniya bhool jatey hain (Dhanwan – 1981)

ये आँखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं
इन्हें पाने की धुन में हर तमन्ना भूल जाते हैं |

       तुम अपनी महकी-महकी ज़ुल्फ़ के पेचों को कम कर दो
       मुसाफ़िर इनमें गिरकर अपना रस्ता भूल जाते हैं |

ये बाहें जब  हमें अपनी पनाहो में बुलाती हैं
हमे अपनी क़सम हम हर सहारा  भूल जाते हैं |

        तुम्हारे नर्म--नाज़ुक होंठ जिस दम मुस्कराते हैं
        बहारें झेंपती हैं फूल खिलना भूल जाते हैं |

बहुत कुछ तुम से कहने की तमन्ना दिल में रखते हैं
मगर जब सामने आते हैं  कहना भूल जाते हैं |

               
मुहब्बत में ज़ुबां चुप हो तो आँखें बात करतीं हैं
                वो
कह देती हैं सब  बातें जो कहना भूल जाते हैं |

[Composer :  Hridaynath Mangeshkar, Singer : Lata Mangeshkar,Suresh Wadekar, Producer: Sohanlal Kanwar, Director : Surender Mohan, Actor : Rakesh Roshan,  Reena Roy]