July 22, 2011

रात भी है कुछ भीगी भीगी (मुझे जीने दो -1963) Raat bhi hai kuch bheegi bheegi (Mujhe jino do -1963)

रात भी है कुछ भीगी भीगी,
चाँद भी है कुछ मद्धम मद्धम
तुम आओ तो आँखें खोलें
सोई हुई पायल की छम-छम 
छम-छम, छम-छम, छम-छम, छम-छम .

किसको बताएँ कैसे बताएँ
आज अजब है दिल का आलम
चैन भी है कुछ हल्का-हल्का
दर्द भी है कुछ मद्धम-मद्धम
छम-छम, छम-छम, छम-छम, छम-छम .

तपते दिल पर यूं गिरती है
तेरी नज़र से प्यार की शबनम
जलते हुए जंगल पर जैसे
बरखा बरसे रुक-रुक थम-थम
छम-छम, छम-छम, छम-छम, छम-छम .

होश में थोड़ी बेहोशी है
बेहोशी में होश है कम-कम
तुझको पाने की कोशिश में
दोनों जहां से खोये गए हम
छम-छम, छम-छम, छम-छम, छम-छम .  

[Music : Jaidev; Singer : Lata Mangeshkar; Producer ; Sunil Dutt;  Director ; Moni Bhattacharjee; Actor ; Sunil Dutt, Wahida Rehman]



तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ (मुझे जीने दो-1963) Tere bachpan ko jawani ki dua deti hoon (Mujhe jeene do-1963)

तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी  हो जाती हूँ |

मेरे  मुन्ने मेरे गुलज़ार के नन्हे पौधे
तुझको हालत की आंधी से बचाने के लिए
आज मैं प्यार के आँचल में छुपा लेती हूँ
कल ये कमजोर सहारा भी न हासिल होगा
कल तुझे काँटों भरी राहों पे चलाना होगा
जिंदगानी की कड़ी धूप में जलना होगा
तेरे बचपन  को  जवानी की दुआ देती हूँ |

तेरे माथे पे शराफत की कोई मोहर नहीं
चंद बोसें हैं मुहब्बत के, सो भी क्या हैं
मुझ सी माओं  की  मुहब्बत  का  कोई  मोल  नहीं
मेरे  मासूम  फ़रिश्ते  तू   अभी क्या जाने
तुझको किस किसके गुनाहों की सजा मिलनी 
है
दीन और धर्म के मारे हुए इंसानों की
जो नज़र मिलनी है तुझको वो खफा मिलनी है
तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी  हो जाती हूँ |
बेड़ियाँ लेके लपकता हुआ कानून का हाथ
तेरे माँ-बाप से जब तुझको मिली ये सौगात
कौन लाएगा तेरे वास्ते खुशियों  की बारात
मेरे बच्चे तेरे अंजाम से जी डरता है
तेरी दुश्मन ही न साबित हो जवानी तेरी
काँप जाती  है जिसे सोच के ममता मेरी
उसी अंजाम को पहुंचे न कहानी तेरी
तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी हो जाती हूँ |

[Music : Jaidev; Singer : Lata Mangeshkar; Producer ; Sunil Dutt;  Director ; Moni Bhattacharjee; Actor ; Sunil Dutt, Wahida Rehman]




संसार से भागे फिरते हो (चित्रलेखा - 1964) Sansar se bhage phirte ho (Chitralekha - 1964)

संसार से भागे फिरते होभगवान को तुम क्या पाओगे
इस लोक को भी अपना न सके, उस लोक में भी पछताओगे .
 
ये पाप है क्या, ये पुण्य है क्यारीतों पे धरम की मुहरें हैं
हर युग में बदलते धर्मों को कैसे आदर्श बनाओगे
 
ये भोग भी एक तपस्या हैतुम त्याग के मारे क्या जानो
अपमान रचयिता का होगा, रचना को अगर ठुकराओगे
 
हम कहते हैं ये जग अपना हैतुम कहते हो झूठा सपना है
हम जन्म बिता कर जायेंगे, तुम जन्म गंवा कर जाओगे


[Composer :  Roshan;   Singer : Lata Mangeshkar;  Producer : Pusha Picture ;  Director: Kidar Nath Sharma; Actor : Meena Kumari]

 
Note :   केदार शर्मा ने  सन 1941 में भी चित्रलेखा फिल्म बनाई थी | उसमें एक गीत था- तुम जाओ जाओ भगवान बने | इसके बोल नीचे दिए गए हैं । सन 1964 में बनी चित्रलेखा के लिए साहिर ने इसी सिचुऐशन पर संसार से भागे फिरते हो” गीत लिखा |  

तुम जाओ जाओ भगवान बने
इंसान बनो तो जाने |

तुम उनके जो तुमको ध्यायें 
जो नाम रटें मुक्ति पायें
हम पाप करें और दूर रहें
तुम प्यार करें तो माने

तुम जाओ जाओ भगवान बने
इंसान बनो तो जाने |
 

Some Couplets from the songs of Sahir

मैंने जज्बात निभाए हैं उसूलों की जगह

                जो साज से निकली है वो धुन सबने सुनी है
                जो तार पे गुजरी है इस दिल को पता है

अब उस खेल का जिक्र ही क्या,
वक्त कटा और खेल तमाम

                देखा है जिंदगी को कुछ इतना करीब से
               चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से

उतना ही उपकार समझ कोई जितना साथ निभा दे,
जनम मरण का मेल है सपनाये सपना बिसरा दे,
कोई संग मरे
मन रे ! तू कहे धीर धरे

               जनम का कोई मोल नहीं है
               जनम मनुष का तोल नहीं है
               करम से सबकी है पहचान
               सबको सन्मति दे भगवान

क्या मुल्ला क्या बिरहमन पांडे 
सब हैं इक माटी के भांडे 


               इन्साफ तेरे साथ हैइल्जाम उठा ले
               अपने पे भरोसा हैतो ये दांव लगा ले

मौत आयी तो मर भी लेंगे
मौत से पहले मरना क्या

              गम और खुशी में फर्क महसूस हो जहां,
              मैं दिल को उस मुकाम पे लाता चला गया॥

जिन्दगी भीख में नहीं मिलती,
जिन्दगी बढ़ के छीनी जाती है
अपना हक़  संगदिल जमाने से
छीन पाओ तो कोई बात बने
   
             उस सुबह को हम ही लायेंगे,

            वो सुबह हमीं से आएगी
जहाँ बस्ती थी खुशियाँ, आज हैं मातम वहाँ 
वक़्त लाया था बहारें वक़्त लाया है खिजां । 

वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज । 

वक़्त की गर्दिश से है, चाँद तारों का निजाम
वक़्त की ठोकर में है क्या हुकूमत क्या समाज । 

वक़्त की पाबंद हैं आती जाती रौनकें
वक़्त है फूलों के सेज, वक़्त है काँटों का ताज । 

आदमी को चाहिए वक़्त से डर कर रहे
कौन जाने किस घड़ी वक़्त का बदले मिजाज । 

वक़्त के आगे उड़ी कितनी तहजीबों की धूल
वक़्त के आगे मिटे कितने मजहब और रिवाज़ । 

(The last couplet was not used in movie.  I have taken it from the compilation of Sahir's song "Gata Jaye Banjara" published by Hindi Book Centre, New Delhi, 1993 Edition, Page 124) 

[Music : Ravi;  Singer : Md.Rafi; Producer : B.R.Chopra; Director : Yash Chopra;  Actor : Balraj Sahni]


वक़्त से दिन और रात (वक़्त -1965) Waqt se din aur raat (Waqt -1965)

जहाँ बस्ती थी खुशियाँ, आज हैं मातम वहाँ 
वक़्त लाया था बहारें वक़्त लाया है खिजां । 

वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै गुलाम, वक़्त का हर शै पे राज । 

वक़्त की गर्दिश से है, चाँद तारों का निजाम
वक़्त की ठोकर में है क्या हुकूमत क्या समाज । 

वक़्त की पाबंद हैं आती जाती रौनकें
वक़्त है फूलों के सेज, वक़्त है काँटों का ताज । 

आदमी को चाहिए वक़्त से डर कर रहे
कौन जाने किस घड़ी वक़्त का बदले मिजाज । 

वक़्त के आगे उड़ी कितनी तहजीबों की धूल
वक़्त के आगे मिटे कितने मजहब और रिवाज़ । 

(The last couplet was not used in movie.  I have taken it from the compilation of Sahir's song "Gata Jaye Banjara" published by Hindi Book Centre, New Delhi, 1993 Edition, Page 124) 

[Music : Ravi;  Singer : Md.Rafi; Producer : B.R.Chopra; Director : Yash Chopra;  Actor : Balraj Sahni]