May 16, 2013

छू लेने दो नाज़ुक होठों को (काजल -1965) Choo lene do nazuk hontho ko (Kaajal -1965)

छू लेने दो नाज़ुक होठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हमको बख़्शा है, वो सबसे हसीं ईनाम हैं ये |

शरमा के यूँ ही खो देना, रंगीन जवानी की घड़ियाँ
बेताब धड़कते सीनों का, अरमान भरा पैगाम है ये  |

अच्छों को बुरा साबित करना, दुनिया की पुरानी आदत है
इस मै को मुबारक चीज़ समझ, माना कि बहुत बदनाम है ये  | 

[Composer : Ravi, Singer : Md.Rafi, Production : Kalpanalok; Direction :Ram MaheshwaryActor : Raj Kumar, Meena Kumari]



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