July 22, 2011

तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ (मुझे जीने दो-1963) Tere bachpan ko jawani ki dua deti hoon (Mujhe jeene do-1963)

तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी  हो जाती हूँ |

मेरे  मुन्ने मेरे गुलज़ार के नन्हे पौधे
तुझको हालत की आंधी से बचाने के लिए
आज मैं प्यार के आँचल में छुपा लेती हूँ
कल ये कमजोर सहारा भी न हासिल होगा
कल तुझे काँटों भरी राहों पे चलाना होगा
जिंदगानी की कड़ी धूप में जलना होगा
तेरे बचपन  को  जवानी की दुआ देती हूँ |

तेरे माथे पे शराफत की कोई मोहर नहीं
चंद बोसें हैं मुहब्बत के, सो भी क्या हैं
मुझ सी माओं  की  मुहब्बत  का  कोई  मोल  नहीं
मेरे  मासूम  फ़रिश्ते  तू   अभी क्या जाने
तुझको किस किसके गुनाहों की सजा मिलनी 
है
दीन और धर्म के मारे हुए इंसानों की
जो नज़र मिलनी है तुझको वो खफा मिलनी है
तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी  हो जाती हूँ |
बेड़ियाँ लेके लपकता हुआ कानून का हाथ
तेरे माँ-बाप से जब तुझको मिली ये सौगात
कौन लाएगा तेरे वास्ते खुशियों  की बारात
मेरे बच्चे तेरे अंजाम से जी डरता है
तेरी दुश्मन ही न साबित हो जवानी तेरी
काँप जाती  है जिसे सोच के ममता मेरी
उसी अंजाम को पहुंचे न कहानी तेरी
तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
और दुआ देके परेशान सी हो जाती हूँ |

[Music : Jaidev; Singer : Lata Mangeshkar; Producer ; Sunil Dutt;  Director ; Moni Bhattacharjee; Actor ; Sunil Dutt, Wahida Rehman]




1 comment:

  1. बहुत सुंदर लोरी जो अजब सिचुएशन के लिए साहिर ने लिखी. आपका आभार.

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