December 28, 2016

इस धरती इस खुले गगन का क्या कहना (गंगा तेरा पानी अमृत -1971) Is dharti is khule gagan ka kya kahna (Ganga Tera Pani Amrit -1971)

इस धरती इस खुले गगन का क्या कहना
मदमाती मद भरी पवन का क्या कहना
फूलों भरे ये गुलशन हरे
मगन हुआ तन मन क्या कहना

ग्वालनों का रूप घूंघटों की आढ़ में
पंछियों का प्यार बेरियों के झाड़ में
बांसुरी की तान, खेतियों के पार से
पनघटों की नार डोले इस पुकार से
धड़कन बढ़े, नशा-सा चढ़े,
थिरक उठे झांझन क्या कहना 

चप्पुओं के राग कह रहे हैं प्यार से
जुड़ गए है घाट कश्तियों के तार से
जा रहा है कौन जाने किसकी चाह में
बस रहा है कौन जाने किस निगाह में
दो दिल मिले, तो कलियां खिले
मचल उठे धड़कन क्या कहना
इस धरती इस खुले गगन का क्या कहना

      थक गयी निगाह तब कहीं तुम आए हो
      क्या मेरी पुकार सुन के भी पराये हो
      इतना इंतज़ार रोज कर ना पाऊंगी
      रोक लूंगी आज या मैं साथ जाऊंगी
      दूरी कटे ये दुविधा हटे
      तो फिर मेरे साजन क्या कहना
      इस धरती इस खुले गगन का क्या कहना


[Composer : Ravi, Singer ; Md. Rafi, Asha Bhonsle, Actor : Navin Nischal, Yogita Bali]

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