April 17, 2015

उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी (नया दौर-1957) Ude jab jab zulfen teri (Naya Daur -1957)

उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी, कंवारियों का दिल मचले
जिन्द मेरिये
जब ऐसे चिकने चेहरे, तो कैसे न नज़र फिसले
जिन्द मेरिये

रुत प्यार करन की आयी, के बेरियों के बेर पक गये
जिंद मेरिये
कभी डाल इधर भी फेरा, के तक तक नैन थक गये
जिन्द मेरिये

उस गाँव पे सँवर कभी सदके, के जहाँ मेरा यार बसता
जिंद मेरिये
पानी लेने के बहाने आजा, के तेरा मेरा इक रस्ता
जिन्द मेरिये

तुझे चाँद के बहाने देखूँ, तू छत पर आजा गोरिये
जिंद मेरिये

अभी छेड़ेंगे गली के सब लड़के, के चाँद बैरी छिप जाने दे
जिन्द मेरिये

तेरी चाल है नागन जैसी, री जोगी तुझे ले जायेंगे
जिंद मेरिये
जायेँ कहीं भी मगर हम सजना, ये दिल तुझे दे जायेंगे
जिन्द मेरिये


[Composer : O.P.Nayyar, Singer: Asha Bhonsle, Md.Rafi, Producer & Director: B.R.Chopra, Actor : Dilip Kumar, Vaijyanthi Mala]
 

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